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जमीन विवाद पर कोर्ट का बड़ा फैसला: देव राज के पक्ष में स्थायी रोक, विरोधियों को झटका
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उधमपुर। स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने गांव रौन में जमीन पर अवैध कब्जे और रास्ते के विवाद से जुड़े छह साल पुराने एक मामले में अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने वादी देव राज के हक में स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश देते हुए प्रतिवादियों को जमीन पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप या निर्माण कार्य करने से पूरी तरह रोक दिया है।
मामला साल 2020 का है। गांव रौन निवासी देव राज ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वह जमीन का कानूनी मालिक और काबिज है। वादी का कहना था कि उसने प्रतिवादियों को आवाजाही के लिए सद्भावनापूर्वक 4 फीट चौड़ा रास्ता दिया था। आरोप के मुताबिक प्रतिवादियों ने 5 अक्तूबर 2020 को एकराय होकर उसकी जमीन में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और भूमि कटाव (छलत खोदकर) करते हुए रास्ते को जबरन चौड़ा करने की कोशिश की। जब वादी और उसके परिवार ने इसका विरोध किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। मामले की सुनवाई के दौरान हलका पटवारी ने अदालत में खसरा गिरदावरी और मिस्ल हकीयत के मूल दस्तावेज पेश किए। रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि जमीन आधिकारिक रूप से देव राज के ही नाम पर दर्ज है और कब्जा भी उसी का है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रतिवादियों का इस विवादित जमीन पर कोई कानूनी अधिकार या मालिकाना हक नहीं है। अदालत ने देव राज के हक में फैसला देते हुए डिक्री पारित करने के आदेश जारी किए।
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मामला साल 2020 का है। गांव रौन निवासी देव राज ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वह जमीन का कानूनी मालिक और काबिज है। वादी का कहना था कि उसने प्रतिवादियों को आवाजाही के लिए सद्भावनापूर्वक 4 फीट चौड़ा रास्ता दिया था। आरोप के मुताबिक प्रतिवादियों ने 5 अक्तूबर 2020 को एकराय होकर उसकी जमीन में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और भूमि कटाव (छलत खोदकर) करते हुए रास्ते को जबरन चौड़ा करने की कोशिश की। जब वादी और उसके परिवार ने इसका विरोध किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। मामले की सुनवाई के दौरान हलका पटवारी ने अदालत में खसरा गिरदावरी और मिस्ल हकीयत के मूल दस्तावेज पेश किए। रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि जमीन आधिकारिक रूप से देव राज के ही नाम पर दर्ज है और कब्जा भी उसी का है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रतिवादियों का इस विवादित जमीन पर कोई कानूनी अधिकार या मालिकाना हक नहीं है। अदालत ने देव राज के हक में फैसला देते हुए डिक्री पारित करने के आदेश जारी किए।
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