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आज सुबह 11:49 बजे तक कर सकते हैं कंजक पूजन, कल 10:08 बजे तक
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उधमपुर। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे श्रद्धालु पूजन के सही समय को लेकर असमंजस में थे। शंकाएं दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य ने साफ किया कि वीरवार यानी 26 मार्च को सुबह 11:49 बजे तक अष्टमी रहेगी और फिर नवमी शुरू होगी, जो 27 मार्च को सुबह 10:08 बजे तक रहेगी।
चैत्र नवरात्र पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। अष्टमी और रामनवमी को लेकर घर-घर में कंजक पूजन और साख विसर्जन की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में शुभ मुहूर्त की सही जानकारी न होने के कारण लोगों में परेशानी बढ़ गई थी।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुदर्शन शर्मा के अनुसार तिथियों का मिलन होने के कारण दोनों दिन पूजन का विशेष महत्व है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ और समाप्ति समय ऐसा है कि श्रद्धालु सुविधा अनुसार अष्टमी या नवमी, किसी भी दिन कंजक पूजन और साख विसर्जन कर सकते हैं। भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है, भाव और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों ही तिथियां अत्यंत फलदायी हैं। इस बार संयोगवश अष्टमी और रामनवमी एक ही दिन में आ रही है। इसलिए श्रद्धालु अष्टमी के समापन पर जब रामनवमी का शुभ मुहूर्त शुरू होगा तो कंजक पूजन, विसर्जन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। हालांकि जिन्होंने नवदुर्गा के सभी व्रत किए हैं वे शुक्रवार को सुबह 10 बजे से पहले कन्या पूजन करें। इसी दौरान साख को भी हिलाकर रख दें और आसपास के पवित्र सरोवर में विसर्जित कर सकते हैं।
महागौरी और मां सिद्धि दात्री की होती है आराधना
अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। कंजक पूजन में कन्याओं और एक बालक को भोजन कराया जाता है। नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है, जो भक्तों को सिद्धियां प्रदान करती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित सुदर्शन शर्मा के अनुसार तिथियों का मिलन होने के कारण दोनों दिन पूजन का विशेष महत्व है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ और समाप्ति समय ऐसा है कि श्रद्धालु सुविधा अनुसार अष्टमी या नवमी, किसी भी दिन कंजक पूजन और साख विसर्जन कर सकते हैं। भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है, भाव और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों ही तिथियां अत्यंत फलदायी हैं। इस बार संयोगवश अष्टमी और रामनवमी एक ही दिन में आ रही है। इसलिए श्रद्धालु अष्टमी के समापन पर जब रामनवमी का शुभ मुहूर्त शुरू होगा तो कंजक पूजन, विसर्जन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। हालांकि जिन्होंने नवदुर्गा के सभी व्रत किए हैं वे शुक्रवार को सुबह 10 बजे से पहले कन्या पूजन करें। इसी दौरान साख को भी हिलाकर रख दें और आसपास के पवित्र सरोवर में विसर्जित कर सकते हैं।
महागौरी और मां सिद्धि दात्री की होती है आराधना
अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। कंजक पूजन में कन्याओं और एक बालक को भोजन कराया जाता है। नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है, जो भक्तों को सिद्धियां प्रदान करती हैं।