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Srinagar News: जम्मू-कश्मीर सरकार ने नए सिरे से दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने दक्षिण कश्मीर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और सेहत योजना के तहत की गई कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) प्रक्रियाओं की नए सिरे से उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के जारी नए आदेश के तहत चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसे पूर्व की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने और अस्पताल के सभी संबंधित मेडिकल व वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्रोफेसर (डॉ.) खालिद मोहि-उद-दिन की अध्यक्षता में गठित इस नई समिति में जीएमसी जम्मू के प्रोफेसर (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार और प्रोफेसर (डॉ.) संजीव भट के अलावा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. मिसबाह समद को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह उच्च स्तरीय समिति जीएमसी अनंतनाग के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह की ओर से दी गई लिखित दलीलों और उनके बचाव दावों की बारीकी से जांच करेगी, जिन्हें अनियमितताओं के बाद निलंबित कर दिया गया था।
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इससे पहले की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 103 कार्डियक (पेसमेकर) मामलों में से लगभग 50 फीसदी मरीजों को वास्तव में उस जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता ही नहीं थी।
पूर्व विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि जिन 55 मरीजों का मूल्यांकन किया गया उनमें से 27 मरीजों का दिल सामान्य रूप से काम कर रहा था और उनके ऊपर एलबीबीएवी जैसी अत्यधिक विशिष्ट प्रक्रिया करने का कोई ठोस चिकित्सीय कारण नहीं था। आरोपी डॉक्टर पर ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम में गलत विवरण दर्ज करने और मुफ्त इलाज के हकदार गरीब मरीजों से निजी तौर पर पैसे वसूलने के भी गंभीर आरोप लगे थे। एजेंसी
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स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के जारी नए आदेश के तहत चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसे पूर्व की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने और अस्पताल के सभी संबंधित मेडिकल व वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्रोफेसर (डॉ.) खालिद मोहि-उद-दिन की अध्यक्षता में गठित इस नई समिति में जीएमसी जम्मू के प्रोफेसर (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार और प्रोफेसर (डॉ.) संजीव भट के अलावा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. मिसबाह समद को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह उच्च स्तरीय समिति जीएमसी अनंतनाग के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह की ओर से दी गई लिखित दलीलों और उनके बचाव दावों की बारीकी से जांच करेगी, जिन्हें अनियमितताओं के बाद निलंबित कर दिया गया था।
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इससे पहले की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 103 कार्डियक (पेसमेकर) मामलों में से लगभग 50 फीसदी मरीजों को वास्तव में उस जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता ही नहीं थी।
पूर्व विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि जिन 55 मरीजों का मूल्यांकन किया गया उनमें से 27 मरीजों का दिल सामान्य रूप से काम कर रहा था और उनके ऊपर एलबीबीएवी जैसी अत्यधिक विशिष्ट प्रक्रिया करने का कोई ठोस चिकित्सीय कारण नहीं था। आरोपी डॉक्टर पर ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम में गलत विवरण दर्ज करने और मुफ्त इलाज के हकदार गरीब मरीजों से निजी तौर पर पैसे वसूलने के भी गंभीर आरोप लगे थे। एजेंसी