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Udhampur News: रियासी में बाबा जित्तो मेले का आगाज

Mon, 29 Jun 2026 01:34 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर Updated Mon, 29 Jun 2026 01:34 AM IST
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1 कटड़ा बाबा जीतो के चेले व वंशज के लोग चुनाव दरिया पर रोट देते हुए संभाग चिंटू2,3, बाबा जित्
चिनाब दरिया किनारे की गई विशेष पूजा-अर्चना
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संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा । रियासी में स्थित चिनाब दरिया के किनारे रविवार को तीन दिवसीय बाबा जित्तो मेले का शुभारंभ हो गया। इसका आगाज विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक रूट प्रथा के साथ हुआ।
रविवार को मेले के शुभारंभ अवसर पर बाबा जित्तो के वंशजों और उनके अनुयायियों ब चेलों ने करीब 12:00 चिनाब दरिया के तट पर पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार रूट (इस बर्ष के ताजे गेहूं के आटे से बनी मीठी रोटी), फल, फूल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर श्रद्धा भाव से विशेष पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही ऐतिहासिक तीन दिवसीय बाबा जित्तो मेले की विधिवत शुरुआत हो गई। इसके साथ ही रविवार रात करीब 9:00 बजे बाबा अगर चित्रों के स्थान पर उनके चेलों का वंचित के लोगों द्वारा पूजा अर्चना कर यात्रा की जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है और हर वर्ष इस मेले मैं राज्य व अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
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यह ऐतिहासिक मेला हर वर्ष कटड़ा-रियासी मार्ग पर कटड़ा से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित बाबा जित्तो की जन्मस्थली अघर जित्तो गांव में आयोजित किया जाता है। यहां देशभर से श्रद्धालु, स्थानीय लोग और ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचकर बाबा जित्तो के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं। रविवार सुबह चिनाब दरिया के किनारे पूजा-अर्चना के बाद देर शाम बाबा जित्तो के वंशजों और अनुयायियों का जत्था वापस अघार जित्तो गांव पहुंचा, जहां बाबा जित्तो की जन्मस्थली पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और देर रात तक धार्मिक कार्यक्रम निरंतर जारी रहे। सोमवार को मेले के दूसरे दिन बाबा जित्तो के प्रतीक चिन्ह को विशेष रूप से सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। यह ऐतिहासिक मेला पिछले कई वर्षों से लगातार चलता आ रहा है और क्षेत्र की सांस्कृतिक, धार्मिक और लोक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु बाबा जित्तो के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने पहुंचते हैं।
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