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Kathua News: पुनर्वास राशि और जमीन का मलिकाना हक न मिलने से विस्थापित नाराज
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कटुआ। पश्चिमी पाकिस्तान से विस्थापित होकर जम्मू-कश्मीर में आए परिवारों में केंद्र सरकार द्वारा घोषित पुनर्वास राशि और जमीन का मलिकाना हक न मिलने से रोष बढ़ता जा रहा है। विस्थापितों का कहना है कि जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद भी पश्चिमी पाकिस्तान से आए विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नही हो रहा है। इसके कारण उनका रोष बढ़ रहा है जो कभी भी फूट सकता है।
रविवार को वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी की अध्यक्षता में शहर के ड्रीमलैंड पार्क में होने वाली बैठक में विस्थापितों ने सरकार से उनके मसलों पर संज्ञान लिए जाने की मांग की। बैठक के दौरान कमेटी के कठुआ तहसील प्रधान देस राज ने गांधी के समक्ष विस्थापितों की समस्याओं को रखा। कहा कि करीब पांच वर्ष पूर्व केंद्र सरकार द्वारा रिफ्यूजी परिवारों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इसकी घोषणा की थी। शुरू से ही काफी सुस्त चले इस राशि के वितरण के कार्य के कारण अब तक शतप्रतिशत लाभार्थियों को इसका वितरण नही हो पाया है। मार्च महीने के बाद से पुनर्वास राशि के वितरण की यह प्रक्रिया पूरी तरह से रुकी हुई है। इसके अतिरिक्त अगस्त 2024 में रिफ्यूजी परिवारों को उनकी जमीनों पर मालिकाना हक देने की सरकार द्वारा घोषणा की गई, लेकिन आज तक किसी एक भी लाभार्थी को इसका लाभ नही मिला है। विस्थापिताें के साथ हो रही इस अनदेखी से उनका रोष बढ़ रहा है।
इस मौके पर गांधी ने कहा कि विस्थापिताें की इन्हीं समस्याओं को लेकर वह लगातार संघर्ष कर रहे हैं। गत दिवस गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के समक्ष उठाया था। तब मुख्यमंत्री ने उन्हें विधानसभा के बजट सत्र के बाद विस्थापिताें की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है। लिहाजा हमें अभी कुछ दिन अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। अगर इसके बाद भी निदान नहीं होता है तो हमारे पास धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता खुला हुआ है। इसके लिए हमें एकजुट रहना होगा। बैठक में मढ़ीन तहसील प्रधान सोहन लाल, नगरी तहसील प्रधान रूप लाल और कीड़ियां गंडयाल ब्लॉक प्रधान ओम प्रकाश ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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रविवार को वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी की अध्यक्षता में शहर के ड्रीमलैंड पार्क में होने वाली बैठक में विस्थापितों ने सरकार से उनके मसलों पर संज्ञान लिए जाने की मांग की। बैठक के दौरान कमेटी के कठुआ तहसील प्रधान देस राज ने गांधी के समक्ष विस्थापितों की समस्याओं को रखा। कहा कि करीब पांच वर्ष पूर्व केंद्र सरकार द्वारा रिफ्यूजी परिवारों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इसकी घोषणा की थी। शुरू से ही काफी सुस्त चले इस राशि के वितरण के कार्य के कारण अब तक शतप्रतिशत लाभार्थियों को इसका वितरण नही हो पाया है। मार्च महीने के बाद से पुनर्वास राशि के वितरण की यह प्रक्रिया पूरी तरह से रुकी हुई है। इसके अतिरिक्त अगस्त 2024 में रिफ्यूजी परिवारों को उनकी जमीनों पर मालिकाना हक देने की सरकार द्वारा घोषणा की गई, लेकिन आज तक किसी एक भी लाभार्थी को इसका लाभ नही मिला है। विस्थापिताें के साथ हो रही इस अनदेखी से उनका रोष बढ़ रहा है।
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इस मौके पर गांधी ने कहा कि विस्थापिताें की इन्हीं समस्याओं को लेकर वह लगातार संघर्ष कर रहे हैं। गत दिवस गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के समक्ष उठाया था। तब मुख्यमंत्री ने उन्हें विधानसभा के बजट सत्र के बाद विस्थापिताें की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है। लिहाजा हमें अभी कुछ दिन अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। अगर इसके बाद भी निदान नहीं होता है तो हमारे पास धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता खुला हुआ है। इसके लिए हमें एकजुट रहना होगा। बैठक में मढ़ीन तहसील प्रधान सोहन लाल, नगरी तहसील प्रधान रूप लाल और कीड़ियां गंडयाल ब्लॉक प्रधान ओम प्रकाश ने भी अपने विचार व्यक्त किए।