आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नहीं घटेंगी नौकरियां, खुलेंगे नए रास्ते: महेंद्र नाथ पाण्डे
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मंदी की मार से बेहाल ऑटो सेक्टर में छंटनी की खबरें आने के बाद बाकी सेक्टर्स में भी बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी भविष्य में नौकरियों पर खतरे की तलवार लटक रही है। वहीं सरकार इन चुनौतियों से निबटने के लिए क्या तैयारियां कर रही है, यह जानने के लिए हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री डॉक्टर महेंद्र नाथ पाण्डे से मुलाकात की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...
प्रश्नः ऑटो सेक्टर के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है। वहीं सरकार भी अभी तक इस मोर्चे पर कुछ विशेष नहीं कर पाई है। इस मुद्दे पर सरकार का क्या पक्ष है?
उत्तरः बेरोजगारी भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की समस्या बनी हुई है। इसे समझते हुए सरकार कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय है। सड़क, रेलवे, विदेश से व्यापार, नये उद्योगों को स्थापित करने जैसे अनेक क्षेत्रों में सरकार लगातार निवेश बढ़ा रही है। ब्याज दरों में छूट देकर गृह निर्माण उद्योग को तेज करने का काम हो रहा है। कृषि में भी निवेश बढ़ाया जा रहा है। ये सभी उपाय अर्थव्यवस्था को तेज गति देने का काम करेंगे। जिससे बेरोजगारी भी दूर करने में मदद मिलेगी।
प्रश्नः इलेक्ट्रिक वाहनों और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के आने से इस सेक्टर में और अधिक मंदी/बेरोजगारी आने की आशंका है। सरकार इससे कैसे निबटेगी?
उत्तरः सबसे पहले तो यह समझना चाहिए कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से नौकरियां नहीं घटेंगी। यह एक डर है और इसे दूर करने की जरूरत है। जैसे कंप्यूटर के आने से पहले लोगों को भ्रम था कि इसके कारण नौकरियां खत्म हो जाएंगी और बेरोजगारी छाएगी। लेकिन बाद में यह समझ आने लगा कि कंप्यूटर रोजगार का सबसे बड़ा साधन है। वैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने से नौकरियों की प्रकृति में बदलाव आएगा, लेकिन नौकरियां पूरी तरह ख़त्म हो जाएंगी, ऐसा नहीं है। बल्कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, जिससे अच्छे स्किल्ड लोग तैयार हों, जो देश की प्रगति में अपनी अहम योगदान दें।
प्रश्नः क्या कौशल विकास मंत्रालय इन चुनौतियों से निबटने के लिए कोई विशेष कदम उठा रहा है?
उत्तरः देखिये, कौशल विकास मंत्रालय में इस समय उपलब्ध नौकरियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उद्योग क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए इसमें उद्योगपतियों को भी जगह दी जाती है। उद्योग क्षेत्र जैसे ही इसकी जरूरत महसूस करेगा, इसे कौशल विकास में शामिल कर लिया जायेगा। वैसे भी हम युवाओं को साइबर अपराध, क्लाउड कम्प्यूटिंग और उच्च स्तर की सॉफ्टवेयर तकनीकी का प्रशिक्षण पहले से ही दे रहे हैं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर हम युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी की जानकारी भी अवश्य देंगे।
प्रश्नः खबरें आई थीं कि कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के प्रशिक्षण केन्द्रों से निकले युवाओं को भी नौकरी नहीं मिल रही है। क्या यह सही है?
उत्तरः इस बात से मैं सहमत नहीं हूं क्योंकि हमारे पास इस बात के आंकड़े हैं कि हमारे युवाओं को अच्छी नौकरियां मिल रही हैं। हमारे प्रशिक्षित युवा आज टॉप क्लास की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में मोटी तनख्वाह पर वर्षों से काम कर रहे हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। दूसरी अहम बात, प्रधानमंत्री जी का सपना युवाओं को नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं है। वे युवाओं को नौकरी करने वाले की बजाय नौकरी देने वाले उद्यमी बनाने की सोच रखते हैं। कौशल विकास केन्द्रों में भी हम इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जिससे युवा काम सीखकर अपना रोजगार स्थापित करें।
प्रश्नः क्या कौशल विकास केन्द्रों से निकले युवा विश्व प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं?
उत्तरः इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि विश्व कौशल प्रतियोगिता में 2013 में भारत 33वें स्थान पर था। 2015 में हम 29वें स्थान पर आ गये। 2017 में हम 17वें स्थान पर आ गये, जबकि इस बीच इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले देशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उम्मीद है कि 22-27 अगस्त के बीच होने वाली प्रतियोगिता में हमारे युवा बेहतर प्रदर्शन करेंगे। हम टॉप 10 में आने की कोशिश कर रहे हैं।