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Kathua News: जेएंडके बैंक में 1.54 लाख खाते बिना पैन के
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आयकर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि जेएंडके बैंक में वर्ष 2021 से 2024 के बीच 1.54 लाख खाते ऐसे खोले गए, जिनसे पैन (स्थायी खाता संख्या) जुड़ा नहीं था। जांच में इन खातों के जरिए एक वित्तीय वर्ष में 15 लाख रुपये या उससे अधिक के लेनदेन को मिलाकर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट सामने आया। आयकर विभाग ने अपनी रिपोर्ट में इसे बैंक की व्यवस्था में गंभीर कमी बताते हुए कहा है कि ऐसे खातों का इस्तेमाल टैक्स चोरी के लिए किया जा सकता है।
जांच में सामने आया कि बिना पैन वाले इन खातों में ज्यादातर बचत खाते थे, जो फॉर्म-60 के आधार पर खोले गए थे। इनमें सरकारी योजनाओं से जुड़े खाते, स्वयं सहायता समूहों के खाते, निजी व्यक्तियों और कुछ कारोबारी संस्थाओं के खाते भी शामिल हैं। आयकर विभाग ने कुछ मामलों में बैंक खातों में हुए लेनदेन और आयकर रिटर्न में घोषित आय के बीच बड़ा अंतर भी पाया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में बड़े लेनदेन होने के बावजूद उनकी जानकारी आयकर विभाग तक नहीं पहुंची। विभाग ने सुझाव दिया है कि बिना पैन वाले खातों में तय सीमा से अधिक रकम जमा होने पर संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट (एसटीआर) आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ साझा की जाए। इससे टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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हालांकि, जेएंडके बैंक ने कहा है कि जांच के बाद पैन, केवाईसी और धन शोधन रोधी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। बैंक के अनुसार, अब कई श्रेणियों के खातों में पैन अनिवार्य कर दिया गया है, बड़े लेनदेन की निगरानी स्वचालित प्रणाली से की जा रही है और इस संबंध में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट आरबीआई को सौंप दी गई है। बैंक का कहना है कि जिन खातों में पैन अनिवार्य है, वहां ग्राहकों को पहले पैन जमा करने का अवसर दिया जाता है। तय समय तक पैन नहीं देने पर ही खाते से निकासी पर रोक लगाई जाती है।
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जम्मू। आयकर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि जेएंडके बैंक में वर्ष 2021 से 2024 के बीच 1.54 लाख खाते ऐसे खोले गए, जिनसे पैन (स्थायी खाता संख्या) जुड़ा नहीं था। जांच में इन खातों के जरिए एक वित्तीय वर्ष में 15 लाख रुपये या उससे अधिक के लेनदेन को मिलाकर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट सामने आया। आयकर विभाग ने अपनी रिपोर्ट में इसे बैंक की व्यवस्था में गंभीर कमी बताते हुए कहा है कि ऐसे खातों का इस्तेमाल टैक्स चोरी के लिए किया जा सकता है।
जांच में सामने आया कि बिना पैन वाले इन खातों में ज्यादातर बचत खाते थे, जो फॉर्म-60 के आधार पर खोले गए थे। इनमें सरकारी योजनाओं से जुड़े खाते, स्वयं सहायता समूहों के खाते, निजी व्यक्तियों और कुछ कारोबारी संस्थाओं के खाते भी शामिल हैं। आयकर विभाग ने कुछ मामलों में बैंक खातों में हुए लेनदेन और आयकर रिटर्न में घोषित आय के बीच बड़ा अंतर भी पाया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में बड़े लेनदेन होने के बावजूद उनकी जानकारी आयकर विभाग तक नहीं पहुंची। विभाग ने सुझाव दिया है कि बिना पैन वाले खातों में तय सीमा से अधिक रकम जमा होने पर संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट (एसटीआर) आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ साझा की जाए। इससे टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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हालांकि, जेएंडके बैंक ने कहा है कि जांच के बाद पैन, केवाईसी और धन शोधन रोधी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। बैंक के अनुसार, अब कई श्रेणियों के खातों में पैन अनिवार्य कर दिया गया है, बड़े लेनदेन की निगरानी स्वचालित प्रणाली से की जा रही है और इस संबंध में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट आरबीआई को सौंप दी गई है। बैंक का कहना है कि जिन खातों में पैन अनिवार्य है, वहां ग्राहकों को पहले पैन जमा करने का अवसर दिया जाता है। तय समय तक पैन नहीं देने पर ही खाते से निकासी पर रोक लगाई जाती है।