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ज्ञान और बौद्धिक चेतना का जीवंत उत्सव बना चिनार पुस्तक मेला : उपराज्यपाल
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श्रीनगर एसकेआईसीसी में चिनार बुक फेस्टिवल के दौरान उपराज्यपाल। संवाद
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उपराज्यपाल ने किया नौ दिवसीय पुस्तक मेले का उद्घाटन, बोले- बिक्री के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जागृत मन से मापी जानी चाहिए सफलता
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर में चिनार पुस्तक मेले के तीसरे संस्करण का भव्य उद्घाटन किया। डल झील के किनारे आयोजित समारोह में उपराज्यपाल ने कहा कि बेहद कम समय में यह पुस्तक मेला जम्मू-कश्मीर में साहित्य, ज्ञान और बौद्धिक चेतना का एक विशिष्ट उत्सव बनकर उभरा है। उन्होंने इसे महज किताबों की एक प्रदर्शनी न मानकर, विचारों, विमर्शों और ज्ञान संवाद का एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बताया।
मशहूर शायर बशीर बद्र के शेर वह गुलाब बनके खिलेगा क्या, जो चिराग बनके जला न हो... से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि एक लेखक और विचारक वास्तव में चिराग की तरह जलता है और गुलाब की तरह खिलता है। उन्होंने चिनार के पेड़ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कश्मीर घाटी के लिए चिनार सिर्फ एक पेड़ नहीं है, बल्कि यहां के लोग इसे धैर्य, सौंदर्य और निरंतरता के जीवंत प्रतीक के रूप में देखते हैं। यही निरंतरता हमारे लेखकों की लेखनी में भी दिखाई देती है।
मनोज सिन्हा ने एनबीटी को बधाई देते हुए कहा कि इस फेस्टिवल ने जम्मू-कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा दी है। इस बार मेले में कश्मीर की प्राचीन और अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर शारदा लिपि के पुनर्जीवन का प्रेरक प्रयास भी देखा गया है। इसके अलावा, ''''एक भारत श्रेष्ठ भारत'''' की भावना को तमिल-कश्मीरी संवाद जैसी पहलों के माध्यम से साकार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और पीढ़ियों को जोड़ने का काम कर रही है।
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उपराज्यपाल ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि चिनार बुक फेस्टिवल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों से जोड़ा गया है, जो रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समावेशी शिक्षा पर बल देती है। मेले में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, डोगरी, कश्मीरी और गोजरी सहित अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में बाल साहित्य को प्रोत्साहित किया गया है। मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, भाषा एक सेब की तरह होती है। जब कोई बच्चा अपनी मातृभाषा में पढ़ता है, तो वह वास्तव में अपनी जड़ों से जुड़ता है। और जब वही बच्चा दूसरी भाषा सीखता है, तब उसके सामने दुनिया के दरवाजे खुलते हैं। चिनार बुक फेस्टिवल बच्चों को अपनी पहचान की जड़ें भी दे रहा है और भविष्य की उड़ान के लिए पंख भी। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों द्वारा शुरू की गई डिजाइन योर डिग्री जैसी पहलों की भी सराहना की, जिसने युवाओं को किताबों को बोझ न मानकर अपना साथी बनाने के लिए प्रेरित किया है।
हर महीने पाठ्यक्रम से बाहर एक किताब पढ़ने की अपील
उपराज्यपाल ने वहां मौजूद प्रत्येक विद्यार्थी, युवा और पाठक से एक विशेष आग्रह किया। कहा कि सभी लोग अपनी पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर हर महीने कम से कम एक अच्छी किताब जरूर पढ़ें। इसके साथ ही उन्होंने युवा लेखकों को संकल्प दिलाया कि वे प्रतिदिन नहीं तो कम से कम सप्ताह में दो पृष्ठ लिखने की आदत डालें, तभी हमारी उपस्थिति सार्थक मानी जाएगी। आज के दौर में पुस्तक मेलों की सफलता को केवल किताबों की बिक्री के आंकड़ों से मापने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उपराज्यपाल ने कहा, किसी बुक फेस्टिवल की वास्तविक सफलता बिक्री में नहीं, बल्कि उन विचारों और संवादों में निहित होती है, जिन्हें वह जन्म देता है। डल झील के किनारे शुरू हुई यह चर्चा यदि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचती है, तो यह फेस्टिवल सफल है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चिनार बुक फेस्टिवल की सफलता का आंकड़ा व्यापार नहीं, बल्कि जागृत मन होना चाहिए।
वंदे मातरम में तीन चरणों में पूरे देश में अव्वल रहा प्रदेश, चौथे में भी अव्वल रहने की अपील
उपराज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में ऐसे अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं, जो पहले अकल्पनीय लगते थे। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के तीन चरणों में जम्मू-कश्मीर पूरे देश में शीर्ष स्थान पर रहा है। पहले चरण में देश के शीर्ष 10 जिलों में से 7 जिले जम्मू-कश्मीर के थे, किश्तवाड़ देश का नंबर-1 जिला बना। दूसरे और तीसरे चरण में भी जम्मू-कश्मीर ने अपना पहला स्थान सुरक्षित रखा, जहां पुंछ जिला पूरे देश में शीर्ष पर रहा। उन्होंने उपस्थित जनता से अपील की कि 9 से 15 अगस्त तक चलने वाले चौथे और अंतिम चरण में भी जम्मू-कश्मीर को नंबर-1 बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव उस धरती पर शांति, सृजनशीलता और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जिसने अतीत में कई कठिन चुनौतियों का सामना किया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर में चिनार पुस्तक मेले के तीसरे संस्करण का भव्य उद्घाटन किया। डल झील के किनारे आयोजित समारोह में उपराज्यपाल ने कहा कि बेहद कम समय में यह पुस्तक मेला जम्मू-कश्मीर में साहित्य, ज्ञान और बौद्धिक चेतना का एक विशिष्ट उत्सव बनकर उभरा है। उन्होंने इसे महज किताबों की एक प्रदर्शनी न मानकर, विचारों, विमर्शों और ज्ञान संवाद का एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बताया।
मशहूर शायर बशीर बद्र के शेर वह गुलाब बनके खिलेगा क्या, जो चिराग बनके जला न हो... से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि एक लेखक और विचारक वास्तव में चिराग की तरह जलता है और गुलाब की तरह खिलता है। उन्होंने चिनार के पेड़ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कश्मीर घाटी के लिए चिनार सिर्फ एक पेड़ नहीं है, बल्कि यहां के लोग इसे धैर्य, सौंदर्य और निरंतरता के जीवंत प्रतीक के रूप में देखते हैं। यही निरंतरता हमारे लेखकों की लेखनी में भी दिखाई देती है।
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मनोज सिन्हा ने एनबीटी को बधाई देते हुए कहा कि इस फेस्टिवल ने जम्मू-कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा दी है। इस बार मेले में कश्मीर की प्राचीन और अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर शारदा लिपि के पुनर्जीवन का प्रेरक प्रयास भी देखा गया है। इसके अलावा, ''''एक भारत श्रेष्ठ भारत'''' की भावना को तमिल-कश्मीरी संवाद जैसी पहलों के माध्यम से साकार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और पीढ़ियों को जोड़ने का काम कर रही है।
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उपराज्यपाल ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि चिनार बुक फेस्टिवल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों से जोड़ा गया है, जो रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समावेशी शिक्षा पर बल देती है। मेले में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, डोगरी, कश्मीरी और गोजरी सहित अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में बाल साहित्य को प्रोत्साहित किया गया है। मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, भाषा एक सेब की तरह होती है। जब कोई बच्चा अपनी मातृभाषा में पढ़ता है, तो वह वास्तव में अपनी जड़ों से जुड़ता है। और जब वही बच्चा दूसरी भाषा सीखता है, तब उसके सामने दुनिया के दरवाजे खुलते हैं। चिनार बुक फेस्टिवल बच्चों को अपनी पहचान की जड़ें भी दे रहा है और भविष्य की उड़ान के लिए पंख भी। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों द्वारा शुरू की गई डिजाइन योर डिग्री जैसी पहलों की भी सराहना की, जिसने युवाओं को किताबों को बोझ न मानकर अपना साथी बनाने के लिए प्रेरित किया है।
हर महीने पाठ्यक्रम से बाहर एक किताब पढ़ने की अपील
उपराज्यपाल ने वहां मौजूद प्रत्येक विद्यार्थी, युवा और पाठक से एक विशेष आग्रह किया। कहा कि सभी लोग अपनी पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर हर महीने कम से कम एक अच्छी किताब जरूर पढ़ें। इसके साथ ही उन्होंने युवा लेखकों को संकल्प दिलाया कि वे प्रतिदिन नहीं तो कम से कम सप्ताह में दो पृष्ठ लिखने की आदत डालें, तभी हमारी उपस्थिति सार्थक मानी जाएगी। आज के दौर में पुस्तक मेलों की सफलता को केवल किताबों की बिक्री के आंकड़ों से मापने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उपराज्यपाल ने कहा, किसी बुक फेस्टिवल की वास्तविक सफलता बिक्री में नहीं, बल्कि उन विचारों और संवादों में निहित होती है, जिन्हें वह जन्म देता है। डल झील के किनारे शुरू हुई यह चर्चा यदि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचती है, तो यह फेस्टिवल सफल है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चिनार बुक फेस्टिवल की सफलता का आंकड़ा व्यापार नहीं, बल्कि जागृत मन होना चाहिए।
वंदे मातरम में तीन चरणों में पूरे देश में अव्वल रहा प्रदेश, चौथे में भी अव्वल रहने की अपील
उपराज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में ऐसे अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं, जो पहले अकल्पनीय लगते थे। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के तीन चरणों में जम्मू-कश्मीर पूरे देश में शीर्ष स्थान पर रहा है। पहले चरण में देश के शीर्ष 10 जिलों में से 7 जिले जम्मू-कश्मीर के थे, किश्तवाड़ देश का नंबर-1 जिला बना। दूसरे और तीसरे चरण में भी जम्मू-कश्मीर ने अपना पहला स्थान सुरक्षित रखा, जहां पुंछ जिला पूरे देश में शीर्ष पर रहा। उन्होंने उपस्थित जनता से अपील की कि 9 से 15 अगस्त तक चलने वाले चौथे और अंतिम चरण में भी जम्मू-कश्मीर को नंबर-1 बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव उस धरती पर शांति, सृजनशीलता और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जिसने अतीत में कई कठिन चुनौतियों का सामना किया है।