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धर्म की आड़ में विश्वासघात: सात साल की बच्ची से दुष्कर्म में मौलवी को नौ साल की सजा, जुर्माना भी भरना होगा

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 27 Feb 2026 10:46 AM IST
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सार

जम्मू की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात साल की नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मौलवी मोहम्मद शाहनवाज को नौ साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

Cleric sentenced to nine years in prison for a seven-year-old girl
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात साल की नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मोहम्मद शाहनवाज को नौ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि मौलवी का अपराध गंभीर था और दोषी का धार्मिक गुरु होने की वजह से विश्वासघात और भी गंभीर हो गया।

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यह सजा पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने पुलिस स्टेशन नगरोटा में दर्ज एक मामले में सुनाई। आरोपी को बीती 24 फरवरी को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था। यह मामला 12 मार्च 2018 का है। अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर बताते हुए दोषी के लिए ज्यादा-से-ज्यादा सजा की मांग की थी। उसके अनुसार नाबालिग एक मस्जिद में कुरान की क्लास में जाती थी जहां आरोपी मौलवी था।
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ट्रायल के दौरान अभियोजन ने 16 गवाहों से पूछताछ की। इनमें पीड़िता, उसकी मां, करीबी रिश्तेदार, स्वतंत्र गवाह, चिकित्सा विशेषज्ञ और जांच अधिकारी शामिल थे। अदालत ने माना कि पीड़ित की गवाही प्राकृतिक, ठोस और भरोसेमंद थी। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास काटना होगा। साथ ही निर्देश दिया कि जमा होने पर 25 हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएं और बाकी रकम सरकारी खजाने में जमा की जाए।

दोषी करीब सात की सजा भुगत चुका है। अदालत ने इसे सजा में सेट ऑफ करने के निर्देश देते हुए दोषी को बाकी समय काटने के लिए अम्फला जेल में रखने के लिए कहा। अदालत ने मुआवजे की भी सिफारिश की। आदेश की एक कॉपी आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जम्मू को भेजे जाने के भी निर्देश दिए। जेएनएफ

नार्को टेरर के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
जम्मू के तीसरे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एनआईए की धारा 22 के तहत प्राधिकृत) मदन लाल की अदालत ने नरवाल बाला के मोहम्मद यूसुफ उर्फ शम्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उस पर नार्को टेरर और हथियारों की बरामदगी से जुड़े मामले चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी को जमानत से यूएपीए के अपराधों की चल रही जांच पर बुरा असर पड़ सकता है।

जमानत अर्जी जम्मू के गांधी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले से जुड़ी है। केस रिकॉर्ड के मुताबिक पुलिस ने दावा किया कि एक पेट्रोल पार्टी ने शास्त्री नगर श्मशान घाट के पास दो लोगों करण शर्मा और निकलेश वर्मा को रोका। उनके पास से 1.630 किलो हेरोइन जैसे पदार्थ के साथ 3.26 किलो नशीले पदार्थ की बरामदगी हुई। इनकी गिरफ्तारी के बाद आगे के लिंक मिले।

जांच के आधार पर मोहम्मद यूसुफ उर्फ शम्मा को फॉरवर्ड लिंकेज आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर 53.20 ग्राम हेरोइन जैसा पदार्थ और एक डिजिटल वजन करने की मशीन बरामद की गई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया उससे सीमित मात्रा ही ली गई थी, इसलिए एनडीपीएस की धारा 37 का वाणिज्यिक मात्रा का नियम लागू नहीं होना चाहिए।

अदालत ने पाया कि आवेदक एक ऐसे मामले में सह-आरोपी है जिसमें सरकारी वकील ने बड़ी मात्रा में हेरोइन और कई पिस्तौल बरामद होने का आरोप लगाया है। वह एक असरदार संगठित क्राइम नेटवर्क का हिस्सा है। यह देखते हुए कि जांच अभी भी चल रही है और इस स्टेज पर रिहाई से जांच पर असर पड़ सकता है, कोर्ट ने जमानत याचिका को समय से पहले और बेदम करार देते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया। -जेएनएफ

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