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Kathua News: ओबीसी समाज ने पंचायत आरक्षण से पहले जनगणना की उठाई मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को सरकार से आरक्षण और आय सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान करने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार ये मुद्दे उठाए जा चुके हैं।
सभा में उपस्थित कुम्हार बिरादरी के बिशन दास, तरखान बिरादरी के जगदीश राज, नाईं बिरादरी से बनारसी दास और रमेश मेहरा ने मांग की पंचायतों में आरक्षण लागू करने से पहले ओबीसी वर्ग की वास्तविक आबादी का सही आकलन करने के लिए व्यापक जनगणना कराई जाए। उनका कहना था कि पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाकर ही पात्र वर्ग को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित साढ़े आठ लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 12 लाख से अधिक करने की भी मांग की।
वक्ताओं का कहना है कि महंगाई, शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण 8 लाख आय वाले परिवार भी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं, जिससे उनके बच्चों को आरक्षण और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहरी क्षेत्रों की चार ओबीसी जातियां कुम्हार, नाईं, तेली और धोबी को आज भी आरक्षण के अपेक्षित लाभ से वंचित हैं।
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कठुआ। ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को सरकार से आरक्षण और आय सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान करने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार ये मुद्दे उठाए जा चुके हैं।
सभा में उपस्थित कुम्हार बिरादरी के बिशन दास, तरखान बिरादरी के जगदीश राज, नाईं बिरादरी से बनारसी दास और रमेश मेहरा ने मांग की पंचायतों में आरक्षण लागू करने से पहले ओबीसी वर्ग की वास्तविक आबादी का सही आकलन करने के लिए व्यापक जनगणना कराई जाए। उनका कहना था कि पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाकर ही पात्र वर्ग को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित साढ़े आठ लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 12 लाख से अधिक करने की भी मांग की।
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वक्ताओं का कहना है कि महंगाई, शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण 8 लाख आय वाले परिवार भी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं, जिससे उनके बच्चों को आरक्षण और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहरी क्षेत्रों की चार ओबीसी जातियां कुम्हार, नाईं, तेली और धोबी को आज भी आरक्षण के अपेक्षित लाभ से वंचित हैं।
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