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ईजेएसी कर्मियों की आवाज है, किसी पार्टी के गुलाम नहीं : पर्रे
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श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर का मंगलवार को प्रदर्शन के लिए भड़काने वाले बयान के जवाब में बुधवार को एम्प्लॉइज जॉइंट एक्शन कमेटी (ईजेएसी) के जनरल सेक्रेटरी सज्जाद अहमद पर्रे ने कहा कि हम किसी पॉलिटिकल पार्टी के वर्कर या गुलाम नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर एम्प्लॉइज जॉइंट एक्शन कमेटी साढ़े चार लाख कर्मचारियों की प्रवक्ता और आवाज है। इसमें डेलीवेजर और पेंशनर शामिल हैं। यह एक नॉन-पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर ने डेलीवेजर्स के प्रदर्शन पर कहा था कि उन्हें धमकाने से कुछ नहीं होगा। मैं पहले ही वादा कर चुका हूं कि प्रक्रिया के तहत ही उन्हें नियमित किया जाएगा। किसी के बहकावे में आकर वह अपना ही नुकसान कर रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो सीधे मुझसे बाते करो। किसी भी काम को करने का एक तरीका और प्रक्रिया होती है। क्या हंगामा करने से काम पूरे हो जाएंगे। विरोधी हंगामा ही चाहते हैं, वह आपको बरगलाकर आपका ही नुकसान कर रहे हैं।
इसके जवाब में बुधवार को सज्जाद अहमद पर्रे ने कहा कि डेलीवेजर्स ने पहली बार प्रोटेस्ट नहीं किया है। पांचवे पे कमीशन, छठे पे कमीशन की गलतियों को ठीक करने, उम्र में दो साल की बढ़ोतरी और डेलीवेजर्स को स्थायी करने के लिए अलग-अलग सरकारों में ईजेएसी के बैनर तले प्रदर्शन, धरने और भूख हड़ताल की गई थी। हर सरकार ने इस मुद्दे से बचने के लिए बहाने बनाए।
वर्ष 2002 में मुफ्ती साहब के राज में जब मांगों को पूरा करने के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया तो नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कर्मचारियों को भड़काने का आरोप लगा। वर्ष 2009 में पीडीपी पर आरोप लगा और जब 2014 में भाजपा-पीडीपी सत्ता में आई तो दिहाड़ीदार मजदूरों ने श्रीनगर के प्रताप पार्क में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उस समय के सरकारी प्रवक्ता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पर कर्मचारियों को भड़काने का आरोप लगाया था।
गवर्नर और लेफ्टिनेंट गवर्नर के समय में जब दिहाड़ीदार मजदूरों ने स्थायी करने और मिनिमम वेज एक्ट को लागू करने के लिए विरोध रैलियां निकालीं तो सभी राजनीतिक पार्टियों पर दिहाड़ी मजदूरों को भड़काने का आरोप लगा। अब मुख्यमंत्री ने एक बार फिर प्रदर्शन कर रहे दिहाड़ी मजदूरों पर वही आरोप लगाया। हमारी मांगों को पूरा करने के बजाय हमें बदनाम करना पूरी तरह से गलत है।
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मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर ने डेलीवेजर्स के प्रदर्शन पर कहा था कि उन्हें धमकाने से कुछ नहीं होगा। मैं पहले ही वादा कर चुका हूं कि प्रक्रिया के तहत ही उन्हें नियमित किया जाएगा। किसी के बहकावे में आकर वह अपना ही नुकसान कर रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो सीधे मुझसे बाते करो। किसी भी काम को करने का एक तरीका और प्रक्रिया होती है। क्या हंगामा करने से काम पूरे हो जाएंगे। विरोधी हंगामा ही चाहते हैं, वह आपको बरगलाकर आपका ही नुकसान कर रहे हैं।
इसके जवाब में बुधवार को सज्जाद अहमद पर्रे ने कहा कि डेलीवेजर्स ने पहली बार प्रोटेस्ट नहीं किया है। पांचवे पे कमीशन, छठे पे कमीशन की गलतियों को ठीक करने, उम्र में दो साल की बढ़ोतरी और डेलीवेजर्स को स्थायी करने के लिए अलग-अलग सरकारों में ईजेएसी के बैनर तले प्रदर्शन, धरने और भूख हड़ताल की गई थी। हर सरकार ने इस मुद्दे से बचने के लिए बहाने बनाए।
वर्ष 2002 में मुफ्ती साहब के राज में जब मांगों को पूरा करने के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया तो नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कर्मचारियों को भड़काने का आरोप लगा। वर्ष 2009 में पीडीपी पर आरोप लगा और जब 2014 में भाजपा-पीडीपी सत्ता में आई तो दिहाड़ीदार मजदूरों ने श्रीनगर के प्रताप पार्क में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उस समय के सरकारी प्रवक्ता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पर कर्मचारियों को भड़काने का आरोप लगाया था।
गवर्नर और लेफ्टिनेंट गवर्नर के समय में जब दिहाड़ीदार मजदूरों ने स्थायी करने और मिनिमम वेज एक्ट को लागू करने के लिए विरोध रैलियां निकालीं तो सभी राजनीतिक पार्टियों पर दिहाड़ी मजदूरों को भड़काने का आरोप लगा। अब मुख्यमंत्री ने एक बार फिर प्रदर्शन कर रहे दिहाड़ी मजदूरों पर वही आरोप लगाया। हमारी मांगों को पूरा करने के बजाय हमें बदनाम करना पूरी तरह से गलत है।