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पाकिस्तान को लगेगा एक और बड़ा झटका!: उज्ज दरिया का संशोधित सर्वे पूरा, अब होगी हदबंदी; भारत का ये है प्लान
Sun, 02 Aug 2026 11:46 AM IST
Sharukh Khan
साहिल खजूरिया, अमर उजाला, कठुआ
साहिल खजूरिया, अमर उजाला, कठुआ
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:46 AM IST
सार
पाकिस्तान को भारत एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में है। उज्ज दरिया का संशोधित सर्वे पूरा हो गया है। अब हदबंदी शुरू करने की तैयारी है। केंद्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों से होकर तलहटी में पाकिस्तान की ओर बहने वाले दरिया के पानी का पूरी तरह से इस्तेमाल करने की योजना है।
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ujh river kathua
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कठुआ जिले की बहुप्रतीक्षित उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना का सर्वे पूरा कर लिया गया है। जल्द इसकी हदबंदी होगी और काम शुरू करने की तैयारी है। अगस्त के पहले सप्ताहांत तक जल्द केंद्रीय जलशक्ति विभाग के उच्च अधिकारी कठुआ पहुंचेंगे। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने पहले ही इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी के साथ ही यह परियोजना रफ्तार पकड़ लेगी। परियोजना से पाकिस्तान को व्यर्थ बहने वाले उज्ज दरिया के पानी को पंजाब और अन्य राज्यों की ओर डायवर्ट कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार का यह फैसला पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देने जा रहा है।
भारी-भरकम 11,907 करोड़ रुपये के बजट के बीच अपनी उपयोगिता को परियोजना ने सुरक्षा के लिहाज से भी केंद्र सरकार के सामने सिद्ध कर दिया है। लागत-लाभ अनुपात को ध्यान में रखते हुए तकनीकी सलाकार समिति ने हाल ही में इसे मंजूरी दी है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी के साथ ही यह परियोजना रफ्तार पकड़ लेगी। परियोजना से पाकिस्तान को व्यर्थ बहने वाले उज्ज दरिया के पानी को पंजाब और अन्य राज्यों की ओर डायवर्ट कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार का यह फैसला पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देने जा रहा है।
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भारी-भरकम 11,907 करोड़ रुपये के बजट के बीच अपनी उपयोगिता को परियोजना ने सुरक्षा के लिहाज से भी केंद्र सरकार के सामने सिद्ध कर दिया है। लागत-लाभ अनुपात को ध्यान में रखते हुए तकनीकी सलाकार समिति ने हाल ही में इसे मंजूरी दी है।
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यह निर्णय भारत सरकार द्वारा सिंधु जलसंधि समझौते को स्थगित रखने के बाद लिया गया है ताकि देश के भीतर ही नदी जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार इसके माध्यम से पंजाब से होते हुए अब हरियाणा व राजस्थान तक नहरों से पानी पहुंचाने की संभावना तलाश रही है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब में उज्ज दरिया से पानी की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए इसमें रंजीत सागर बांध तक सीधा एक नहर बनाने की भी योजना है। परियोजना की क्षमता 900 मिलियन क्यूबिक मीटर जल को संचित करने की होगी। लगभग 500 मिलियन क्यूबिक मीटर जम्मू-कश्मीर की आवश्यकता के लिए होगा, जबकि शेष 400 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पंजाब को दिया जाएगा।
पाकिस्तान की तरफ बहने वाले पानी का भारत में ही होगा पूरा उपयोग
केंद्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों से होकर तलहटी में पाकिस्तान की ओर बहने वाले दरिया के पानी का पूरी तरह से इस्तेमाल करने की योजना है। इससे रावी के बाद उज्ज दूसरा ऐसा दरिया होगा, जिसका पानी पाकिस्तान जाने से काफी हद तक रोका जाएगा।
केंद्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों से होकर तलहटी में पाकिस्तान की ओर बहने वाले दरिया के पानी का पूरी तरह से इस्तेमाल करने की योजना है। इससे रावी के बाद उज्ज दूसरा ऐसा दरिया होगा, जिसका पानी पाकिस्तान जाने से काफी हद तक रोका जाएगा।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर की पहली बहुउद्देशीय एवं राष्ट्रीय महत्व की इस मल्टीपर्पज परियोजना के डिजाइन में वर्ष 2022 में बड़ा बदलाव किया गया था। उज्ज दरिया का पानी पाकिस्तान जाने से 95 फीसदी तक रोकने के लिए इसकी लागत में भी ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है।
पहले बिजली उत्पादन पर केंद्रित परियोजना को अब पानी के अत्यधिक प्रबंधन पर फोकस किया गया है। उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की पहली डीपीआर में 9167 करोड़ की लागत थी। इस डीपीआर के तहत 196 मेगावाट बिजली बनाई जानी थी। फिर इसे बिजली के बजाय पानी प्रबंधन पर केंद्रित किया जा रहा है।
ऐसे में लागत को बढ़ाकर 11907 करोड़ रुपये (2740 करोड़ की वृद्धि) कर दिया गया है। यह अनुमान वर्ष 2019 की योजना पर आधारित है। सात साल और बीतने के बाद लागत में और बढ़ोतरी भी तय है। पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए 196 मेगावाट की जगह अब महज 90 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रस्तावित की गई है। इसे 2008 में केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जा चुका है।
भद्रवाह से शुरू होकर पाकिस्तान में मिलता है दरिया
उज्ज दरिया का उद्गम भद्रवाह के कैलाश पर्वत पर है। यहां से दरिया जम्मू संभाग में 100 किमी दूरी तय करने के बाद पाकिस्तान के नैनकोट जाता है। पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद परियोजना के पूर्व के स्वरूप को बदलते हुए 95 प्रतिशत पानी के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। उज्ज परियोजना को लेकर पहली बार जांच अमेरिकी इंजीनियरों की ओर से वर्ष 1927 में की गई थी।
उज्ज दरिया का उद्गम भद्रवाह के कैलाश पर्वत पर है। यहां से दरिया जम्मू संभाग में 100 किमी दूरी तय करने के बाद पाकिस्तान के नैनकोट जाता है। पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद परियोजना के पूर्व के स्वरूप को बदलते हुए 95 प्रतिशत पानी के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। उज्ज परियोजना को लेकर पहली बार जांच अमेरिकी इंजीनियरों की ओर से वर्ष 1927 में की गई थी।
वर्ष 1960 में इस परियोजना की विस्तृत जांच शुरू की गई। जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्रीय जल आयोग के साथ इस परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1966 में तैयार की। यह बहुउद्देशीय परियोजना का बांध स्थल बरबरी गांव में प्रस्तावित है, जो पंजतीर्थी से लगभग 1.6 किलोमीटर नीचे है।
वहीं पावरहाउस का स्थल देओली गांव के पास बांध स्थल से 9.5 किलोमीटर नीचे प्रस्तावित है।
इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। सौ साल पहले जम्मू कश्मीर के महाराजा इसकी कल्पना कर चुके थे। अब यह परियोजना रिवाइव हो चुकी है। वैपकॉस ने सर्वे कर लिया। प्रशासन के साथ बैठकें चल रही हैं। आठ या सात अगस्त को जलशक्ति विभाग के केंद्रीय अधिकारी पहुंच रहे हैं। हदबंदी कर इसका काम शुरू किया जाएगा।-डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री