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Srinagar News: हाईकोर्ट ने दी गुलमर्ग के होटलों की जमीन लीज याचिकाओं को वापस लेने की मंजूरी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने गुलमर्ग के हाई-प्रोफाइल होटलों की जमीन लीज से जुड़े मामलों की याचिकाओं के एक समूह को निपटा दिया है। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के साथ मिलकर कोई हल निकालने के लिए इन मामलों को वापस लेने की अनुमति मांगी थी।
चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की डिवीजन बेंच ने इस महीने की शुरुआत में याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी। बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता (ज्यादातर होटल मालिक) सरकार के पास जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं, ताकि इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाया जा सके।
यह मामला 2022 में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा जम्मू-कश्मीर भूमि अनुदान नियम लागू किए जाने से जुड़ा है। इन नियमों के आने से जमीन लीज की नीति में एक बड़ा बदलाव आया था। नए नियमों के तहत लीज की अवधि खत्म होने के बाद अब उसे अपने-आप आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बजाय ऐसी संपत्तियों की खुली बोली लगाकर नीलामी की जाएगी, ताकि भारत का कोई भी नागरिक उन्हें हासिल कर सके।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गुलमर्ग में देखने को मिला है, जहां ज्यादातर होटल लीज पर ली गई जमीन पर बने हुए हैं। इस रिजॉर्ट में मौजूद 59 होटलों में से 55 की लीज की अवधि खत्म हो चुकी है। ऐसे में इन होटलों के मालिकों पर बेदखली और सार्वजनिक नीलामी का खतरा मंडरा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले की कई बार सुनवाई की थी और याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अपनी दलीलें भी पूरी कर ली थीं।
इस मामले से जुड़ी अवमानना की कई अन्य याचिकाओं को भी यह कहते हुए निपटा दिया गया कि अब उनका कोई औचित्य नहीं रह गया है। साथ ही, वकीलों के निर्देश पर कुछ रिट याचिकाओं को भी वापस ले लिया गया। बेंच ने इस बात का भी जिक्र किया कि इस मामले में कोर्ट का काफ समय पहले ही खर्च हो चुका है।
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चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की डिवीजन बेंच ने इस महीने की शुरुआत में याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी। बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता (ज्यादातर होटल मालिक) सरकार के पास जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं, ताकि इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाया जा सके।
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यह मामला 2022 में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा जम्मू-कश्मीर भूमि अनुदान नियम लागू किए जाने से जुड़ा है। इन नियमों के आने से जमीन लीज की नीति में एक बड़ा बदलाव आया था। नए नियमों के तहत लीज की अवधि खत्म होने के बाद अब उसे अपने-आप आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बजाय ऐसी संपत्तियों की खुली बोली लगाकर नीलामी की जाएगी, ताकि भारत का कोई भी नागरिक उन्हें हासिल कर सके।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गुलमर्ग में देखने को मिला है, जहां ज्यादातर होटल लीज पर ली गई जमीन पर बने हुए हैं। इस रिजॉर्ट में मौजूद 59 होटलों में से 55 की लीज की अवधि खत्म हो चुकी है। ऐसे में इन होटलों के मालिकों पर बेदखली और सार्वजनिक नीलामी का खतरा मंडरा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले की कई बार सुनवाई की थी और याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अपनी दलीलें भी पूरी कर ली थीं।
इस मामले से जुड़ी अवमानना की कई अन्य याचिकाओं को भी यह कहते हुए निपटा दिया गया कि अब उनका कोई औचित्य नहीं रह गया है। साथ ही, वकीलों के निर्देश पर कुछ रिट याचिकाओं को भी वापस ले लिया गया। बेंच ने इस बात का भी जिक्र किया कि इस मामले में कोर्ट का काफ समय पहले ही खर्च हो चुका है।