{"_id":"69f7afe6b47a379bcf009d52","slug":"jammu-kashmir-news-kathua-news-c-201-1-knt1006-131659-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: कठुआ में जैतून की खेती को नई उड़ान, बागवानी विभाग ने बांटे एक हजार पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: कठुआ में जैतून की खेती को नई उड़ान, बागवानी विभाग ने बांटे एक हजार पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 04 May 2026 01:58 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
– रामकोट-बिलावर में संभावना तलाशेगा बागवानी विभाग
- किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद
पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले में जैतून की खेती की संभावना तलाशने के लिए बागवानी विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने रामकोट, बग्गन और बिलावर क्षेत्र के किसानों को जैतून के एक हजार उन्नत किस्म के पौधे निशुल्क वितरित किए हैं। कठुआ की जलवायु और पहाड़ी मिट्टी जैतून के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
विभाग का लक्ष्य कम पानी में अधिक मुनाफे वाली फसल को बढ़ावा देना है। किसानों को पौधरोपण से लेकर देखभाल तक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सफल होने पर यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने और जिले को जैतून उत्पादन का हब बनाने में मददगार साबित होगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में जैतून वंश की एक किस्म कऊ पहले से पाई जाती है। इसी आधार पर विधायक बिलावर के मार्गदर्शन में ट्री बार्न ऑयल स्कीम के तहत लेच्चिनो वैरायटी के पौधे राजस्थान से मंगवाए गए।
जैतून की खेती के लिए शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु, अच्छी धूप और जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। कठुआ जैसे क्षेत्रों में यदि ठंड और जलभराव से बचाव किया जाए तो यह खेती सफल हो सकती है। विभाग के अनुसार किसानों को पौधों के संरक्षण और देखभाल की जानकारी भी दी जा रही है। यह पहल कठुआ जिले के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है। यदि प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में कठुआ भी जम्मू-कश्मीर के प्रमुख जैतून उत्पादक क्षेत्रों की सूची में शामिल हो सकता है। करीब चार साल में तैयार होने वाले इन पौधों से जैतून का तेल और अचार बनाया जा सकेगा।
मौजूदा समय में जैतून की खेती को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार पहले ही होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के तहत बड़े पैमाने पर काम कर रही है। इसके तहत बारामुला, कुपवाड़ा, गांदरबल और बडगाम में इटली और स्पेन से आयातित आर्बेक्विना, पिकुअल और लेच्चिनो किस्में उगाई जा रही हैं। अब कठुआ में यह पहल राज्य के दक्षिणी हिस्से में जैतून की खेती का नया अध्याय खोल सकती है।
कोट
जिले में पहली बार जैतून की उन्नत किस्म उपलब्ध करवाई गई है। एक वर्ष बाद इन पौधों के विकास की समीक्षा की जाएगी। यदि परिणाम बेहतर रहे तो इसे एरिया प्लांटेशन एक्सपेंशन प्रोग्राम के तहत कैपेक्स योजना में शामिल कर खेती का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- अश्विनी शर्मा, जिला बागवानी अधिकारी
Trending Videos
- किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद
पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले में जैतून की खेती की संभावना तलाशने के लिए बागवानी विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने रामकोट, बग्गन और बिलावर क्षेत्र के किसानों को जैतून के एक हजार उन्नत किस्म के पौधे निशुल्क वितरित किए हैं। कठुआ की जलवायु और पहाड़ी मिट्टी जैतून के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
विभाग का लक्ष्य कम पानी में अधिक मुनाफे वाली फसल को बढ़ावा देना है। किसानों को पौधरोपण से लेकर देखभाल तक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सफल होने पर यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने और जिले को जैतून उत्पादन का हब बनाने में मददगार साबित होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में जैतून वंश की एक किस्म कऊ पहले से पाई जाती है। इसी आधार पर विधायक बिलावर के मार्गदर्शन में ट्री बार्न ऑयल स्कीम के तहत लेच्चिनो वैरायटी के पौधे राजस्थान से मंगवाए गए।
जैतून की खेती के लिए शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु, अच्छी धूप और जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। कठुआ जैसे क्षेत्रों में यदि ठंड और जलभराव से बचाव किया जाए तो यह खेती सफल हो सकती है। विभाग के अनुसार किसानों को पौधों के संरक्षण और देखभाल की जानकारी भी दी जा रही है। यह पहल कठुआ जिले के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है। यदि प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में कठुआ भी जम्मू-कश्मीर के प्रमुख जैतून उत्पादक क्षेत्रों की सूची में शामिल हो सकता है। करीब चार साल में तैयार होने वाले इन पौधों से जैतून का तेल और अचार बनाया जा सकेगा।
मौजूदा समय में जैतून की खेती को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार पहले ही होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के तहत बड़े पैमाने पर काम कर रही है। इसके तहत बारामुला, कुपवाड़ा, गांदरबल और बडगाम में इटली और स्पेन से आयातित आर्बेक्विना, पिकुअल और लेच्चिनो किस्में उगाई जा रही हैं। अब कठुआ में यह पहल राज्य के दक्षिणी हिस्से में जैतून की खेती का नया अध्याय खोल सकती है।
कोट
जिले में पहली बार जैतून की उन्नत किस्म उपलब्ध करवाई गई है। एक वर्ष बाद इन पौधों के विकास की समीक्षा की जाएगी। यदि परिणाम बेहतर रहे तो इसे एरिया प्लांटेशन एक्सपेंशन प्रोग्राम के तहत कैपेक्स योजना में शामिल कर खेती का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- अश्विनी शर्मा, जिला बागवानी अधिकारी
