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Kathua News: लखनपुर के दाल-बड़ा बाजार में महंगाई का तड़का
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 29 Apr 2026 02:08 AM IST
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रसोई गैस की किल्लत से बढ़ी लागत, दुकानदारों ने 50 फीसदी बढ़ाए दाम
20 रुपये में मिलने वाली प्लेट अब 30 रुपये की, ग्राहकों की जेब पर बढ़ा बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार लखनपुर का मशहूर दाल-बड़ा बाजार इन दिनों महंगाई की मार झेल रहा है। रसोई गैस की किल्लत ने यहां के छोटे कारोबारियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। पहले 20 रुपये प्रति प्लेट बिकने वाला दाल-बड़ा अब 30 रुपये में मिल रहा है। यानी एक झटके में 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है।
बाहरी राज्यों से जम्मू-कश्मीर में आने वाले यात्री वाहनों के लिए लखनपुर महत्वपूर्ण पड़ाव है। यात्री यहां कुछ देर रुककर दाल-बड़ा के स्वाद लेने के बाद ही आगे की यात्रा शुरू करते हैं। कुछ दिनों से रसोई गैस की नियमित सप्लाई न मिलने से यहां के कारोबार की रफ्तार को प्रभावित किया है। दुकानदारों का कहना है कि कमर्शियल गैस बिल्कुल उपलब्ध नहीं है जबकि घरेलू गैस सिलिंडर दोगुने मूल्य पर मिल रहे हैं। इसके चलते प्रति प्लेट में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
दुकानदारों का कहना है कि बाहरी यात्री मूल्य वृद्धि का विरोध नहीं कर रहे मगर स्थानीय ग्राहक बढ़ी कीमतों से अचंभित हैं। दुकानदारों ने बताया कि गैस संकट के कारण दाम बढ़ाने के लिए मजबूर हैं। इससे पहले दाल-बड़ा के दामों में बढ़ोतरी साल 2008-2009 में हुई थी जब जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ भूमि विवाद चल रहा था। इससे पहले प्रति प्लेट का दाम 10 रुपये हुआ करता था। दुकानदारों के अनुसार दाल-बड़ा बनाने में लगातार गैस की खपत होती है। 24 घंटे कढ़ाई भट्ठी पर चढ़ी रहती है लेकिन सिलिंडर की कमी से अब उत्पादन लागत पहले की तुलना में काफी ऊपर चली गई है।
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तीन दशक से लखनपुर में गोविंदा चाट हाऊस चला रहा हूं। इससे पहले उत्पादन लागत कभी इस तरह से नहीं बढ़ी थी। दाल और तेल की कीमतों में कभी-कभार बढ़ोतरी होती थी। गैस सिलिंडर की बढ़ोतरी ने दुकानदार की कमर तोड़ दी है। सस्ता और आसानी से मिलने वाला सिलिंडर अब मिलना ही बंद हो गया है। इस कारण यूनियन ने दाल-बड़ा के दाम बढ़ाए हैं।
- गोविंदा, स्थानीय दुकानदार
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लंबे समय से दाल-बड़ा का काम कर रहा हूं। इतनी महंगाई पहले नहीं देखी। उत्पादन लागत सिर्फ गैस और तेल की बढ़ी कीमतों के कारण बढ़ी है। दाल-बड़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाला रिफाइन भी दोगुना हो गया है। दुकानदार लंबे समय से कीमतों को बढ़ाने की बात कर रहे थे। अचानक गैस किल्लत के कारा इसे बढ़ाना पड़ा।
- कुलदीप सिंह, दाल-बड़ा विक्रेता
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पिछले कई साल से दाल-बड़ा की कीमतें बढ़ाने पर दुकानदार विचार कर रहे थे। गैस किल्लत के कारण बढ़ी उत्पादन लागत को देखते हुए यूनियन को तुरंत फैसला लेना पड़ा। यह वृद्धि ग्राहकों और दुकानदार की स्थिति को देखते हुए बढ़ाई गई है। इससे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।
- सन्नी शर्मा, प्रधान व्यापार मंडल, लखनपुर
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कोट
वर्तमान में गैस की कोई किल्लत नहीं है। विभाग ने अब कमर्शियल गैस आपूर्ति भी शुरू कर दी है। हमारी प्राथमिकता है कि दुकानदारों को कमर्शियल गैस आपूर्ति समय पर मिले। लखनपुर में बिकने वाले दाल-बड़ा के मूल्य में वृद्धि हुई है तो इसकी समीक्षा की जाएगी।
-मोहम्मद सगीर, सहायक निदेशक
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग
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20 रुपये में मिलने वाली प्लेट अब 30 रुपये की, ग्राहकों की जेब पर बढ़ा बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार लखनपुर का मशहूर दाल-बड़ा बाजार इन दिनों महंगाई की मार झेल रहा है। रसोई गैस की किल्लत ने यहां के छोटे कारोबारियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। पहले 20 रुपये प्रति प्लेट बिकने वाला दाल-बड़ा अब 30 रुपये में मिल रहा है। यानी एक झटके में 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है।
बाहरी राज्यों से जम्मू-कश्मीर में आने वाले यात्री वाहनों के लिए लखनपुर महत्वपूर्ण पड़ाव है। यात्री यहां कुछ देर रुककर दाल-बड़ा के स्वाद लेने के बाद ही आगे की यात्रा शुरू करते हैं। कुछ दिनों से रसोई गैस की नियमित सप्लाई न मिलने से यहां के कारोबार की रफ्तार को प्रभावित किया है। दुकानदारों का कहना है कि कमर्शियल गैस बिल्कुल उपलब्ध नहीं है जबकि घरेलू गैस सिलिंडर दोगुने मूल्य पर मिल रहे हैं। इसके चलते प्रति प्लेट में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
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दुकानदारों का कहना है कि बाहरी यात्री मूल्य वृद्धि का विरोध नहीं कर रहे मगर स्थानीय ग्राहक बढ़ी कीमतों से अचंभित हैं। दुकानदारों ने बताया कि गैस संकट के कारण दाम बढ़ाने के लिए मजबूर हैं। इससे पहले दाल-बड़ा के दामों में बढ़ोतरी साल 2008-2009 में हुई थी जब जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ भूमि विवाद चल रहा था। इससे पहले प्रति प्लेट का दाम 10 रुपये हुआ करता था। दुकानदारों के अनुसार दाल-बड़ा बनाने में लगातार गैस की खपत होती है। 24 घंटे कढ़ाई भट्ठी पर चढ़ी रहती है लेकिन सिलिंडर की कमी से अब उत्पादन लागत पहले की तुलना में काफी ऊपर चली गई है।
तीन दशक से लखनपुर में गोविंदा चाट हाऊस चला रहा हूं। इससे पहले उत्पादन लागत कभी इस तरह से नहीं बढ़ी थी। दाल और तेल की कीमतों में कभी-कभार बढ़ोतरी होती थी। गैस सिलिंडर की बढ़ोतरी ने दुकानदार की कमर तोड़ दी है। सस्ता और आसानी से मिलने वाला सिलिंडर अब मिलना ही बंद हो गया है। इस कारण यूनियन ने दाल-बड़ा के दाम बढ़ाए हैं।
- गोविंदा, स्थानीय दुकानदार
लंबे समय से दाल-बड़ा का काम कर रहा हूं। इतनी महंगाई पहले नहीं देखी। उत्पादन लागत सिर्फ गैस और तेल की बढ़ी कीमतों के कारण बढ़ी है। दाल-बड़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाला रिफाइन भी दोगुना हो गया है। दुकानदार लंबे समय से कीमतों को बढ़ाने की बात कर रहे थे। अचानक गैस किल्लत के कारा इसे बढ़ाना पड़ा।
- कुलदीप सिंह, दाल-बड़ा विक्रेता
पिछले कई साल से दाल-बड़ा की कीमतें बढ़ाने पर दुकानदार विचार कर रहे थे। गैस किल्लत के कारण बढ़ी उत्पादन लागत को देखते हुए यूनियन को तुरंत फैसला लेना पड़ा। यह वृद्धि ग्राहकों और दुकानदार की स्थिति को देखते हुए बढ़ाई गई है। इससे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।
- सन्नी शर्मा, प्रधान व्यापार मंडल, लखनपुर
कोट
वर्तमान में गैस की कोई किल्लत नहीं है। विभाग ने अब कमर्शियल गैस आपूर्ति भी शुरू कर दी है। हमारी प्राथमिकता है कि दुकानदारों को कमर्शियल गैस आपूर्ति समय पर मिले। लखनपुर में बिकने वाले दाल-बड़ा के मूल्य में वृद्धि हुई है तो इसकी समीक्षा की जाएगी।
-मोहम्मद सगीर, सहायक निदेशक
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग

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