{"_id":"6a28761110b6119a9901d970","slug":"jammu-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-agr1010-933817-2026-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: बकाया भुगतान नहीं मिला तो एक जुलाई से आयुष्मान योजना से हटेंगे निजी अस्पताल व डायलिसिस सेंटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: बकाया भुगतान नहीं मिला तो एक जुलाई से आयुष्मान योजना से हटेंगे निजी अस्पताल व डायलिसिस सेंटर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन (जेकेपीएचडीए) ने आयुष्मान भारत-सेहत स्कीम के तहत भुगतान में लगातार देरी पर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन ने कहा कि अगर बकाया दावों का तुरंत निपटारा नहीं हुआ तो 1 जुलाई 2026 से सभी प्राइवेट अस्पताल और डायलिसिस सेंटर स्कीम से अलग हो जाएंगे।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि महीनों से पैसा रुका हुआ है। इससे डायलिसिस, आईसीयू, सर्जरी, इमरजेंसी, कैंसर, हार्ट और ट्रॉमा जैसी जरूरी सेवाएं देना मुश्किल हो रहा है। दवा, कंज्यूमेबल्स, स्टाफ और उपकरणों के लिए लगातार पैसे चाहिए लेकिन भुगतान न मिलने से अस्पतालों की कमर टूट रही है।
एसोसिएशन ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से कैंसर की दवाओं जैसे सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत और सप्लाई पर असर पड़ा है। पेमेंट रुका होने से मेडिकल ऑन्कोलॉजी वाले अस्पताल जरूरी दवाओं का स्टॉक नहीं रख पा रहे। कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक में स्टेंट और इम्प्लांट खरीदने के लिए भारी वर्किंग कैपिटल चाहिए जो अब नहीं बची। इससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।
विज्ञापन
एसोसिएशन ने दावा किया कि एक तरफ 180 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान फंड सरकारी अस्पतालों के पास बिना इस्तेमाल के पड़ा है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों को मंजूर दावों का भुगतान नहीं मिल रहा। सरकारी अस्पतालों को पैसा देना एक जेब से दूसरी जेब में डालने जैसा है। जेकेपीएचडीए ने सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के पेमेंट सिस्टम को अलग और पारदर्शी बनाने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि गॉल ब्लैडर सर्जरी और हैमरॉइडेक्टमी जैसे प्रोसीजर अब ज्यादातर सरकारी अस्पतालों तक सीमित हो गए हैं, जहां वेटिंग 10 महीने से ज्यादा पहुंच गई है। इससे स्कीम पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि क्लेम सेटलमेंट में देरी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की गाइडलाइन और एपओयू के खिलाफ है। एमओयू की धारा-6 के मुताबिक देरी पर 1 प्रतिशत प्रति सप्ताह ब्याज मिलना चाहिए लेकिन वह भी नहीं दिया जा रहा। एसोसिएशन की 6 बड़ी मांगें जिनमें सभी पेंडिंग क्लेम का ब्याज समेत तुरंत भुगतान हो, रिजेक्ट या कटे हुए क्लेम के लिए समयबद्ध और निष्पक्ष मैकेनिज्म बने, क्लेम प्रोसेसिंग, पेमेंट टाइमलाइन और एम्पैनलमेंट में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की गाइडलाइन का सख्ती से पालन हो, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के पेमेंट प्रोसीजर अलग और सुव्यवस्थित किए जाएं, स्कीम के तहत मरीज को समय पर इलाज चुनने का अधिकार बहाल हो, सेवाओं में रुकावट रोकने के लिए प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधियों से तुरंत बात की जाए।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत–सेहत के उद्देश्यों के साथ हैं लेकिन बिना समय पर भुगतान के क्वालिटी हेल्थ सर्विस जारी रखना मुमकिन नहीं। कई अस्पतालों की वित्तीय हालत खराब हो चुकी है और हजारों मरीजों की देखभाल खतरे में है। एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन, स्टेट हेल्थ एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से तुरंत दखल देकर बकाया चुकाने, एनएचए नियमों का पालन करने और जनहित में मामला सुलझाने की अपील की है ताकि स्कीम के तहत स्वास्थ्य सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि महीनों से पैसा रुका हुआ है। इससे डायलिसिस, आईसीयू, सर्जरी, इमरजेंसी, कैंसर, हार्ट और ट्रॉमा जैसी जरूरी सेवाएं देना मुश्किल हो रहा है। दवा, कंज्यूमेबल्स, स्टाफ और उपकरणों के लिए लगातार पैसे चाहिए लेकिन भुगतान न मिलने से अस्पतालों की कमर टूट रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एसोसिएशन ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से कैंसर की दवाओं जैसे सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत और सप्लाई पर असर पड़ा है। पेमेंट रुका होने से मेडिकल ऑन्कोलॉजी वाले अस्पताल जरूरी दवाओं का स्टॉक नहीं रख पा रहे। कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक में स्टेंट और इम्प्लांट खरीदने के लिए भारी वर्किंग कैपिटल चाहिए जो अब नहीं बची। इससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।
Trending Videos
एसोसिएशन ने दावा किया कि एक तरफ 180 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान फंड सरकारी अस्पतालों के पास बिना इस्तेमाल के पड़ा है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों को मंजूर दावों का भुगतान नहीं मिल रहा। सरकारी अस्पतालों को पैसा देना एक जेब से दूसरी जेब में डालने जैसा है। जेकेपीएचडीए ने सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के पेमेंट सिस्टम को अलग और पारदर्शी बनाने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि गॉल ब्लैडर सर्जरी और हैमरॉइडेक्टमी जैसे प्रोसीजर अब ज्यादातर सरकारी अस्पतालों तक सीमित हो गए हैं, जहां वेटिंग 10 महीने से ज्यादा पहुंच गई है। इससे स्कीम पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि क्लेम सेटलमेंट में देरी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की गाइडलाइन और एपओयू के खिलाफ है। एमओयू की धारा-6 के मुताबिक देरी पर 1 प्रतिशत प्रति सप्ताह ब्याज मिलना चाहिए लेकिन वह भी नहीं दिया जा रहा। एसोसिएशन की 6 बड़ी मांगें जिनमें सभी पेंडिंग क्लेम का ब्याज समेत तुरंत भुगतान हो, रिजेक्ट या कटे हुए क्लेम के लिए समयबद्ध और निष्पक्ष मैकेनिज्म बने, क्लेम प्रोसेसिंग, पेमेंट टाइमलाइन और एम्पैनलमेंट में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की गाइडलाइन का सख्ती से पालन हो, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के पेमेंट प्रोसीजर अलग और सुव्यवस्थित किए जाएं, स्कीम के तहत मरीज को समय पर इलाज चुनने का अधिकार बहाल हो, सेवाओं में रुकावट रोकने के लिए प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधियों से तुरंत बात की जाए।
जेकेपीएचडीए ने कहा कि प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत–सेहत के उद्देश्यों के साथ हैं लेकिन बिना समय पर भुगतान के क्वालिटी हेल्थ सर्विस जारी रखना मुमकिन नहीं। कई अस्पतालों की वित्तीय हालत खराब हो चुकी है और हजारों मरीजों की देखभाल खतरे में है। एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन, स्टेट हेल्थ एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से तुरंत दखल देकर बकाया चुकाने, एनएचए नियमों का पालन करने और जनहित में मामला सुलझाने की अपील की है ताकि स्कीम के तहत स्वास्थ्य सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें।