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Srinagar News: कश्मीरी पंडित दंपति पर हमले के आरोपी पूर्व अधिकारी को जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने सेवा से बर्खास्त पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी विवेक बत्रा को एक बुजुर्ग कश्मीरी पंडित दंपति पर हमले, दुष्कर्म के प्रयास तथा आपराधिक धमकी के मामले में रविवार को अंतरिम जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फारूक अहमद भट की अदालत ने विवेक बत्रा की राजबाग थाने में दर्ज एफआईआर के संबंध में अंतरिम जमानत मंजूर की। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवेक बत्रा अन्य लोगों के साथ लोहे की रॉड और हथौड़ों से लैस होकर जबरन उनके राजबाग स्थित आवास में घुसे। परिवार के सदस्यों पर हमला किया। पत्नी के साथ छेड़छाड़ की। जान से मारने की धमकी दी और पेट्रोल छिड़ककर घर में आग लगाने की कोशिश की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बत्रा को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने अभियोजन की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपी को पहले मजिस्ट्रेट के पास जमानत के लिए जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 483 के तहत सत्र अदालत सीधे जमानत देने का अधिकार रखती है।
अदालत ने आगे कहा कि लगाए गए आरोपों को सख्त सबूतों की जरूरत है। इस स्तर पर आरोपी को निर्दोष माना जाता है जब तक दोष सिद्ध न हो जाए। अदालत ने नोट किया कि आरोपित अपराधों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा नहीं है। आरोपी समाज में गहरी जड़ें रखता है तथा भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
इसके अनुसार अदालत ने बत्रा को 7 फरवरी तक अंतरिम जमानत दी है। आरोपी को एक लाख रुपये का व्यक्तिगत बांड और इतनी ही राशि का एक जमानती पेश करना होगा। जमानत की शर्तों में जांच में सहयोग करना, प्रतिदिन जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी देना, अदालत की अनुमति के बिना जम्मू-कश्मीर छोड़कर न जाना तथा अभियोजन साक्ष्यों में हस्तक्षेप न करना शामिल है। यह मामला जनवरी 2026 में सामने आया था, जब पुलिस ने विवेक बत्रा (जो सेवा से बर्खास्त पूर्व आईआरएस अधिकारी हैं) को गिरफ्तार किया था।
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श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने सेवा से बर्खास्त पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी विवेक बत्रा को एक बुजुर्ग कश्मीरी पंडित दंपति पर हमले, दुष्कर्म के प्रयास तथा आपराधिक धमकी के मामले में रविवार को अंतरिम जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फारूक अहमद भट की अदालत ने विवेक बत्रा की राजबाग थाने में दर्ज एफआईआर के संबंध में अंतरिम जमानत मंजूर की। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवेक बत्रा अन्य लोगों के साथ लोहे की रॉड और हथौड़ों से लैस होकर जबरन उनके राजबाग स्थित आवास में घुसे। परिवार के सदस्यों पर हमला किया। पत्नी के साथ छेड़छाड़ की। जान से मारने की धमकी दी और पेट्रोल छिड़ककर घर में आग लगाने की कोशिश की।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बत्रा को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने अभियोजन की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपी को पहले मजिस्ट्रेट के पास जमानत के लिए जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 483 के तहत सत्र अदालत सीधे जमानत देने का अधिकार रखती है।
अदालत ने आगे कहा कि लगाए गए आरोपों को सख्त सबूतों की जरूरत है। इस स्तर पर आरोपी को निर्दोष माना जाता है जब तक दोष सिद्ध न हो जाए। अदालत ने नोट किया कि आरोपित अपराधों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा नहीं है। आरोपी समाज में गहरी जड़ें रखता है तथा भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
इसके अनुसार अदालत ने बत्रा को 7 फरवरी तक अंतरिम जमानत दी है। आरोपी को एक लाख रुपये का व्यक्तिगत बांड और इतनी ही राशि का एक जमानती पेश करना होगा। जमानत की शर्तों में जांच में सहयोग करना, प्रतिदिन जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी देना, अदालत की अनुमति के बिना जम्मू-कश्मीर छोड़कर न जाना तथा अभियोजन साक्ष्यों में हस्तक्षेप न करना शामिल है। यह मामला जनवरी 2026 में सामने आया था, जब पुलिस ने विवेक बत्रा (जो सेवा से बर्खास्त पूर्व आईआरएस अधिकारी हैं) को गिरफ्तार किया था।
