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Srinagar News: जीएमसी बारामुला में 50% से ज्यादा पद खाली, एमआरआई व कैथ लैब की भी सुविधा नहीं
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- विभिन्न कैडरों में स्वीकृत 482 पदों में 224 ही भरे हुए हैं, 258 खाली
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के टर्शियरी हेल्थकेयर संस्थानों में से एक सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) बारामुला कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। यहां 50 प्रतिशत से ज्यादा स्वीकृत पद खाली पड़े हैं जिससे मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। जीएमसी में एमआरआई और कैथ लैब की भी सुविधा नहीं है।
प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभिन्न कैडरों में स्वीकृत 482 पदों में से वर्तमान में केवल 224 पद भरे हुए हैं जबकि 258 पद खाली पड़े हैं। यह कमी विशेष रूप से सहायक प्रोफेसरों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के बीच चिंताजनक है। विवरण के अनुसार स्वीकृत 65 सहायक प्रोफेसर पदों में से 29 पद भरे हुए हैं और 36 खाली हैं। डॉक्टरों के 59 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 25 पद भरे हुए और 34 खाली पड़े हैं। पैरामेडिकल कर्मचारियों के 358 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 170 पद भरे हुए हैं और 188 खाली हैं।
बारामुला के निवासी कुलवंत सिंह ने कहा कि जीएमसी बारामुला बुनियादी सुविधाओं के मुकाबले में काफी पीछे है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी एक चुनौती है। यहां एमआरआई और कैथ लैब जैसी उन्नत सुविधाएं भी नहीं हैं। इनकी अनुपस्थिति ने पूरे उत्तरी कश्मीर में मरीजों के लिए स्थिति को और भी कठिन बना दिया है।
स्थानीय निवासी मुनीब ने कहा कि एमआरआई और कैथ लैब जैसी सुविधा न होने से आपात स्थिति में कई मरीजों को श्रीनगर रेफर करना पड़ता है। इससे अक्सर इलाज में देरी होती है। इससे मरीजों पर आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह का बहुत ज्यादा बोझ है।
अधिकारियों ने बताया कि फैकल्टी और मेडिकल स्टाफ की कमी का सीधा असर अस्पताल के कामकाज पर पड़ रहा है जिसमें सर्जरी, ओपीडी सेवाओं और इमरजेंसी देखभाल में देरी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहां एमआरआई और कैथ लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाकर संकट को दूर किया जाए
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वे भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाएं। बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाकर इस संकट को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। इसको लेकर जीएमसी बारामुला के प्रिंसिपल डॉ. माजिद जहांगीर से संपर्क करने के प्रयासों के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
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श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के टर्शियरी हेल्थकेयर संस्थानों में से एक सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) बारामुला कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। यहां 50 प्रतिशत से ज्यादा स्वीकृत पद खाली पड़े हैं जिससे मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। जीएमसी में एमआरआई और कैथ लैब की भी सुविधा नहीं है।
प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभिन्न कैडरों में स्वीकृत 482 पदों में से वर्तमान में केवल 224 पद भरे हुए हैं जबकि 258 पद खाली पड़े हैं। यह कमी विशेष रूप से सहायक प्रोफेसरों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के बीच चिंताजनक है। विवरण के अनुसार स्वीकृत 65 सहायक प्रोफेसर पदों में से 29 पद भरे हुए हैं और 36 खाली हैं। डॉक्टरों के 59 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 25 पद भरे हुए और 34 खाली पड़े हैं। पैरामेडिकल कर्मचारियों के 358 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 170 पद भरे हुए हैं और 188 खाली हैं।
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बारामुला के निवासी कुलवंत सिंह ने कहा कि जीएमसी बारामुला बुनियादी सुविधाओं के मुकाबले में काफी पीछे है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी एक चुनौती है। यहां एमआरआई और कैथ लैब जैसी उन्नत सुविधाएं भी नहीं हैं। इनकी अनुपस्थिति ने पूरे उत्तरी कश्मीर में मरीजों के लिए स्थिति को और भी कठिन बना दिया है।
स्थानीय निवासी मुनीब ने कहा कि एमआरआई और कैथ लैब जैसी सुविधा न होने से आपात स्थिति में कई मरीजों को श्रीनगर रेफर करना पड़ता है। इससे अक्सर इलाज में देरी होती है। इससे मरीजों पर आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह का बहुत ज्यादा बोझ है।
अधिकारियों ने बताया कि फैकल्टी और मेडिकल स्टाफ की कमी का सीधा असर अस्पताल के कामकाज पर पड़ रहा है जिसमें सर्जरी, ओपीडी सेवाओं और इमरजेंसी देखभाल में देरी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहां एमआरआई और कैथ लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाकर संकट को दूर किया जाए
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वे भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाएं। बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाकर इस संकट को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। इसको लेकर जीएमसी बारामुला के प्रिंसिपल डॉ. माजिद जहांगीर से संपर्क करने के प्रयासों के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया।