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Jammu News: वेतन, पेंशन भुगतान को भटक रहे कर्मचारी, 10 साल से जवाब तक दाखिल नहीं कर रहे विभाग
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कैट में एक दिन में कई-कई ऐसे मामले आ रहे, अब ट्रिब्यूनल दिखा रहा सख्ती
जवाब दाखिल करने का दिया अंतिम मौका, विफल रहने पर अफसरों पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में कर्मचारी सालों से अपने वेतन और पेंशन बकाया के भुगतान को भटक रहे हैं, उधर विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि उनकी ओर से संबंधित मामलों में 10 साल से भी ज्यादा समय से जवाब तक दाखिल नहीं किया गया। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में हर रोज ऐसे कई-कई मामले पहुंच रहे हैं। अब कैट दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्ती दिखा रहा है।
उसने संबंधित मामलों में जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका देते हुए ऐसा करने में विफल रहने पर कुछ अधिकारियों का वेतन काटने तो कुछ को कैट के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। जिन विभागों की ओर से सबसे ज्यादा लापरवाही बरती गई है, उनमें पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, जलशक्ति के साथ ही स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं। गृह विभाग और कृषि उत्पादन विभाग से संबंधित भी कई मामले हैं।
ऐसे हैं मामले : मनीराम बनाम गृह विभाग केस जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से कैट को स्थानांतरित किया गया है। विभाग की ओर से 10 साल बाद भी पारिश्रमिक से जुड़े इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किया गया है। कैट के प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी ने इसे स्तब्ध करने वाला और आश्चर्यजनक बताते हुए टिप्पणी की कि लगता है विभाग इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। उसने प्रतिवादी को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका देते हुए इसमें विफल रहने पर सुनवाई की अगली तारीख पर अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मामले में सुनवाई आगामी 16 अप्रैल को होगी।
अनिल अरोड़ा बनाम कृषि उत्पादन विभाग में भी प्रतिवादी की ओर से जवाब दाखिल न करने पर कैट ने सख्ती दिखाई है। उसे चौथा और अंतिम अवसर देते हुए जवाब दाखिल न करने पर दोषी अधिकारी को कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला वरिष्ठ नागरिकों की रिवाइज्ड पेंशन से संबंधित है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख चार मई तय की गई है।
सुरिंदर कुमार शर्मा बनाम पीडब्ल्यूडी का मामला वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन निर्धारण से जुड़ा है। इस मामले में भी कैट ने 10 साल से अधिक समय से
जवाब दाखिल न होने पर प्रतिवादी को चौथा और आखिरी अवसर देते हुए ऐसा कर पाने में विफल रहने पर सुनवाई की अगली तारीख को दोषी अधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
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कैट में एक दिन में कई-कई ऐसे मामले आ रहे, अब ट्रिब्यूनल दिखा रहा सख्ती
जवाब दाखिल करने का दिया अंतिम मौका, विफल रहने पर अफसरों पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में कर्मचारी सालों से अपने वेतन और पेंशन बकाया के भुगतान को भटक रहे हैं, उधर विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि उनकी ओर से संबंधित मामलों में 10 साल से भी ज्यादा समय से जवाब तक दाखिल नहीं किया गया। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में हर रोज ऐसे कई-कई मामले पहुंच रहे हैं। अब कैट दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्ती दिखा रहा है।
उसने संबंधित मामलों में जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका देते हुए ऐसा करने में विफल रहने पर कुछ अधिकारियों का वेतन काटने तो कुछ को कैट के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। जिन विभागों की ओर से सबसे ज्यादा लापरवाही बरती गई है, उनमें पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, जलशक्ति के साथ ही स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं। गृह विभाग और कृषि उत्पादन विभाग से संबंधित भी कई मामले हैं।
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ऐसे हैं मामले : मनीराम बनाम गृह विभाग केस जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से कैट को स्थानांतरित किया गया है। विभाग की ओर से 10 साल बाद भी पारिश्रमिक से जुड़े इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किया गया है। कैट के प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी ने इसे स्तब्ध करने वाला और आश्चर्यजनक बताते हुए टिप्पणी की कि लगता है विभाग इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। उसने प्रतिवादी को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका देते हुए इसमें विफल रहने पर सुनवाई की अगली तारीख पर अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मामले में सुनवाई आगामी 16 अप्रैल को होगी।
अनिल अरोड़ा बनाम कृषि उत्पादन विभाग में भी प्रतिवादी की ओर से जवाब दाखिल न करने पर कैट ने सख्ती दिखाई है। उसे चौथा और अंतिम अवसर देते हुए जवाब दाखिल न करने पर दोषी अधिकारी को कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला वरिष्ठ नागरिकों की रिवाइज्ड पेंशन से संबंधित है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख चार मई तय की गई है।
सुरिंदर कुमार शर्मा बनाम पीडब्ल्यूडी का मामला वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन निर्धारण से जुड़ा है। इस मामले में भी कैट ने 10 साल से अधिक समय से
जवाब दाखिल न होने पर प्रतिवादी को चौथा और आखिरी अवसर देते हुए ऐसा कर पाने में विफल रहने पर सुनवाई की अगली तारीख को दोषी अधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।