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Kathua News: जीवन में सत्य, सदाचार और संयम अपनाने का संदेश दिया
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कठुआ। आर्य समाज मंदिर कठुआ में आयोजित 28वीं अमृत कथा नौवें दिन भी जारी रही। कथावाचक गायत्री देवी जी ने अथर्ववेद, गौ माता और महर्षि दयानंद सरस्वती जी के वैदिक चिंतन पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं को जीवन में सत्य, सदाचार, संयम और लोककल्याण की दिशा अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अथर्ववेद केवल धार्मिक जानकारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह मनुष्य को श्रेष्ठ विचारों और सकारात्मक जीवन दृष्टि की ओर प्रेरित करता है। कथा में ऋषि परंपरा पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि ऋषि केवल उपदेशक नहीं थे बल्कि तप, साधना और त्याग के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करते थे। आज की पीढ़ी को उनके जीवन से सत्यनिष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी की प्रेरणा लेनी चाहिए।
गो माता के महत्व पर उन्होंने वैदिक परंपरा में गो के सामाजिक, सांस्कृतिक और उपयोगी पक्षों को रेखांकित किया तथा समाज में संरक्षण और संवेदना की भावना विकसित करने का आह्वान किया। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्य समाज का उद्देश्य वेदों के सत्य ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में शिक्षा व सुधार की भावना को मजबूत करना है। नवम दिवस की कथा का विशेष आकर्षण रहा युवाओं की जिज्ञासा और उनके प्रश्न। एक युवा ने पूछा कि “हवन और कथा का हमारे जीवन में क्या महत्व है?” इस पर पूजनीय गायत्री देवी जी ने सरल और तार्किक उत्तर देते हुए कहा कि वैदिक परंपराओं को केवल औपचारिक क्रिया न मानकर उनके पीछे छिपे अनुशासन, आत्मचिंतन और श्रेष्ठ जीवन के संदेश को समझना चाहिए। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि प्रश्न करना ज्ञान की शुरुआत है और उत्तर सत्य, अध्ययन व तर्क के आधार पर खोजे जाने चाहिएं। कथा के दौरान भावपूर्ण भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आर्य समाज कठुआ के प्रधान बिशन भारती ने कहा कि अमृत कथा के माध्यम से वेदों का ज्ञान सरल भाषा में समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुंच रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि आगामी दिनों में परिवार सहित कथा में उपस्थित हों ताकि नई पीढ़ी वैदिक संस्कारों और श्रेष्ठ आदर्शों से जुड़ सके।
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गो माता के महत्व पर उन्होंने वैदिक परंपरा में गो के सामाजिक, सांस्कृतिक और उपयोगी पक्षों को रेखांकित किया तथा समाज में संरक्षण और संवेदना की भावना विकसित करने का आह्वान किया। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्य समाज का उद्देश्य वेदों के सत्य ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में शिक्षा व सुधार की भावना को मजबूत करना है। नवम दिवस की कथा का विशेष आकर्षण रहा युवाओं की जिज्ञासा और उनके प्रश्न। एक युवा ने पूछा कि “हवन और कथा का हमारे जीवन में क्या महत्व है?” इस पर पूजनीय गायत्री देवी जी ने सरल और तार्किक उत्तर देते हुए कहा कि वैदिक परंपराओं को केवल औपचारिक क्रिया न मानकर उनके पीछे छिपे अनुशासन, आत्मचिंतन और श्रेष्ठ जीवन के संदेश को समझना चाहिए। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि प्रश्न करना ज्ञान की शुरुआत है और उत्तर सत्य, अध्ययन व तर्क के आधार पर खोजे जाने चाहिएं। कथा के दौरान भावपूर्ण भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आर्य समाज कठुआ के प्रधान बिशन भारती ने कहा कि अमृत कथा के माध्यम से वेदों का ज्ञान सरल भाषा में समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुंच रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि आगामी दिनों में परिवार सहित कथा में उपस्थित हों ताकि नई पीढ़ी वैदिक संस्कारों और श्रेष्ठ आदर्शों से जुड़ सके।
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