फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   New Army Chief General Upendra Dwivedi to face many challenges Agnipath to Terrorism and China know more

New Army Chief: नए आर्मी चीफ के सामने है चुनौतियों का अंबार, अग्निपथ से लेकर आतंकवाद और चीन बनेंगे चैलेंज

Mon, 01 Jul 2024 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Mon, 01 Jul 2024 05:06 PM IST
विज्ञापन
सार
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रविवार 30 जून को 12 लाख से ज्यादा फौजियों वाली भारतीय सेना के नए सेनाध्यक्ष की बागडोर संभाली। सोमवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मीडिया को संबोधित करते कहा कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच तालमेल सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगा। 
loader
New Army Chief General Upendra Dwivedi to face many challenges Agnipath to Terrorism and China know more
उपेंद्र द्विवेदी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय सेना के 30वें नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी की टेक्नोलॉजी में काफी रूचि है। जनरल उपेंद्र द्विवेदी वह अधिकारी हैं, जिन्होंने चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच नॉर्दन कमांड में सेना के मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम को सफलतापूर्वक लागू किया। टेक्नोलॉजी के साथ-साथ उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' कार्यक्रम के तहत स्वदेशी हथियारों को विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाई है। वहीं, उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं। उन्हें चीन से मिल रही चुनौती के साथ जम्मू क्षेत्र में बढ़ रहीं आतंकी गतिविधियां, थिएटर कमांड का सफलतापूर्वक लागू करना और सेना की अग्निपथ स्कीम जैसे बड़े मसले का हल भी निकालना होगा। 


जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रविवार 30 जून को 12 लाख से ज्यादा फौजियों वाली भारतीय सेना के नए सेनाध्यक्ष की बागडोर संभाली। सोमवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मीडिया को संबोधित करते कहा कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच तालमेल सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगा। वह रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सेना में स्वदेश निर्मित सैन्य उपकरणों को शामिल करने को प्रोत्साहित करेंगे। 


फिजिकल ट्रेनिंग में ब्लू स्ट्रैप से हो चुके हैं सम्मानित
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के निजी जीवन के बारे में बात करते हुए उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि अपनी स्कूली शिक्षा के दिनों से ही वह एक उत्कृष्ट खिलाड़ी रहे हैं और एनडीए और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) दोनों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्हें फिजिकल ट्रेनिंग में ब्लू स्ट्रैप से सम्मानित किया गया था। वहीं उनकी टेक्नोलॉजी में भी काफी रूचि रही है। वह भारतीय सेना की सबसे बड़ी कमान के आधुनिकीकरण और उसे सुसज्जित करने में भी शामिल थे, तथा उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी हथियारों को शामिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तरी कमान में अपने कार्यकाल के दौरान, सेना ने नई तोपें, कई तरह के ड्रोन, लोइटरिंग गोला-बारूद, अगली पीढ़ी की बियॉन्ड-लाइन-ऑफ-साइट गाइडेड मिसाइल, दुश्मन के हवाई वाहनों को गिराने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष हाई एल्टीट्यूड वाले टैंक और मिसाइल लांचर प्राप्त करने की योजना पर काम किया। इनमें से कई उपकरण अब शामिल किए जा चुके हैं या खरीदे जाने की प्रक्रिया में हैं और इनका उपयोग हिमालय क्षेत्र के साथ किया जाना है।

असली खतरा चीन से है
अमर उजाला से खास बातचीत में पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक कहते हैं कि 1984 में जम्मू-कश्मीर राइफल्स में कमीशन प्राप्त जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस साल फरवरी में उप-प्रमुख बनने से पहले महत्वपूर्ण नॉर्दन कमांड के जीओसी-इन-सी के रूप तौर पर दो साल का कार्यकाल पूरा किया था। वह कहते हैं कि वे चीन से चल रहे गतिरोध को अच्छे से समझते हैं और पहचानते हैं। वे काफी अनुभवी हैं। उन्हें चीन से पैदा हो रहे खतरों पर ध्यान देना होगा, क्योंकि असली खतरा चीन से है। सीमाओं पर चीन की नई चुनौती है, जिससे निपटने के लिए नए सेना प्रमुख को पेशेवर ध्यान और कुशलता की आवश्यकता होगी, तथा मजबूत प्रतिरोधक क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा। 

चीन-पाकिस्तान का गठबंधन बेहद खतरनाक
ऐसे समय में जब चीन ने सलामी-स्लाइसिंग और ग्रे ज़ोन युद्ध में महारत हासिल कर ली है, और पाकिस्तान प्रॉक्सी वार को जारी रखे हुए है। इस पर जनरल वीपी मलिक कहते हैं कि चीन और पाकिस्तान का जो ये नापाक गठबंधन है, इस खतरे से भी उन्हें जूझना होगा। चीन को साधने के लिए तो हमने चीनी सीमा एलएसी पर 50-60 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दी है, लेकिन पाकिस्तान को साधना बेहद जरूरी है।

जनरल मलिक कहते हैं कि भले ही भारत-पाकिस्तान सीमा पर सीजफायर है, लेकिन पाकिस्तान ने प्रॉक्सी वार छेड़ रखी है। चाहे बालाकोट हो या उरी सर्जिकल स्ट्राइक, पाकिस्तान को इससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। उससे शांति की बातें करना बेकार है और अपने आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रॉक्सी संगठनों के जरिए कश्मीर में माहौल खराब करने की लगातार कोशिश करता रहेगा।

जम्मू में 16 कोर पर ध्यान देने की जरूरत
सैन्य सूत्रों ने कहा कि घाटी में जबकि सुरक्षा स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर है। लेकिन जम्मू में आतंकी फिर से पैर पसारने लगे हैं। आतंकियों के सात दल सक्रिय है और घने जंगलों में छुपे हुए हैं। डोडा और राजौरी, पुंछ इलाकों में आतंकियों के सफाए के लिए ऑपरेशन तेज हो गए हैं। यह इलाका  भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स यानी 16 कोर के तहत आती है। 16 कोर, जो पीर पंजाल रेंज के दक्षिणी क्षेत्रों की देखभाल करती है, ने पिछले तीन वर्षों में कई बड़े आतंकवादी हमलों को देखा है। आतंकियों के सफाए में अहम योगदान देने वाली राष्ट्रीय राइफल्स की डेल्टा फोर्स और रोमियो फोर्स 16 कोर के तहत आती हैं। वह कहते हैं कि नए आर्मी चीफ को 16 कोर पर ध्यान देने की जरूरत है, जिसकी कमान फिलहाल लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा के हाथों में है। सूत्र बताते हैं कि सवाल यह है कि इंटेलिजेंस क्यों फेल हो रहा है और ह्यमून इंटेलिजेंस क्यों इतना कमजोर हुआ है। वह कहते हैं कि नए सेनाध्यक्ष को अंदरूनी तौर पर इस कोर की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी होगी, ताकि भविष्य में इस इलाके में आतंकी हमलों को रोका जा सके।    

इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड दें ध्यान
जनरल वीपी मलिक आगे कहते हैं कि नए सेनाध्यक्ष के सामने और भी कई चुनौतियां हैं। हिंद महासागर में कई चुनौतियां पैदा हो रही हैं। चीन, श्रीलंका और मालदीव सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। वहीं, इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने को लेकर जनरल मलिक कहते हैं कि इस पर तेजी से ध्यान देना पड़ेगा। चीन-पाकिस्तान से संभावित खतरे को देखते हुए यह बेहद जरूरी है। इसे हर हाल में तय वक्त पर पूरा किया जाना जरूरी है। इसके अलावा सेना के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान देना होगा। नई टेक्नोलॉजी के साथ नए हथियार सेना के लिए बेहद जरूरी हैं। सेना को आधुनिकिकरण की सख्त जरूरत है। वहीं, सीमा पार से हो रही आतंकियों की घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए 24X7 बॉर्डर सर्विलांस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। सैटेलाइट, यूएवी और रडार के जरिए इस घुसपैठ को रोका जाए। 

थिएटर कमांड को लेकर रक्षा मंत्रालय ने 30 जून को ही अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक पॉडकास्ट डाला था, जिसमें जनरल द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी का साक्षात्कार लिया गया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि "हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। एक बार जब हम (सेना और नौसेना प्रमुख) सहयोग, एकीकरण और साथ काम करने को लेकर सहमत हो गए हैं, तो हमारी सेवाओं के बीच कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए"। दोनों सैनिक स्कूल, रीवा, मध्य प्रदेश में एक ही कक्षा में एक साथ पढ़ते थे।

आधुनिक हथियारों की कमी से जूझ रही सेना  
वहीं सेना के पास हथियारों की कमी है। आपातकालीन खरीद के बावजूद, सेना अभी भी कई क्षेत्रों में प्रमुख ऑपरेशनल खामियों से जूझ रही है, जिसमें आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और चौथी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से लेकर हमलावर और हल्के उपयोगिता वाले हेलीकॉप्टर शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार डीआरडीओ सेना की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप तो तैयार कर देता है, लेकिन सेना के हाथों तक पहुंचने में लंबा वक्त लग जाता है। नए सेनाध्यक्ष के सामने यह भी चुनौती होगी कि कैसे स्वदेशी हथियारों को सेना की जरूरत के हिसाब से और उनके मानकों पर फिट बैठने वाले प्रॉडक्ट तैयार करें। यह 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उत्तरी और पूर्वी कमान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। एलएसी के पश्चिमी (लद्दाख) और मध्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल) में भारी हथियारों के साथ 50,000 से 60,000 चीनी सैनिक तैनात हैं। चीन ने पूर्वी क्षेत्र (सिक्किम, अरुणाचल) में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जहां 90,000 और सैनिक तैनात हैं। सेना के मॉर्डनाइजेशन पर ध्यान देने की जरूरत है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, "जनरल को आधुनिक और उभरती हुई तकनीकों की गहरी समझ है और उनके पास सैन्य प्रणालियों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग और एकीकरण करने का एक विचारशील दृष्टिकोण है।"

अग्निपथ स्कीम को राजनीतिक मुद्दा बनने से रोकना होगा
सेना 2022 में अग्निपथ स्कीम लेकर आई थी। तब से लेकर अभी तक इसका युवाओं में विरोध हो रहा है। वहीं अब यह राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। सेना ने अग्निवीर स्कीम को लेकर फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। सेना के सूत्रों का कहना है कि उप प्रमुख के रूप में जनरल द्विवेदी ने अग्निपथ पर अपनी राय दी थी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की अध्यक्षता वाले सैन्य मामलों के विभाग ने रक्षा मंत्रालय को अग्निपथ योजना के चार मुद्दों से अवगत कराया है, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। इनमें सैनिक की मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करना, सेवा की अवधि तय करना, चार साल की अवधि के बाद सेवा में रखे जाने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि करना और सेवा में नहीं रखे जाने वाले लोगों के लिए नौकरी-प्लेसमेंट संभालने वाली एक विशेष एजेंसी शामिल है। इसके अलावा सेना में पहले से ही युद्ध के लिए तैयार सैनिकों की कमी है, जो अग्निपथ योजना में बदलाव के बिना हर गुजरते साल के साथ और भी बढ़ती जाएगी। बेशक, सेना को अपने गैर-संचालन भार को भी कम करने की जरूरत है। लेकिन सेना की जरूरतों और मनोबल का ध्यान रखते हुए आर्मी चीफ के तौर पर जनरल द्विवेदी को मजबूत स्टैंड लेना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed