Kathua: बायोटेक पार्क से जम्मू-कश्मीर में रिसर्च और स्टार्टअप्स को मिलेगी नई उड़ान, युवाओं के लिए बढ़ेंगे अवसर
सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू और जम्मू-कश्मीर साइंस, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन परिषद के बीच औद्योगिक बायोटेक पार्क के संचालन और विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
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सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू और जम्मू कश्मीर साइंट टेक्नॉलजी और इनोवेशन परिषद ने शनिवार को औद्योगिक बायोटेक पार्क को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि जबकि विधायक जसरोटा राजीव जसरोटिया विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
बायोटेक पार्क ने एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर बायोटेक्नोलॉजी, न्यूट्रास्यूटिकल्स और बॉटनिकल एक्सट्रैक्ट्स, प्रोसेस बायोटेक्नोलॉजी को प्राथमिक वाले क्षेत्रों के रूप में चुना है। यहां माइक्रोप्रोपेगेशन, बायोफर्टिलाइजर्स, बायोपेस्टिसाइड्स, एनिमल हेल्थकेयर, ड्रग डिस्कवरी, औषधीय और सुगंधित पौधों के एक्सट्रैक्ट्स, न्यूट्रास्यूटिकल विकास, एंजाइम्स और अन्य मूल्यवर्धित बायोमोलेक्यूल्स पर शोध और उद्योग सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक बायोटेक पार्क में बिराक बायोनेस्ट इंक्यूबेटर पहले से स्थापित है, जो वर्तमान में 15 स्टार्टअप्स को सहयोग दे रहा है। साथ ही सीएसआईआर-आईआईआईएम युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी कौशल विकास कार्यक्रम चला रहा है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता, उद्यमिता कौशल और तकनीकी दक्षता बढ़ रही है।
सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने कहा कि हस्ताक्षरित एमओयू क्षेत्र में बायोटेक्नोलॉजी नवाचार और उद्यमिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बताया कि घाटी में स्थापित यह पार्क उत्तर भारत का पहला औद्योगिक बायोटेक पार्क है, जिसे सीएसआईआर-आईआईआईएम ने जेके साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग और भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से विकसित किया है। यह पार्क स्टार्टअप्स, एग्री-उद्यमियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अत्याधुनिक शोध, इनक्यूबेशन और तकनीकी विकास सुविधाएं प्रदान करेगा।
पार्क में हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट्स, फर्मेंटेशन सुविधाएं, एनालिटिकल लैब्स, डिस्टिलेशन यूनिट्स, माइक्रोप्रोपेगेशन और टिश्यू कल्चर लैब्स जैसी आधुनिक संरचनाएं मौजूद हैं। साथ ही टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन, प्रशिक्षण और कौशल विकास की भी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में आयुक्त सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, बबीला रकवाल ने बताया कि समझौते के तहत सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू पार्क की परियोजना प्रबंधन इकाई के रूप में कार्य करेगा और वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक व संचालन सहयोग प्रदान करेगा।
पार्क परिसर में एक बायो फार्म भी स्थापित किया जा रहा है, जो औषधीय, सुगंधित और पुष्पीय पौधों का प्रदर्शन केंद्र होगा। बताया गया कि यह साझेदारी जम्मू-कश्मीर में बायोटेक्नोलॉजी आधारित वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी। इससे तकनीक हस्तांतरण, स्टार्टअप्स की वृद्धि और नवाचार-आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर बनेगा बायोटेक्नोलॉजी और नवाचार का केंद्र : डॉ. जितेंद्र सिंह
कठुआ के घाटी औद्योगिक बायोटेक पार्क से जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत में बायोटेक्नोलॉजी आधारित नवाचार, स्टार्टअप्स, शोध और उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी। यह बात केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कठुआ में आयोजित एमओयू समारोह के दौरान कहीं।
शुक्रवार को सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू और जम्मू कश्मीर साइंट टेक्नॉलजी और इनोवेशन के बीच एक एमओयू हस्ताक्षर किया गया। समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस एमओयू के तहत जम्मू कश्मीर साइंट टेक्नॉलजी और इनोवेशन और इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी पार्क्स सोसाइटी तीन वर्षों में 15 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे। सीएसआईआर-आईआईआईएम परियोजना प्रबंधन इकाई के रूप में संचालन और वैज्ञानिक सहयोग देगा। इससे इस बायोटेक पार्क को पूरी तरह से संचालन संभव होगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पार्क केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, किसानों, उद्योगों और युवाओं के लिए अवसरों का साझा मंच है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में स्टार्टअप क्रांति आई है। 2014 में कुछ सौ स्टार्टअप्स से बढ़कर आज यह संख्या दो लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य जॉब सीकर्स नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर्स तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जैव विविधता, औषधीय और सुगंधित पौधों, कृषि, बागवानी और फ्लोरीकल्चर की अपार संभावनाएं हैं।
वैज्ञानिक शोध और नवाचार के माध्यम से इन संसाधनों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदला जा सकता है, जिससे सतत आजीविका और बायो-इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। डॉ. सिंह ने अरोमा मिशन और बैंगनी क्रांति की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि लैवेंडर खेती ने किसानों की जिंदगी बदल दी है। इसी तरह औषधीय पौधों, सुगंधित फसलों और फ्लोरीकल्चर में भी अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम में उपायुक्त कठुआ राजेश शर्मा, प्राचार्य जीएमसी कठुआ डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री सहित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।