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सीजफायर कराने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग दुर्भाग्यपूर्ण : डॉ. फारूक
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि अगर कोई अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
हजरतबल दरगाह में जुमे की नमाज पढ़ने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि कोई नोबेल पुरस्कार के लिए काम नहीं करता, बल्कि मानवता की भलाई के लिए काम किया जाता है। जो लोग नोबेल पुरस्कार की मांग कर रहे हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। नोबेल पुरस्कार से भी बेहतर एक मकसद है। वह है मानवता का मकसद।
उनसे पाकिस्तान के अंदर से उठ रही उन मांगों के बारे में पूछा गया था जिनमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिफ मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्धों के कारण मानवता को तकलीफ पहुंचती है। मानवता को बचाया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध समाप्त होगा और इस क्षेत्र में शांति कायम होगी। अब्दुल्ला ने कहा कि हमें अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए कि युद्ध रुक गया। काश युद्ध पूरी तरह से रुक जाए और दुनिया में शांति हो ताकि हम सभी उसका लाभ उठा सकें।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि अगर कोई अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
हजरतबल दरगाह में जुमे की नमाज पढ़ने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि कोई नोबेल पुरस्कार के लिए काम नहीं करता, बल्कि मानवता की भलाई के लिए काम किया जाता है। जो लोग नोबेल पुरस्कार की मांग कर रहे हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। नोबेल पुरस्कार से भी बेहतर एक मकसद है। वह है मानवता का मकसद।
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उनसे पाकिस्तान के अंदर से उठ रही उन मांगों के बारे में पूछा गया था जिनमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिफ मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्धों के कारण मानवता को तकलीफ पहुंचती है। मानवता को बचाया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध समाप्त होगा और इस क्षेत्र में शांति कायम होगी। अब्दुल्ला ने कहा कि हमें अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए कि युद्ध रुक गया। काश युद्ध पूरी तरह से रुक जाए और दुनिया में शांति हो ताकि हम सभी उसका लाभ उठा सकें।