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Kathua News: वन में लगी आग, पाया काबू
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बनी स्थित जंगल में लगी आग। संवाद
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बनी। उपमंडल बनी के तहत वन विभाग के कंपार्टमेंट-6 में लगी भीषण आग से क्षेत्र की वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। आग जंगल के बीचोंबीच चीड़ के पेड़ों और सूखी झाड़ियों में लगी। देखते ही देखते यह विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें और धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर तीन बजे के आसपास अपर सरथली में जंगल से धुआं उठता दिखाई दिया। तेज हवा और जंगल में फैली सूखी पत्तियों और चीड़ के पेड़ों के कारण आग तेजी से फैलने लगी। आग से जंगल में मौजूद पेड़ों, छोटी वनस्पतियों, घास और झाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, जंगल में रहने वाले छोटे वन्य जीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि, नुकसान का सटीक आकलन आग पूरी तरह बुझने और विभागीय सर्वेक्षण के बाद ही किया जा सकेगा।
वन विभाग ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार लापरवाही से फेंकी गई जलती बीड़ी-सिगरेट, अलाव या अन्य मानवीय गतिविधियां आग का कारण बनती हैं, जबकि कुछ मामलों में प्राकृतिक कारण भी सामने आते हैं। हालांकि, कंपार्टमेंट-6 में लगी आग के पीछे क्या वजह रही, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
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रेंज ऑफिसर बनी विनय आनंद ने बताया कि वन विभाग की टीम ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका। उन्होंने आम लोगों से जंगलों को आग से बचाने के लिए सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जंगलों के आसपास किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने लोगों से जागरुकता दिखाने और वन संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया।
वन विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल की आग से कई गंभीर नुकसान होते हैं। लाखों रुपये की वन संपदा नष्ट हो जाती है। पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक वन आवरण को नुकसान पहुंचता है। वन्य जीवों, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की उर्वरता कम होने से भविष्य में वन क्षेत्र के पुनर्जीवन पर असर पड़ता है। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का स्तर बढ़ता है। जल स्रोतों और स्थानीय पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर तीन बजे के आसपास अपर सरथली में जंगल से धुआं उठता दिखाई दिया। तेज हवा और जंगल में फैली सूखी पत्तियों और चीड़ के पेड़ों के कारण आग तेजी से फैलने लगी। आग से जंगल में मौजूद पेड़ों, छोटी वनस्पतियों, घास और झाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, जंगल में रहने वाले छोटे वन्य जीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि, नुकसान का सटीक आकलन आग पूरी तरह बुझने और विभागीय सर्वेक्षण के बाद ही किया जा सकेगा।
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वन विभाग ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार लापरवाही से फेंकी गई जलती बीड़ी-सिगरेट, अलाव या अन्य मानवीय गतिविधियां आग का कारण बनती हैं, जबकि कुछ मामलों में प्राकृतिक कारण भी सामने आते हैं। हालांकि, कंपार्टमेंट-6 में लगी आग के पीछे क्या वजह रही, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
रेंज ऑफिसर बनी विनय आनंद ने बताया कि वन विभाग की टीम ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका। उन्होंने आम लोगों से जंगलों को आग से बचाने के लिए सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जंगलों के आसपास किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने लोगों से जागरुकता दिखाने और वन संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया।
वन विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल की आग से कई गंभीर नुकसान होते हैं। लाखों रुपये की वन संपदा नष्ट हो जाती है। पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक वन आवरण को नुकसान पहुंचता है। वन्य जीवों, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की उर्वरता कम होने से भविष्य में वन क्षेत्र के पुनर्जीवन पर असर पड़ता है। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का स्तर बढ़ता है। जल स्रोतों और स्थानीय पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।