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Jammu News: साढ़े चार घंटे रेंगता रहा आधा शहर, दो किमी तक लगी वाहनों की लंबी कतार
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- ज्वेल चौक, डोगरा चौक, कच्ची छावनी और रेजिडेंसी रोड पर थमे पहिए
- मुख्यमंत्री की रैली में आए वाहनों के कारण चरमराई यातायात व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। यातायात व्यवस्था रविवार को चाढ़े चार घंटे पूरी तरह चरमरा गई। मुख्यमंत्री की रैली में आए वाहनों के कारण ज्वेल चौक, डोगरा चौक, कच्ची छावनी और रेजिडेंसी रोड पर यातायात व्यवस्था ठप हो गई। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की रैली में पहुंचे वाहनों के भारी हुजूम के कारण शहर के मुख्य चौराहों और मार्गों पर करीब साढ़े चार घंटे तक जाम लगा रहा। स्थिति यह रही कि इन सभी प्रमुख सड़कों पर डेढ़ से दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की रैली को लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की गाड़ियां जम्मू पहुंची थीं। रैली स्थल के आसपास तय पार्किंग क्षमता से अधिक वाहन आने और उन्हें सड़कों के किनारे बेतरतीब तरीके से खड़ा कर देने के कारण शहर का पूरा ट्रैफिक प्लान फेल हो गया। सुबह से ही शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। ज्वेल चौक व डोगरा चौक फ्लाईओवर के नीचे और मुख्य सड़क पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं। करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। कच्ची छावनी रोड का संकरा मार्ग होने और रैली के वाहनों के दबाव के कारण यहां दोपहर 12 बजे से साढ़े तीन बजे तक पूरी तरह चक्का जाम जैसी स्थिति रही। व्यापारिक हब होने के कारण रेजिडेंसी रोड आम दिनों में भी दबाव रहता है लेकिन रैली के चलते यहां भी डेढ़ किलोमीटर लंबा जाम लग गया। डोगरा चौक और रेजिडेंसी रोड पर कुछ एंबुलेंस भी इस भीषण जाम में फंसी नजर आईं, जिन्हें रास्ता देने के लिए स्थानीय लोगों को खुद मशक्कत करनी पड़ी।
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पूर्वाह्न 11 बजे से बिगड़ने लगे हालात
रैली में शामिल होने के लिए सुबह से ही बाहरी जिलों से बसों, सूमो और अन्य वीआईपी वाहनों का शहर में प्रवेश शुरू हो गया था। पूर्वाह्न करीब 11 बजे ज्वेल चौक और डोगरा चौक पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते कतारें लंबी होती गईं। दोपहर दो बजे के बाद जब रैली खत्म हुई और एक साथ सैकड़ों वाहन सड़कों पर उतरे, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।
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रूट डायवर्जन प्लान फेल
दावों के विपरीत ट्रैफिक पुलिस का मैनेजमेंट पूरी तरह से फेल साबित हुआ। हालांकि मुख्य चौकों पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी, लेकिन रैली में आए वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और अचानक बढ़े दबाव के आगे पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने नजर आए। डोगरा चौक से विक्रम चौक और फ्लाईओवर के नीचे की सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं। दोपहर बाद जब रैली समाप्त हुई और वाहन धीरे-धीरे शहर से बाहर निकले, तब जाकर लोगों को इस भीषण जाम से राहत मिल सकी।
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पुलिस के छूटे पसीने
ट्रैफिक को सुचारु करने के लिए ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अतिरिक्त जवानों को चौराहों पर तैनात किया गया था लेकिन वाहनों की संख्या इतनी अधिक थी कि सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए।
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साढ़े चार घंटे बाद मिली आंशिक राहत
दोपहर करीब 1:00 बजे शुरू हुआ यह गतिरोध शाम 5:30 बजे के बाद ही कुछ कम हो सका, जब रैली समाप्त होने के बाद वाहन धीरे-धीरे शहर की बाहरी सीमाओं की ओर रवाना हुए। हालांकि, देर शाम तक शहर के आंतरिक मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी बनी रही। इस जाम ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और वीआईपी आयोजनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है।
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- मुख्यमंत्री की रैली में आए वाहनों के कारण चरमराई यातायात व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। यातायात व्यवस्था रविवार को चाढ़े चार घंटे पूरी तरह चरमरा गई। मुख्यमंत्री की रैली में आए वाहनों के कारण ज्वेल चौक, डोगरा चौक, कच्ची छावनी और रेजिडेंसी रोड पर यातायात व्यवस्था ठप हो गई। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की रैली में पहुंचे वाहनों के भारी हुजूम के कारण शहर के मुख्य चौराहों और मार्गों पर करीब साढ़े चार घंटे तक जाम लगा रहा। स्थिति यह रही कि इन सभी प्रमुख सड़कों पर डेढ़ से दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की रैली को लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की गाड़ियां जम्मू पहुंची थीं। रैली स्थल के आसपास तय पार्किंग क्षमता से अधिक वाहन आने और उन्हें सड़कों के किनारे बेतरतीब तरीके से खड़ा कर देने के कारण शहर का पूरा ट्रैफिक प्लान फेल हो गया। सुबह से ही शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। ज्वेल चौक व डोगरा चौक फ्लाईओवर के नीचे और मुख्य सड़क पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं। करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। कच्ची छावनी रोड का संकरा मार्ग होने और रैली के वाहनों के दबाव के कारण यहां दोपहर 12 बजे से साढ़े तीन बजे तक पूरी तरह चक्का जाम जैसी स्थिति रही। व्यापारिक हब होने के कारण रेजिडेंसी रोड आम दिनों में भी दबाव रहता है लेकिन रैली के चलते यहां भी डेढ़ किलोमीटर लंबा जाम लग गया। डोगरा चौक और रेजिडेंसी रोड पर कुछ एंबुलेंस भी इस भीषण जाम में फंसी नजर आईं, जिन्हें रास्ता देने के लिए स्थानीय लोगों को खुद मशक्कत करनी पड़ी।
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पूर्वाह्न 11 बजे से बिगड़ने लगे हालात
रैली में शामिल होने के लिए सुबह से ही बाहरी जिलों से बसों, सूमो और अन्य वीआईपी वाहनों का शहर में प्रवेश शुरू हो गया था। पूर्वाह्न करीब 11 बजे ज्वेल चौक और डोगरा चौक पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते कतारें लंबी होती गईं। दोपहर दो बजे के बाद जब रैली खत्म हुई और एक साथ सैकड़ों वाहन सड़कों पर उतरे, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।
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रूट डायवर्जन प्लान फेल
दावों के विपरीत ट्रैफिक पुलिस का मैनेजमेंट पूरी तरह से फेल साबित हुआ। हालांकि मुख्य चौकों पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी, लेकिन रैली में आए वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और अचानक बढ़े दबाव के आगे पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने नजर आए। डोगरा चौक से विक्रम चौक और फ्लाईओवर के नीचे की सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं। दोपहर बाद जब रैली समाप्त हुई और वाहन धीरे-धीरे शहर से बाहर निकले, तब जाकर लोगों को इस भीषण जाम से राहत मिल सकी।
पुलिस के छूटे पसीने
ट्रैफिक को सुचारु करने के लिए ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अतिरिक्त जवानों को चौराहों पर तैनात किया गया था लेकिन वाहनों की संख्या इतनी अधिक थी कि सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए।
साढ़े चार घंटे बाद मिली आंशिक राहत
दोपहर करीब 1:00 बजे शुरू हुआ यह गतिरोध शाम 5:30 बजे के बाद ही कुछ कम हो सका, जब रैली समाप्त होने के बाद वाहन धीरे-धीरे शहर की बाहरी सीमाओं की ओर रवाना हुए। हालांकि, देर शाम तक शहर के आंतरिक मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी बनी रही। इस जाम ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और वीआईपी आयोजनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है।