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Srinagar News: बारामुला में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से कश्मीर क्रिकेट का उदय
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बारामुला के तेज गेंदबाज ऑकिब नबी। अर्काइव
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- 67 साल के सफर के बाद रणजी में पाई सफलता, प्लेयर ऑफ द सीरीज आकिब बने प्रेरणास्रोत
साकिब नबी
बारामुला। 67 साल के बाद रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक जीत पूरे इलाके के लिए गर्व का पल बन गई। यह कामयाबी किसी एक सीजन या अचानक मिली कामयाबी का नतीजा नहीं है। यह सालों के सब्र, लगन और जमीनी स्तर पर की गई कोशिशों को दिखाता है। बारामुला में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से कश्मीर क्रिकेट का उदय हुआ।
इस प्रेरणा देने वाली कहानी के केंद्र में आकिब नबी डार हैं जो इस रणजी में प्लेयर ऑफ द सीरीज बने। उनके प्रदर्शन ने कंसिस्टेंसी, मेंटल मजबूती और बड़े मौकों पर उभरने की काबिलियत दिखाई। इसके बाद इंडियन प्रीमियर लीग में 8.4 करोड़ रुपये में उनका चयन कश्मीर के क्रिकेट टैलेंट की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान को दिखाता है।
आकिब 2018 से जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन सेटअप का हिस्सा बन गए और स्टेट लेवल पर एक ऊंचे और ज्यादा प्रतियोगी स्ट्रक्चर में शामिल हो गए। हालांकि उनके सफर की नींव बहुत पहले ही रख दी गई थी। अपनी किशोरवस्था से ही वह रेगुलर प्रतियोगगी क्रिकेट खेलते थे, जहां लोकल लीग और टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को खुद को परखने, अनुशासन सीखने और एक स्ट्रक्चर्ड माहौल में मैच का अनुभव पाने का मौका देते थे।
2013 और 2022 के बीच आकिब ने लगातार इन लोकल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया जिसने उनके विश्वास और गेम अवेयरनेस को बनाने में अहम भूमिका निभाई। इन प्रतियोगिताओं ने रॉ टैलेंट और प्रोफेशनल एम्बिशन के बीच एक पुल का काम किया जिससे युवा क्रिकेटरों को अपने आस-पास की चीजों से आगे बढ़कर सपने देखने का मौका मिला।
इन सालों में बारामुला ने चुपचाप एक मजबूत खेल संस्कृति को विकसित किया है। कम्युनिटी की भागीदारी और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट से ऑर्गनाइज किए जाने वाले रेगुलर क्रिकेट टूर्नामेंट ने युवा एनर्जी को पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव कामों की ओर मोड़ने में मदद की। ये इवेंट सिर्फ मैच जीतने के बारे में नहीं थे बल्कि खेल के आस-पास रुटीन, दोस्ती और एस्पिरेशन बनाने के बारे में थे।
कई खिलाड़ी जो बाद में रणजी लेवल पर जम्मू-कश्मीर को रिप्रेजेंट करने गए वे इन लोकल प्लेटफॉर्म से होकर गुजरे। ऐसे टूर्नामेंट के लगातार चलने से युवा एथलीटों और उनके परिवारों के बीच भरोसा, स्थिरता और अपनेपन की भावना पैदा हुई। सेना की आरआर बटालियन बारामुला सहित सेना से मिलने वाले सपोर्ट ने ऑर्गनाइजेशन और निरंतरता दी लेकिन इन इवेंट्स की धड़कन हमेशा लोकल युवा और कम्युनिटी ही रहे।
अनुशासन, टीमवर्क, लीडरशिप और हिम्मत को बढ़ावा मिला
क्रिकेट ने आर्थिक और प्रोफेशनल मौकों के भी दरवाजे खोले। आकिब की आईपीएल यात्रा इस बात का साफ प्रतीक है कि कैसे खेल में सफलता फाइनेंशियल आजादी और बड़े मौकों में बदल सकती है। स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट ने कोचिंग, ग्राउंड की तैयारी, इवेंट मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स के जरिए रोजी-रोटी पैदा की जिससे खिलाड़ियों के अलावा और भी बहुतों को फायदा हुआ। खेल में रेगुलर हिस्सा लेने से अनुशासन, टीमवर्क, लीडरशिप और हिम्मत को बढ़ावा मिला। संवाद
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साकिब नबी
बारामुला। 67 साल के बाद रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक जीत पूरे इलाके के लिए गर्व का पल बन गई। यह कामयाबी किसी एक सीजन या अचानक मिली कामयाबी का नतीजा नहीं है। यह सालों के सब्र, लगन और जमीनी स्तर पर की गई कोशिशों को दिखाता है। बारामुला में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से कश्मीर क्रिकेट का उदय हुआ।
इस प्रेरणा देने वाली कहानी के केंद्र में आकिब नबी डार हैं जो इस रणजी में प्लेयर ऑफ द सीरीज बने। उनके प्रदर्शन ने कंसिस्टेंसी, मेंटल मजबूती और बड़े मौकों पर उभरने की काबिलियत दिखाई। इसके बाद इंडियन प्रीमियर लीग में 8.4 करोड़ रुपये में उनका चयन कश्मीर के क्रिकेट टैलेंट की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान को दिखाता है।
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आकिब 2018 से जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन सेटअप का हिस्सा बन गए और स्टेट लेवल पर एक ऊंचे और ज्यादा प्रतियोगी स्ट्रक्चर में शामिल हो गए। हालांकि उनके सफर की नींव बहुत पहले ही रख दी गई थी। अपनी किशोरवस्था से ही वह रेगुलर प्रतियोगगी क्रिकेट खेलते थे, जहां लोकल लीग और टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को खुद को परखने, अनुशासन सीखने और एक स्ट्रक्चर्ड माहौल में मैच का अनुभव पाने का मौका देते थे।
2013 और 2022 के बीच आकिब ने लगातार इन लोकल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया जिसने उनके विश्वास और गेम अवेयरनेस को बनाने में अहम भूमिका निभाई। इन प्रतियोगिताओं ने रॉ टैलेंट और प्रोफेशनल एम्बिशन के बीच एक पुल का काम किया जिससे युवा क्रिकेटरों को अपने आस-पास की चीजों से आगे बढ़कर सपने देखने का मौका मिला।
इन सालों में बारामुला ने चुपचाप एक मजबूत खेल संस्कृति को विकसित किया है। कम्युनिटी की भागीदारी और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट से ऑर्गनाइज किए जाने वाले रेगुलर क्रिकेट टूर्नामेंट ने युवा एनर्जी को पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव कामों की ओर मोड़ने में मदद की। ये इवेंट सिर्फ मैच जीतने के बारे में नहीं थे बल्कि खेल के आस-पास रुटीन, दोस्ती और एस्पिरेशन बनाने के बारे में थे।
कई खिलाड़ी जो बाद में रणजी लेवल पर जम्मू-कश्मीर को रिप्रेजेंट करने गए वे इन लोकल प्लेटफॉर्म से होकर गुजरे। ऐसे टूर्नामेंट के लगातार चलने से युवा एथलीटों और उनके परिवारों के बीच भरोसा, स्थिरता और अपनेपन की भावना पैदा हुई। सेना की आरआर बटालियन बारामुला सहित सेना से मिलने वाले सपोर्ट ने ऑर्गनाइजेशन और निरंतरता दी लेकिन इन इवेंट्स की धड़कन हमेशा लोकल युवा और कम्युनिटी ही रहे।
अनुशासन, टीमवर्क, लीडरशिप और हिम्मत को बढ़ावा मिला
क्रिकेट ने आर्थिक और प्रोफेशनल मौकों के भी दरवाजे खोले। आकिब की आईपीएल यात्रा इस बात का साफ प्रतीक है कि कैसे खेल में सफलता फाइनेंशियल आजादी और बड़े मौकों में बदल सकती है। स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट ने कोचिंग, ग्राउंड की तैयारी, इवेंट मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स के जरिए रोजी-रोटी पैदा की जिससे खिलाड़ियों के अलावा और भी बहुतों को फायदा हुआ। खेल में रेगुलर हिस्सा लेने से अनुशासन, टीमवर्क, लीडरशिप और हिम्मत को बढ़ावा मिला। संवाद