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Jammu News: आतंकवाद पर अफवाह नहीं, तथ्यों पर भरोसा करें
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- जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर पर ऑनलाइन व्याख्यान
- शोध आधारित अध्ययन और सही जानकारी को बताया जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर जैसे संवेदनशील मुद्दों को समझने के लिए अफवाहों और अधूरी जानकारी के बजाय शोध और सही तथ्यों पर भरोसा करने की जरूरत है। यह बात वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिंदी की ओर से आयोजित जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान में कही गई।
मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं लेखक प्रो. कुलभूषण मोहत्रा ने कहा कि जम्मू क्षेत्र लंबे समय से आतंकवाद की चुनौती का सामना करता रहा है। ऐसे में इस विषय पर गंभीर शोध, ऐतिहासिक दस्तावेजों और विश्वसनीय तथ्यों के आधार पर अध्ययन जरूरी है, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके। इस विषय पर तैयार होने वाले शोध और दस्तावेज भविष्य में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्धारकों के लिए भी उपयोगी साबित होंगे। जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों पर भ्रामक जानकारियां भी सामने आती रहती हैं। इसलिए किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले तथ्यों की जांच करना और प्रामाणिक दस्तावेजों का अध्ययन करना जरूरी है।
मोहत्रा ने आगे कहा कि आतंकवाद का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव समाज, अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए इस विषय पर संतुलित, तथ्य आधारित और शोधपूर्ण चर्चा समय की जरूरत है। संस्थान की संस्थापक निदेशक प्रो. अरुणा सिन्हा ने कहा कि जम्मू क्षेत्र से जुड़े ऐसे विषयों पर शोध आधारित चर्चा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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- शोध आधारित अध्ययन और सही जानकारी को बताया जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर जैसे संवेदनशील मुद्दों को समझने के लिए अफवाहों और अधूरी जानकारी के बजाय शोध और सही तथ्यों पर भरोसा करने की जरूरत है। यह बात वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिंदी की ओर से आयोजित जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉर विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान में कही गई।
मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं लेखक प्रो. कुलभूषण मोहत्रा ने कहा कि जम्मू क्षेत्र लंबे समय से आतंकवाद की चुनौती का सामना करता रहा है। ऐसे में इस विषय पर गंभीर शोध, ऐतिहासिक दस्तावेजों और विश्वसनीय तथ्यों के आधार पर अध्ययन जरूरी है, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके। इस विषय पर तैयार होने वाले शोध और दस्तावेज भविष्य में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्धारकों के लिए भी उपयोगी साबित होंगे। जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों पर भ्रामक जानकारियां भी सामने आती रहती हैं। इसलिए किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले तथ्यों की जांच करना और प्रामाणिक दस्तावेजों का अध्ययन करना जरूरी है।
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मोहत्रा ने आगे कहा कि आतंकवाद का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव समाज, अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए इस विषय पर संतुलित, तथ्य आधारित और शोधपूर्ण चर्चा समय की जरूरत है। संस्थान की संस्थापक निदेशक प्रो. अरुणा सिन्हा ने कहा कि जम्मू क्षेत्र से जुड़े ऐसे विषयों पर शोध आधारित चर्चा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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