Maharashtra Politics: कुछ तो बड़ा हो रहा है! सीएम शिंदे की गणेश पूजा में पहले डोभाल तो अब अमित शाह पहुंचे
Maharashtra Politics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सोमवार पांच सितंबर को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने लाल बाग के राजा के दर्शन किए। उसके बाद वे बांद्रा पश्चिम के प्रभादेवी में सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा स्थापित गणेश के दर्शन व पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए...
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महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ बड़ा होने के कयास लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर पहले 'राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार' अजीत डोभाल ने गणपति के दर्शन किए थे। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सीएम आवास पर पहुंच गए हैं। उन्होंने दोपहर को शिंदे के आवास पर गणपति के दर्शन किए हैं। अभी शिवसेना और शिंदे के बीच, पार्टी विवाद खत्म नहीं हुआ है। दशहरा रैली की जगह को लेकर भी दोनों के बीच विवाद चल रहा है। इस बीच शिंदे सरकार ने पिछली महाविकास आघाड़ी 'एमवीए' सरकार का वह फैसला पलट दिया है, जिसमें एमएलसी के लिए 12 नाम प्रस्तावित किए गए थे। शिंदे सरकार, अब नए सिरे से उस सूची को राजभवन भेजेगी। सीएम एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को लिखे पत्र में कहा है कि एमवीए सरकार द्वारा भेजे गए 12 एमएलसी के नाम मौजूदा सरकार, वापस लेना चाहती है।
डोभाल ने समुद्र को लेकर मुंबई पुलिस को किया सचेत
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी गत सप्ताह मुंबई पहुंचे थे। उन्होंने पहले राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से मुलाकात की। उसके बाद वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर पहुंचे। इतना ही नहीं, बाद में डोभाल, पूर्व सीएम और मौजूदा डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के आवास पर पहुंचे। मुलाकात के इस सिलसिले को इसलिए अहम बताया जा रहा है, क्योंकि एनएसए डोभाल ने उक्त सभी लोगों से अलग-अलग बातचीत की है। हालांकि डोभाल ने महाराष्ट्र पुलिस के डीजीपी रजनीश सेठ व मुंबई के पुलिस आयुक्त विवेक फनसालकर सहित कई दूसरे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी मुलाकात की है। पिछले दिनों मुंबई पुलिस की यातायात हेल्पलाइन पर कुछ व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए थे। इनमें मुंबई पर '26/11' जैसे बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की धमकी दी गई। डोभाल ने करीब दो घंटे तक पुलिस अधिकारियों के साथ गहन विचार विमर्श किया। उन्होंने मुंबई पुलिस को सचेत करते हुए कहा, समुद्र पर नजर रखें। आतंकी, समुद्र के रास्ते हथियार और ड्रग्स लाने का प्रयास कर रहे हैं। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय कर वहां गश्त बढ़ाई जाए। सूचनाएं जुटाने के लिए लोकल इंटेलिजेंस को मशक्कत करनी होगी।
सियासी घमासान के बीच डोभाल व शाह की यात्रा
शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने वाले एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच इस बात पर विवाद चल रहा है कि 'शिवसेना' किसकी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले को देख रही है। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से दलील पेश करते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि आज भी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ही हैं। एकनाथ शिंदे के पास दो विकल्प हैं, उन्हें या तो नई पार्टी बनानी होगी या फिर किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय करना होगा। शिवसेना का चुनाव चिन्ह 'धुनष और बाण' किसका होगा, इस मामले में 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारणवश सुनवाई नहीं हो सकी। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, दोनों की याचिकाएं अभी लंबित हैं। राजनीतिक जानकार, शाह और डोभाल की यात्रा को सुरक्षा कारणों से अलग एक दूसरे एंगल से भी देख रहे हैं। भाजपा का प्रयास है कि शिंदे गुट को 'शिवसेना' मिल जाए। इसके जरिए उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे शिंदे के आवास
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सोमवार पांच सितंबर को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने लाल बाग के राजा के दर्शन किए। उसके बाद वे बांद्रा पश्चिम के प्रभादेवी में सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा स्थापित गणेश के दर्शन व पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। तीसरे कार्यक्रम के तहत गृह मंत्री ने दोपहर को सीएम आवास पर गणेश के दर्शन किए। इसके अलावा एएम नाइक स्कूल का उद्घाटन भी गृह मंत्री के कार्यक्रमों में शामिल है। अमित शाह और शिंदे की मुलाकात में महाराष्ट्र की राजनीति पर भी चर्चा हुई है। एमएलसी के लिए 12 नए नामों पर विचार किया गया है। पूर्व उद्धव ठाकरे सरकार ने जिन नामों की सिफारिश की थी, उनमें उर्मिला मातोंडकर, एकनाथ खडसे, विजय करंजकर, नितिन बानुगड़े पाटिल, चंद्रकांत रघुवंशी, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे, गायक आनंद शिंदे, रजनीताई पाटिल, सचिन सावंत, अनिरुद्ध वांकर व मुजफ्फर हुसैन का नाम शामिल किया गया था। दशहरा रैली के लिए जगह, इस मुद्दे पर भी दोनों गुट आमने-सामने हैं। हालांकि एनसीपी प्रमुख शरद पवार, इस मामले में मुख्यमंत्री शिंदे को यह सुझाव दे चुके हैं कि उन्हें रैली स्थल को लेकर किसी तरह के टकराव से बचना चाहिए।