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Kathua News: खजूर सिंह जाएंगे दिल्ली, परेड में लेंगे हिस्सा, मिला न्योता
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कठुआ। कठुआ जिले के प्रख्यात साहित्यकार ठाकुर खजूर सिंह को राष्ट्रपति भवन से स्वतंत्रता दिवस परेड और ऐट होम कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। उन्होंने इस अवसर को अपने परिवार और साहित्य प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण बताया।
खजूर सिंह ने कहा कि चार महीने पहले ही उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था और यह सम्मान डोगरी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मिला है। उन्होंने इसे अपनी मातृभाषा का आशीर्वाद और सभी साहित्य प्रेमियों का सम्मान बताया। ज्ञात रहे कि इस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में डोगरी भाषा के लिए कठुआ के साहित्यकार ठाकुर खजूर सिंह को उनकी चर्चित कृति ठाकुर सत्सयाले के लिए सम्मानित किया गया है। यह कृति उनके दोहों पर आधारित है।
बसोहली के नगरोट प्रेहता पलासी गांव में जन्मे खजूर सिंह बचपन से ही गीत-संगीत, बांसुरी और लोक परंपराओं से जुड़े रहे। परिवार की सांस्कृतिक विरासत और माता-पिता व चाची के गीतों ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया। उनकी रचनाओं में लोकधुनों और मातृभाषा के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत गौरव नहीं, बल्कि पूरे समाज और डोगरी भाषा का सम्मान है। खजूर सिंह ने संकल्प व्यक्त किया कि वे आगे भी डोगरी भाषा और संस्कृति को गीतों और लेखन के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करते रहेंगे। संवाद
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खजूर सिंह ने कहा कि चार महीने पहले ही उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था और यह सम्मान डोगरी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मिला है। उन्होंने इसे अपनी मातृभाषा का आशीर्वाद और सभी साहित्य प्रेमियों का सम्मान बताया। ज्ञात रहे कि इस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में डोगरी भाषा के लिए कठुआ के साहित्यकार ठाकुर खजूर सिंह को उनकी चर्चित कृति ठाकुर सत्सयाले के लिए सम्मानित किया गया है। यह कृति उनके दोहों पर आधारित है।
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बसोहली के नगरोट प्रेहता पलासी गांव में जन्मे खजूर सिंह बचपन से ही गीत-संगीत, बांसुरी और लोक परंपराओं से जुड़े रहे। परिवार की सांस्कृतिक विरासत और माता-पिता व चाची के गीतों ने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया। उनकी रचनाओं में लोकधुनों और मातृभाषा के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत गौरव नहीं, बल्कि पूरे समाज और डोगरी भाषा का सम्मान है। खजूर सिंह ने संकल्प व्यक्त किया कि वे आगे भी डोगरी भाषा और संस्कृति को गीतों और लेखन के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करते रहेंगे। संवाद
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