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Udhampur News: घर-घर जांच से टीबी पर होगा प्रहार, ग्रामीण भी होंगे जागरूक
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मनीशा ठाकुर
उधमपुर। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत घर-घर जाकर जांच की जा रही है। इससे उन लोगों को भी लाभ मिल रहा है जो जागरूकता और आर्थिक कमी के कारण अस्पताल नहीं जा पाते थे। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग कर रही है जिससे दूरदराज क्षेत्रों में पीड़ितों की पहचान कर समय पर इलाज मिल रहा है और मरीजों की संख्या में कमी हो रही है।
टीबी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है पल्मोनरी व एक्स पल्मोनरी। पल्मोनरी टीबी फेफड़े को प्रभावित करती है जबकि एक्स पल्मोनरी अन्य अंगों जैसे हडि्डयों, पेट, दिमाग आदि पर हो सकती है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक के संपर्क में आने से फैलती है। इसलिए सांस की बीमारी भी कहा जाता है। टीबी की पुष्टि के लिए बलगम का टेस्ट किया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर तुरंत दवाइयां शुरू कर दी जाती है और उपचार छह माह से लेकर दो साल तक होता है। यदि कोई व्यक्ति बीच में दवाई छोड़ देता है तो हालत बिगड़ सकती है। ऐसे मामलों में इलाज लंबा और जटिल हो सकता है। इसलिए मरीजों को दवाइयां बीच में नहीं छोड़नी चाहिए। संवाद
ये लक्षण दिखें तो जाएं अस्पताल
मुख्य लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, जुकाम, कमजोरी, वजन कम होना और खांसी में खून आना है। टीबी मुक्त भारत अभियान योजना के तहत अस्पताल में एक्सर, टेस्ट से लेकर दवाइयां तक मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाती है। जिले में मरीजों की संख्या की बात करें तो उधमपुर में 780, रामनगर में 108, चिनैनी में 64 और बसंतगढ़ में 25 मरीज हैं।
टीबी का उपचार बेहद जरूरी है। मरीजों के वजन के अनुसार दवाइयां दी जाती है। लोगों को चाहिए कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें, बाहर से घर आने के बाद हाथ धोएं और सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. प्रशांत डोगरा, एमओ, टीबी अस्पताल।
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उधमपुर। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत घर-घर जाकर जांच की जा रही है। इससे उन लोगों को भी लाभ मिल रहा है जो जागरूकता और आर्थिक कमी के कारण अस्पताल नहीं जा पाते थे। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग कर रही है जिससे दूरदराज क्षेत्रों में पीड़ितों की पहचान कर समय पर इलाज मिल रहा है और मरीजों की संख्या में कमी हो रही है।
टीबी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है पल्मोनरी व एक्स पल्मोनरी। पल्मोनरी टीबी फेफड़े को प्रभावित करती है जबकि एक्स पल्मोनरी अन्य अंगों जैसे हडि्डयों, पेट, दिमाग आदि पर हो सकती है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक के संपर्क में आने से फैलती है। इसलिए सांस की बीमारी भी कहा जाता है। टीबी की पुष्टि के लिए बलगम का टेस्ट किया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर तुरंत दवाइयां शुरू कर दी जाती है और उपचार छह माह से लेकर दो साल तक होता है। यदि कोई व्यक्ति बीच में दवाई छोड़ देता है तो हालत बिगड़ सकती है। ऐसे मामलों में इलाज लंबा और जटिल हो सकता है। इसलिए मरीजों को दवाइयां बीच में नहीं छोड़नी चाहिए। संवाद
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ये लक्षण दिखें तो जाएं अस्पताल
मुख्य लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, जुकाम, कमजोरी, वजन कम होना और खांसी में खून आना है। टीबी मुक्त भारत अभियान योजना के तहत अस्पताल में एक्सर, टेस्ट से लेकर दवाइयां तक मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाती है। जिले में मरीजों की संख्या की बात करें तो उधमपुर में 780, रामनगर में 108, चिनैनी में 64 और बसंतगढ़ में 25 मरीज हैं।
टीबी का उपचार बेहद जरूरी है। मरीजों के वजन के अनुसार दवाइयां दी जाती है। लोगों को चाहिए कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें, बाहर से घर आने के बाद हाथ धोएं और सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. प्रशांत डोगरा, एमओ, टीबी अस्पताल।