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Kathua News: जिले में सरसों उत्पादन में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की उम्मीद
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कठुआ में लगी सरसों की फसल का निरीक्षण करते कृषि विभाग के अधिकारी।
- फोटो : kathua news
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कठुआ। जारी रबी सीजन में कठुआ जिले में सरसों के उत्पादन में इस बार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। जिला कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष सरसों की खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दो गुना बढ़ा है और फसल भी बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी जतिंदर कुमार खजूरिया ने बताया कि जिले में पहले सरसों उत्पादन का रकबा केवल 32 हेक्टेयर था, जिससे करीब 33.15 टन उत्पादन होता था लेकिन केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त बीज वितरण किया गया। इस पहल से जिले में सरसों का रकबा बढ़कर 85 हेक्टेयर हो गया है।
उन्होंने बताया कि जिले में तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने लिए बसोहली में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हर पंचायत में किसानों को आरएच-1424 और आरएच-724 किस्म के हाइब्रिड बीज वितरित किए गए। किसानों को इन किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वर्तमान में फसल में फूल आ चुके हैं और विभाग इसकी समय-समय पर निगरानी कर रहा है। कृषि विभाग का अनुमान है कि इस बार जिले में सरसों का उत्पादन ढाई गुना तक बढ़ सकता है। यह न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा बल्कि तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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मुख्य कृषि अधिकारी जतिंदर कुमार खजूरिया ने बताया कि जिले में पहले सरसों उत्पादन का रकबा केवल 32 हेक्टेयर था, जिससे करीब 33.15 टन उत्पादन होता था लेकिन केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त बीज वितरण किया गया। इस पहल से जिले में सरसों का रकबा बढ़कर 85 हेक्टेयर हो गया है।
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उन्होंने बताया कि जिले में तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने लिए बसोहली में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हर पंचायत में किसानों को आरएच-1424 और आरएच-724 किस्म के हाइब्रिड बीज वितरित किए गए। किसानों को इन किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वर्तमान में फसल में फूल आ चुके हैं और विभाग इसकी समय-समय पर निगरानी कर रहा है। कृषि विभाग का अनुमान है कि इस बार जिले में सरसों का उत्पादन ढाई गुना तक बढ़ सकता है। यह न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा बल्कि तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।