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Supreme Court: फ्रीबीज पर रोक की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, कहा- मामला पहले से लंबित

आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 20 Apr 2026 05:05 PM IST
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सार

Supreme Court: चुनावों में फ्रीबीज के ऐलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं दायर हैं। अब एक अन्य याचिका में मुफ्त की योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

 

Supreme Court dismisses plea seeking ban on freebies, says matter is already pending
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं यानी 'फ्रीबीज' (मुफ्त योजनाएं)  के वादों पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से ही उसके पास लंबित हैं, इसलिए वह इस नई याचिका पर अलग से सुनवाई नहीं करेगा।
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याचिका में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
यह याचिका इस आधार पर दायर की गई थी कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा सरकारी धन का इस्तेमाल कर मुफ्त सुविधाएं देने का वादा करना उचित नहीं है और इसे भ्रष्ट आचरण माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह के वादे मतदाताओं को प्रभावित करते हैं और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
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याचिका में यह भी मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले ऐसे वादों पर सख्ती से रोक लगाए। साथ ही, जो दल इन नियमों का उल्लंघन करें, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, याचिका में यह सुझाव भी दिया गया था कि राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणापत्र के साथ यह स्पष्ट करें कि वे जिन मुफ्त योजनाओं का वादा कर रहे हैं, उनके लिए पैसा कहां से आएगा।

अदालत ने याचिका पर विचार करने से किय इनकार
एक अन्य अहम मांग यह थी कि इन घोषणाओं का ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से कराया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो और वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि चूंकि इसी विषय से जुड़े मामले पहले से अदालत में लंबित हैं, इसलिए इस पर अलग से सुनवाई करना उचित नहीं होगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह साफ है कि 'फ्रीबीज' के मुद्दे पर आगे की सुनवाई पहले से लंबित याचिकाओं के आधार पर ही होगी।
 
 
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