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Udhampur News: हर उम्र में पथरी की बीमारी, बच्चे तक आ रहे चपेट में
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उधमपुर। आज के समय में पथरी (स्टोन) की समस्या आम हो रही है। केवल उम्रदराज नहीं, युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गलत खानपान, कम पानी पीना और अनियमित दिनचर्या मुख्य कारण हैं। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
शरीर में पानी की कमी, ज्यादा नमक, ऑक्सालेट युक्त भोजन और संक्रमण के कारण गुर्दे की पथरी होती है। इस मौसम में समस्या अधिक बढ़ जाती है। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह मूत्र के रास्ते में रुकावट पैदा कर देती है। इससे गुर्दे में सूजन, संक्रमण और धीरे-धीरे गुर्दे का संचालन प्रभावित हो सकता है। गंभीर स्थिति में गुर्दा पूरी तरह काम करना बंद भी कर सकता है। पित्त की थैली में पथरी का 80 से 90 प्रतिशत कारण कोलेस्ट्राल है। तला-भुना भोजन, अनियमित खानपान, लंबे समय तक भूखे रहने, मोटापा, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास भी मुख्य वजह है। इस कारण पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस और पित्त नली में संक्रमण हो सकता है।
लक्षणों की बात करें तो गुर्दे की पथरी में अचानक पेट के एक तरफ असहनीय दर्द होता है। उल्टी, पेशाब करने में जलन और कई बार खून भी सकता है। पित्ते की पथरी में पेट के ऊपरी हिस्से खासकर दाएं तरफ या छाती के नीचे दर्द होता है जो तैलीय भोजन करने के बाद बढ़ जाता है। उल्टी और बेचैनी हो सकती है।
गुर्दे की छोटी पथरी को दवाइयों और ज्यादा पानी पीने से ठीक किया जा सकता है। अगर पथरी बड़ी हो जाए तो सर्जरी करवानी पड़ती है। पित्ते की पथरी के मामले में अक्सर सर्जरी ही होती है।
कई लोग लक्षणों को नजरअंदाज कर घर पर ही देसी नुस्खे अपनाने लगते हैं जो कुछ समय के लिए तो राहत देते है लेकिन बाद में खतरनाक साबित हो सकते हैं। मरीजों को अस्पताल में जांच करानी चाहिए।
- डॉ. मोहिंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, जीएमसी।
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जीएमसी में सप्ताह के तीन दिन ओपीडी खुली होती है। समय रहते जागरूकता और जांच से बीमारी से छुटकारा संभव है।
- डॉ. राजिंद्र कुमार, विशेषज्ञ
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शरीर में पानी की कमी, ज्यादा नमक, ऑक्सालेट युक्त भोजन और संक्रमण के कारण गुर्दे की पथरी होती है। इस मौसम में समस्या अधिक बढ़ जाती है। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह मूत्र के रास्ते में रुकावट पैदा कर देती है। इससे गुर्दे में सूजन, संक्रमण और धीरे-धीरे गुर्दे का संचालन प्रभावित हो सकता है। गंभीर स्थिति में गुर्दा पूरी तरह काम करना बंद भी कर सकता है। पित्त की थैली में पथरी का 80 से 90 प्रतिशत कारण कोलेस्ट्राल है। तला-भुना भोजन, अनियमित खानपान, लंबे समय तक भूखे रहने, मोटापा, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास भी मुख्य वजह है। इस कारण पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस और पित्त नली में संक्रमण हो सकता है।
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लक्षणों की बात करें तो गुर्दे की पथरी में अचानक पेट के एक तरफ असहनीय दर्द होता है। उल्टी, पेशाब करने में जलन और कई बार खून भी सकता है। पित्ते की पथरी में पेट के ऊपरी हिस्से खासकर दाएं तरफ या छाती के नीचे दर्द होता है जो तैलीय भोजन करने के बाद बढ़ जाता है। उल्टी और बेचैनी हो सकती है।
गुर्दे की छोटी पथरी को दवाइयों और ज्यादा पानी पीने से ठीक किया जा सकता है। अगर पथरी बड़ी हो जाए तो सर्जरी करवानी पड़ती है। पित्ते की पथरी के मामले में अक्सर सर्जरी ही होती है।
कई लोग लक्षणों को नजरअंदाज कर घर पर ही देसी नुस्खे अपनाने लगते हैं जो कुछ समय के लिए तो राहत देते है लेकिन बाद में खतरनाक साबित हो सकते हैं। मरीजों को अस्पताल में जांच करानी चाहिए।
- डॉ. मोहिंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, जीएमसी।
जीएमसी में सप्ताह के तीन दिन ओपीडी खुली होती है। समय रहते जागरूकता और जांच से बीमारी से छुटकारा संभव है।
- डॉ. राजिंद्र कुमार, विशेषज्ञ