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Kathua News: जूनियर अभियंता के साथ मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दो को जमानत
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार ने जूनियर अभियंता से कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में दो आरोपियों को नियमित जमानत दी है। आदेश के अनुसार दोनों आरोपियों को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बांड पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके अलावा अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेंगे।
कोर्ट में दायर जमानत याचिका के अनुसार सुभाष सिंह और बलदेव सिंह निवासी गजरेड जंगलोट पर आरोप है कि बीते माह में दोनों ने ब्लॉक के जूनियर अभियंता को सरकारी ड्यूटी करने से रोका और उनके साथ कथित मारपीट की और धमकाया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस थाना में शिकायत दर्ज की थी। पुलिस ने मामले में जांच कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बीते 12 फरवरी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानत याचिका दायर कर दोनों आरोपियों ने जमानत की मांग की। आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने गलत सूचना के आधार पर उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपी विवाहित हैं और अपने-अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। वह कोर्ट की सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार है। लिहाजा उन्हें नियमित जमानत दी जाए। जमानत का अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया।
सरकारी वकील ने कहा कि दोनों आरोपियों पर लगे आरोप गैर-जमानती हैं और यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है तो वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। सरकारी वकील ने पुलिस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी 12 जनवरी से 9 फरवरी तक पुलिस जांच में सहयोग करते रहे हैं। संबंधित धाराओं में अधिकतम सजा पांच वर्ष तक है और मामले की प्रकृति ऐसी नहीं है कि आरोपियों की हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।
बता दें कि इससे पहले 9 फरवरी को जिला सत्र न्यायाधीश ने आरोपियों को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत सुनाई थी और दोनों आरोपियों को निर्देश दिया था कि वे नियमित जमानत के लिए सक्षम अदालत की शरण में जाएं।
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कोर्ट में दायर जमानत याचिका के अनुसार सुभाष सिंह और बलदेव सिंह निवासी गजरेड जंगलोट पर आरोप है कि बीते माह में दोनों ने ब्लॉक के जूनियर अभियंता को सरकारी ड्यूटी करने से रोका और उनके साथ कथित मारपीट की और धमकाया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस थाना में शिकायत दर्ज की थी। पुलिस ने मामले में जांच कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बीते 12 फरवरी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानत याचिका दायर कर दोनों आरोपियों ने जमानत की मांग की। आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने गलत सूचना के आधार पर उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपी विवाहित हैं और अपने-अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। वह कोर्ट की सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार है। लिहाजा उन्हें नियमित जमानत दी जाए। जमानत का अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया।
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सरकारी वकील ने कहा कि दोनों आरोपियों पर लगे आरोप गैर-जमानती हैं और यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है तो वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। सरकारी वकील ने पुलिस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी 12 जनवरी से 9 फरवरी तक पुलिस जांच में सहयोग करते रहे हैं। संबंधित धाराओं में अधिकतम सजा पांच वर्ष तक है और मामले की प्रकृति ऐसी नहीं है कि आरोपियों की हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।
बता दें कि इससे पहले 9 फरवरी को जिला सत्र न्यायाधीश ने आरोपियों को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत सुनाई थी और दोनों आरोपियों को निर्देश दिया था कि वे नियमित जमानत के लिए सक्षम अदालत की शरण में जाएं।