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Jammu News: बाड़ी ब्राह्मणा में बिछता जा रहा चिट्टे का जाल
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- बाड़ी ब्राह्मणा में बिछता जा रहा चिट्टे (हेरोइन) का जाल, 10 माह में 12 युवकों की मौत
- ओवरडोज से उधमपुर के युवक की मौत, तीन दिन खड्ड में पड़ा रहा शव
विशाल जसरोटिया
सांबा। बाड़ी ब्राह्मणा इलाके में चिट्टे (हेरोइन) का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। पिछले बुधवार को बलोल क्षेत्र में उधमपुर निवासी 23 वर्षीय अनीश शर्मा का शव मिलने से इस भयावह स्थिति ने एक बार फिर से सिर उठाया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 10 महीनों में अकेले नशे के कारण ही लगभग 12 युवाओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें अधिकतर युवक चिट्टे का सेवन करने के बाद मृत पाए गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनीश शर्मा विशेष रूप से चिट्टा खरीदने के इरादे से बलोल इलाके में आया था। वह बाइक से नशा लेने पहुंचा था जहां हेरोइन की अधिक मात्रा लेने से उसकी हालत बिगड़ गई और वह मौके पर ही अचेत हो गया। ओवरडोज ही उसकी मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि उसका शव तीन दिन तक बलोल खड्ड में पड़ा रहा। पुलिस ने दो दिन पहले ही घटनास्थल से कुछ दूरी पर उसकी बाइक बरामद की थी, जिसकी चाबी बाद में शव के पास से मिली। स्थानीय लोगों और पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो बीते कई वर्षों से यह इलाका नशे के गढ़ के रूप में कुख्यात होता जा रहा है और कई युवा इसकी गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद कर चुके हैं।
चिट्टे के प्रमुख अड्डे बाड़ी ब्राह्मणा के बलोल खड्ड, किकरी मोड़ और सरोर अड्डा क्षेत्र नशा तस्करी (चिट्टा) के प्रमुख अड्डों के रूप में लंबे समय से बदनाम हैं। करीब दो दशक पहले इन इलाकों में खानाबदोश गुज्जर समुदाय के लोगों ने अस्थायी डेरे लगाए थे जो पशुपालन और दूध बिक्री का काम करते थे। लगभग एक दशक पहले यहां डेरों में रह रहे कुछ शरारती तत्वों ने हेरोइन की तस्करी का अवैध धंधा शुरू किया जो अब एक संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। सूत्रों का दावा है कि इस गोरखधंधे में महिलाओं की भी संलिप्तता सामने आई है।
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दूर-दूर से आते हैं ग्राहक
स्थिति यह है कि केवल सांबा जिले से ही नहीं बल्कि जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर, राजौरी, पुंछ और डोडा जैसे दूरदराज के इलाकों से भी नशे के आदी लोग चिट्टा खरीदने बाड़ी ब्राह्मणा पहुंचते हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि हेरोइन सीमा पार से भेजी जा रही है, जिसे नार्को-आतंकवाद का गंभीर खतरा माना जा रहा है।
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पुलिस की कार्रवाई फिर भी चुनौती बरकरार
नशे के बढ़ते खतरे को देखते हुए पुलिस ने पिछले एक वर्ष में विशेष अभियान चलाकर नशा तस्करों पर शिकंजा कसने की कोशिश की है। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान 78 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया, 39 भगोड़ों को धर दबोचा गया और करीब 1.34 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई। लेकिन इन कोशिशों के बावजूद चिट्टे का यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है, जो प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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सख्त कानून और सामूहिक प्रयास जरूरी
नशे के खिलाफ लंबे समय से अभियान चला रहे समाजसेवी कर्नल (रि.) कर्ण सिंह का कहना है कि इस सामाजिक बुराई से निपटने के लिए सख्त कानून, त्वरित कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी सतर्क रहने और समय रहते निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है, नहीं तो आने वाली पीढ़ी इसका सबसे बड़ा शिकार बनेगी।
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- ओवरडोज से उधमपुर के युवक की मौत, तीन दिन खड्ड में पड़ा रहा शव
विशाल जसरोटिया
सांबा। बाड़ी ब्राह्मणा इलाके में चिट्टे (हेरोइन) का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। पिछले बुधवार को बलोल क्षेत्र में उधमपुर निवासी 23 वर्षीय अनीश शर्मा का शव मिलने से इस भयावह स्थिति ने एक बार फिर से सिर उठाया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 10 महीनों में अकेले नशे के कारण ही लगभग 12 युवाओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें अधिकतर युवक चिट्टे का सेवन करने के बाद मृत पाए गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनीश शर्मा विशेष रूप से चिट्टा खरीदने के इरादे से बलोल इलाके में आया था। वह बाइक से नशा लेने पहुंचा था जहां हेरोइन की अधिक मात्रा लेने से उसकी हालत बिगड़ गई और वह मौके पर ही अचेत हो गया। ओवरडोज ही उसकी मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि उसका शव तीन दिन तक बलोल खड्ड में पड़ा रहा। पुलिस ने दो दिन पहले ही घटनास्थल से कुछ दूरी पर उसकी बाइक बरामद की थी, जिसकी चाबी बाद में शव के पास से मिली। स्थानीय लोगों और पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो बीते कई वर्षों से यह इलाका नशे के गढ़ के रूप में कुख्यात होता जा रहा है और कई युवा इसकी गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद कर चुके हैं।
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चिट्टे के प्रमुख अड्डे बाड़ी ब्राह्मणा के बलोल खड्ड, किकरी मोड़ और सरोर अड्डा क्षेत्र नशा तस्करी (चिट्टा) के प्रमुख अड्डों के रूप में लंबे समय से बदनाम हैं। करीब दो दशक पहले इन इलाकों में खानाबदोश गुज्जर समुदाय के लोगों ने अस्थायी डेरे लगाए थे जो पशुपालन और दूध बिक्री का काम करते थे। लगभग एक दशक पहले यहां डेरों में रह रहे कुछ शरारती तत्वों ने हेरोइन की तस्करी का अवैध धंधा शुरू किया जो अब एक संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। सूत्रों का दावा है कि इस गोरखधंधे में महिलाओं की भी संलिप्तता सामने आई है।
दूर-दूर से आते हैं ग्राहक
स्थिति यह है कि केवल सांबा जिले से ही नहीं बल्कि जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर, राजौरी, पुंछ और डोडा जैसे दूरदराज के इलाकों से भी नशे के आदी लोग चिट्टा खरीदने बाड़ी ब्राह्मणा पहुंचते हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि हेरोइन सीमा पार से भेजी जा रही है, जिसे नार्को-आतंकवाद का गंभीर खतरा माना जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई फिर भी चुनौती बरकरार
नशे के बढ़ते खतरे को देखते हुए पुलिस ने पिछले एक वर्ष में विशेष अभियान चलाकर नशा तस्करों पर शिकंजा कसने की कोशिश की है। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान 78 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया, 39 भगोड़ों को धर दबोचा गया और करीब 1.34 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई। लेकिन इन कोशिशों के बावजूद चिट्टे का यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है, जो प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सख्त कानून और सामूहिक प्रयास जरूरी
नशे के खिलाफ लंबे समय से अभियान चला रहे समाजसेवी कर्नल (रि.) कर्ण सिंह का कहना है कि इस सामाजिक बुराई से निपटने के लिए सख्त कानून, त्वरित कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी सतर्क रहने और समय रहते निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है, नहीं तो आने वाली पीढ़ी इसका सबसे बड़ा शिकार बनेगी।