{"_id":"693975e75b8196472204aca4","slug":"security-forces-ambush-125-terrorists-ready-to-cross-border-infiltration-for-65-passengers-in-valley-2025-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा बलों की दोहरी चुनौती, घाटी में 65 पाकिस्तानी दहशतगर्द तो सीमा पार घुसपैठ के लिए तैयार 125 आतंकी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुरक्षा बलों की दोहरी चुनौती, घाटी में 65 पाकिस्तानी दहशतगर्द तो सीमा पार घुसपैठ के लिए तैयार 125 आतंकी
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 10 Dec 2025 07:26 PM IST
विज्ञापन
सार
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से निपटना, इस बार सुरक्षा बलों के लिए दोहरी चुनौती है। कश्मीर घाटी और दूसरे हिस्सों की बात करें तो वहां पर '65' पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे हैं। लगभग दर्जनभर लोकल आतंकी भी बताए जा रहे हैं।
Security forces
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से निपटना, इस बार सुरक्षा बलों के लिए दोहरी चुनौती है। कश्मीर घाटी और दूसरे हिस्सों की बात करें तो वहां पर '65' पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे हैं। लगभग दर्जनभर लोकल आतंकी भी बताए जा रहे हैं। जेएंडके में पिछले कुछ वर्षों में लोकल आतंकियों की संख्या तेजी से कम हुई है। सुरक्षा बलों के लिए दोहरी चुनौती इसलिए है क्योंकि घाटी में मौजूद आतंकवादियों के अलावा सीमा पार के लांचिंग पैड पर 125 से ज्यादा दहशतगर्द, घुसपैठ के इंतजार में बैठे हैं। बर्फबारी के दौरान ये आतंकवादी, घुसपैठ का प्रयास कर सकते हैं। बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर के आईजी अशोक यादव ने कहा है कि आतंकियों की सभी कोशिशों को विफल किया जाएगा। बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर के जवान, आर्मी के साथ मिलकर 'एलओसी' पर दबदबा बनाए हुए हैं। सुरक्षा बलों ने सर्दियों में घुसपैठ रोकने का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है।
बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर के आईजी अशोक यादव के मुताबिक, इस वर्ष कश्मीर में घुसपैठ के चार प्रयास हुए हैं। सभी प्रयासों को विफल कर दिया गया। बॉर्डर पर आठ घुसपैठियों को मार दिया गया। जवानों की सतर्कता के चलते करीब आधा दर्जन घुसपैठिये, वापस पाकिस्तान की तरफ भाग गए। पाकिस्तान की सीमा में 69 लॉन्चिंग पैड मौजूद हैं। यहां पर करीब 125 ट्रेंड आतंकी बैठे हैं। भारतीय सेना के साथ मिलकर आतंकियों की सभी कोशिशों को विफल किया जाएगा। पहलगाम सहित कई जगहों पर सुरक्षा ग्रिड का विस्तार किया गया है। सेना और पुलिस के साथ मिलकर, बीएसएफ द्वारा घुसपैठ रोकने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। जम्मू से लगती सीमा पर बीएसएफ ने 'बॉर्डर पुलिस पोस्ट' के साथ मिलकर सीमावर्ती गांवों में सर्च अभियान शुरु किया गया है।
जम्मू कश्मीर से लगती सीमा पर सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए बॉर्डर गार्डिंग फोर्स को ड्रोन, थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइस, सेंसर और रीयल-टाइम रडार/ऑप्टिकल सिस्टम सहित उन्नत निगरानी तकनीकों से लैस किया गया है। सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए साझेदार देशों के साथ खुफिया जानकारी साझा की जा रही है। बॉर्डर के कई हिस्सों पर व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली के जरिए सर्विलांस प्रारंभ किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, बेहतर बाड़बंदी, गहन गश्त, ड्रोन और सेंसर की मदद से संवेदनशील सीमाओं पर सुरक्षा घेरे को मजबूत किया गया है।
सुरक्षा बलों के लिए अगले दो-तीन माह चुनौती भरे रह सकते हैं। घाटी में मौजूद विदेशी (पाकिस्तानी) आतंकियों की बात करें तो वह संख्या 65 बताई जा रही है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। सभी खुफिया एजेंसियां, बहुत सावधानी से उक्त आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेएंडके की सुरक्षा स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में कह चुके हैं कि सर्दियां आ रही हैं। ऐसे में सीमा पार के आतंकवादी, बर्फबारी का फायदा उठाकर घुसपैठ न कर पाएं, इसके लिए हमारे सुरक्षा बल हर तरह से तैयार रहें।
सूत्र बताते हैं कि घाटी में मौजूद पाकिस्तानी मूल के दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ये आतंकी 'ए' ग्रेड वाली श्रेणी में आते हैं। घाटी में लोकल आतंकियों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है, लेकिन पाकिस्तानी मूल के 'ए' ग्रेड आतंकियों के रहते हुए जेएंडके में आतंकी हमले की आशंका बनी रहती है। इन आतंकियों को लोकल स्पोर्ट मिलना अभी तक बंद नहीं हुआ है। कई जगहों पर इनके मददगार यानी 'ओवर ग्राउंड वर्कर', सक्रिय हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। इन्हीं मददगारों के बल पर ये आतंकवादी, जम्मू कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं। राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादत हुई थी। राजौरी मुठभेड़ में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी था। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक टेरोरिस्ट था। उसे पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड किया गया था।
जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। सितंबर 2023 में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे।
नेपाल और बांग्लादेश का मार्ग, आतंकियों के भारत में प्रवेश करने का एंट्री प्वाइंट तो नहीं बन रहा, ये बात सुरक्षा एजेंसियों के दिमाग में है। पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों या पहाड़ी गुफाओं में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस चुकी है। अब वहां पर जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
Trending Videos
बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर के आईजी अशोक यादव के मुताबिक, इस वर्ष कश्मीर में घुसपैठ के चार प्रयास हुए हैं। सभी प्रयासों को विफल कर दिया गया। बॉर्डर पर आठ घुसपैठियों को मार दिया गया। जवानों की सतर्कता के चलते करीब आधा दर्जन घुसपैठिये, वापस पाकिस्तान की तरफ भाग गए। पाकिस्तान की सीमा में 69 लॉन्चिंग पैड मौजूद हैं। यहां पर करीब 125 ट्रेंड आतंकी बैठे हैं। भारतीय सेना के साथ मिलकर आतंकियों की सभी कोशिशों को विफल किया जाएगा। पहलगाम सहित कई जगहों पर सुरक्षा ग्रिड का विस्तार किया गया है। सेना और पुलिस के साथ मिलकर, बीएसएफ द्वारा घुसपैठ रोकने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। जम्मू से लगती सीमा पर बीएसएफ ने 'बॉर्डर पुलिस पोस्ट' के साथ मिलकर सीमावर्ती गांवों में सर्च अभियान शुरु किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू कश्मीर से लगती सीमा पर सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए बॉर्डर गार्डिंग फोर्स को ड्रोन, थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइस, सेंसर और रीयल-टाइम रडार/ऑप्टिकल सिस्टम सहित उन्नत निगरानी तकनीकों से लैस किया गया है। सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए साझेदार देशों के साथ खुफिया जानकारी साझा की जा रही है। बॉर्डर के कई हिस्सों पर व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली के जरिए सर्विलांस प्रारंभ किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, बेहतर बाड़बंदी, गहन गश्त, ड्रोन और सेंसर की मदद से संवेदनशील सीमाओं पर सुरक्षा घेरे को मजबूत किया गया है।
सुरक्षा बलों के लिए अगले दो-तीन माह चुनौती भरे रह सकते हैं। घाटी में मौजूद विदेशी (पाकिस्तानी) आतंकियों की बात करें तो वह संख्या 65 बताई जा रही है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। सभी खुफिया एजेंसियां, बहुत सावधानी से उक्त आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेएंडके की सुरक्षा स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में कह चुके हैं कि सर्दियां आ रही हैं। ऐसे में सीमा पार के आतंकवादी, बर्फबारी का फायदा उठाकर घुसपैठ न कर पाएं, इसके लिए हमारे सुरक्षा बल हर तरह से तैयार रहें।
सूत्र बताते हैं कि घाटी में मौजूद पाकिस्तानी मूल के दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ये आतंकी 'ए' ग्रेड वाली श्रेणी में आते हैं। घाटी में लोकल आतंकियों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है, लेकिन पाकिस्तानी मूल के 'ए' ग्रेड आतंकियों के रहते हुए जेएंडके में आतंकी हमले की आशंका बनी रहती है। इन आतंकियों को लोकल स्पोर्ट मिलना अभी तक बंद नहीं हुआ है। कई जगहों पर इनके मददगार यानी 'ओवर ग्राउंड वर्कर', सक्रिय हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। इन्हीं मददगारों के बल पर ये आतंकवादी, जम्मू कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं। राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादत हुई थी। राजौरी मुठभेड़ में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी था। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक टेरोरिस्ट था। उसे पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड किया गया था।
जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। सितंबर 2023 में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे।
नेपाल और बांग्लादेश का मार्ग, आतंकियों के भारत में प्रवेश करने का एंट्री प्वाइंट तो नहीं बन रहा, ये बात सुरक्षा एजेंसियों के दिमाग में है। पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों या पहाड़ी गुफाओं में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस चुकी है। अब वहां पर जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमलों को अंजाम दे रहे हैं।