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Udhampur News: कटड़ा से लेकर शिवखोड़ी तक जयकारों की बारिश, वैष्णो देवी धाम में शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ
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कटड़ा/पौनी। पवित्र चैत्र नवरात्र के मंगल आगमन के साथ ही शक्तिपीठों और शिवालयों में आस्था और कुदरत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। वीरवार को जहां एक ओर बारिश और बर्फीली हवाओं ने ठंड का अहसास करा दिया, वहीं दूसरी ओर भक्तों के जोश और जय माता दी के उद्घोष ने मौसम की हर चुनौती को बौना साबित कर दिया। कटड़ा से लेकर शिवखोड़ी तक क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा शतचंडी महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। सीईओ सचिन कुमार वैश्य और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ विश्व शांति और समृद्धि के लिए आहुतियां डालीं। महायज्ञ 26 मार्च को महानवमी पर पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
भवन और अटका क्षेत्र को देश-विदेश के फूलों और फलों से सजाया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष व उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देशों पर लंगर में विशेष व्रत के भोजन और 24 घंटे बिजली-पानी की व्यवस्था की गई है। दिव्यांगों के लिए निशुल्क पोनी और बैटरी कार सेवा के साथ-साथ नवनिर्मित साधना कक्ष (मेडिटेशन हॉल) आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
त्रिकुटा पर्वत पर लगातार हो रही बारिश और कम दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर सेवा अधिकांश समय स्थगित रही। हालांकि भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। श्रद्धालु रेनकोट और बरसाती के सहारे लंबी कतारों में लगकर भवन की ओर बढ़ते रहे। भवन और भैरव घाटी के बीच रोपवे सेवा और अर्धकुंवारी मार्ग पर बैटरी कार सुचारू रूप से चलती रही। श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन कुमार वैश्य ने कहा कि यात्रियों को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराना हमारी प्राथमिकता है। यात्रा मार्ग पूरी तरह सुचारू है और श्रद्धालु बिना किसी भय के दर्शनके लिए आ सकते हैं।
शाम पांच बजे तक 16,500 श्रद्धालु भवन रवाना
आंकड़ों की बात करें तो 18 मार्च को जहां 28,500 श्रद्धालुओं ने माथा टेका था, वहीं नवरात्र के पहले दिन शाम पांच बजे तक ही लगभग 16,500 श्रद्धालु पंजीकरण करवाकर भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन दल, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं जबकि इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
श्रीधर चौक : 21 वर्षों से परंपरा जारी
कटड़ा के मुख्य बस स्टैंड स्थित श्रीधर चौक में दुर्गा पूजा समिति द्वारा भव्य पंडाल का उद्घाटन किया गया। माता वैष्णो देवी के प्रथम पड़ाव पवित्र भूमिका मंदिर से पवित्र ज्योति को ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा के रूप में लाया गया। मुख्य अतिथि नरेश पुजारी ने ज्योति प्रज्वलित कर शुरुआत की। सदस्यों ने बताया कि 21 वर्षों से आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस बार मां दुर्गा, गणेश और वैष्णो माता की पिंडियों की मनमोहक झांकियां सजाई गई हैं। नौ दिनों तक यहां प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा।
शिवखोड़ी : उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
आस्था का यही नजारा आधार शिविर रनसु और पवित्र शिवखोड़ी गुफा में भी देखने को मिला। पौनी और भारख के मंदिरों में सुबह से ही मां शैलपुत्री की पूजा के लिए भीड़ जुटी रही। खराब मौसम और रुक-रुक कर होती बारिश के बावजूद श्रद्धालु पवित्र शिव गुफा के दर्शन के लिए चढ़ाई चढ़ते रहे। शिवखोड़ी में उमड़ी भक्तों की भीड़ ने बता दिया कि जब विश्वास अटूट हो तो प्रकृति की बाधाएं भी राह नहीं रोक सकतीं।
जयकारों से गूंजी वादियां, सरथल देवी में उमड़ा जनसैलाब
किश्तवाड़। खराब मौसम और गिरते पारे के बावजूद श्रद्धालुओं और खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन की रफ्तार को थोड़ा धीमा जरूर किया है लेकिन आस्था के आगे मौसम बेअसर साबित हुआ। चैत्र नवरात्र के पहले दिन पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। शहर से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध सरथल देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। कड़ाके की ठंड और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। अन्य मंदिरों में भी घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र बना रहा। घरों में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय व्रत का अनुष्ठान शुरू हुआ।
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श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा शतचंडी महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। सीईओ सचिन कुमार वैश्य और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ विश्व शांति और समृद्धि के लिए आहुतियां डालीं। महायज्ञ 26 मार्च को महानवमी पर पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
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भवन और अटका क्षेत्र को देश-विदेश के फूलों और फलों से सजाया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष व उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देशों पर लंगर में विशेष व्रत के भोजन और 24 घंटे बिजली-पानी की व्यवस्था की गई है। दिव्यांगों के लिए निशुल्क पोनी और बैटरी कार सेवा के साथ-साथ नवनिर्मित साधना कक्ष (मेडिटेशन हॉल) आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
त्रिकुटा पर्वत पर लगातार हो रही बारिश और कम दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर सेवा अधिकांश समय स्थगित रही। हालांकि भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। श्रद्धालु रेनकोट और बरसाती के सहारे लंबी कतारों में लगकर भवन की ओर बढ़ते रहे। भवन और भैरव घाटी के बीच रोपवे सेवा और अर्धकुंवारी मार्ग पर बैटरी कार सुचारू रूप से चलती रही। श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन कुमार वैश्य ने कहा कि यात्रियों को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराना हमारी प्राथमिकता है। यात्रा मार्ग पूरी तरह सुचारू है और श्रद्धालु बिना किसी भय के दर्शनके लिए आ सकते हैं।
शाम पांच बजे तक 16,500 श्रद्धालु भवन रवाना
आंकड़ों की बात करें तो 18 मार्च को जहां 28,500 श्रद्धालुओं ने माथा टेका था, वहीं नवरात्र के पहले दिन शाम पांच बजे तक ही लगभग 16,500 श्रद्धालु पंजीकरण करवाकर भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन दल, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं जबकि इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
श्रीधर चौक : 21 वर्षों से परंपरा जारी
कटड़ा के मुख्य बस स्टैंड स्थित श्रीधर चौक में दुर्गा पूजा समिति द्वारा भव्य पंडाल का उद्घाटन किया गया। माता वैष्णो देवी के प्रथम पड़ाव पवित्र भूमिका मंदिर से पवित्र ज्योति को ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा के रूप में लाया गया। मुख्य अतिथि नरेश पुजारी ने ज्योति प्रज्वलित कर शुरुआत की। सदस्यों ने बताया कि 21 वर्षों से आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस बार मां दुर्गा, गणेश और वैष्णो माता की पिंडियों की मनमोहक झांकियां सजाई गई हैं। नौ दिनों तक यहां प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा।
शिवखोड़ी : उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
आस्था का यही नजारा आधार शिविर रनसु और पवित्र शिवखोड़ी गुफा में भी देखने को मिला। पौनी और भारख के मंदिरों में सुबह से ही मां शैलपुत्री की पूजा के लिए भीड़ जुटी रही। खराब मौसम और रुक-रुक कर होती बारिश के बावजूद श्रद्धालु पवित्र शिव गुफा के दर्शन के लिए चढ़ाई चढ़ते रहे। शिवखोड़ी में उमड़ी भक्तों की भीड़ ने बता दिया कि जब विश्वास अटूट हो तो प्रकृति की बाधाएं भी राह नहीं रोक सकतीं।
जयकारों से गूंजी वादियां, सरथल देवी में उमड़ा जनसैलाब
किश्तवाड़। खराब मौसम और गिरते पारे के बावजूद श्रद्धालुओं और खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन की रफ्तार को थोड़ा धीमा जरूर किया है लेकिन आस्था के आगे मौसम बेअसर साबित हुआ। चैत्र नवरात्र के पहले दिन पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। शहर से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध सरथल देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। कड़ाके की ठंड और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। अन्य मंदिरों में भी घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र बना रहा। घरों में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय व्रत का अनुष्ठान शुरू हुआ।