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Jammu News: अमर महल म्यूजियम में अब डोगरा राजवंश की महारानियों की कहानी भी देख-सुन सकेंगे
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राजकुमार मार्तंड सिंह।
- फोटो : शतरंज में कृतिका ने मारी बाजी
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फोटो...
-जम्मू-कश्मीर के महाराजाओं का निवास रहे इस म्यूजियम में अलग कक्ष जोड़ा
-1890 में राजा अमर सिंह के शाही निवास के रूप में किया गया था इसका निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमर महल म्यूजियम में अब डोगरा राजवंश की महारानियों की कहानियां भी देख-सुन सकेंगे। कभी जम्मू-कश्मीर के महाराजाओं का निवास रहे इस म्यूजियम में अब डोगरा राजपरिवार की महारानियों के लिए अलग से कक्ष जोड़ा गया है। इसमें उनकी जीवनशैली, कलाओं के साथ ही उनके कृतित्व के बारे में प्रदर्शनी लगाई गई है।
अमर महल का वास्तु फ्रांसीसी वास्तुकार करीब 164 साल पहले 1862 में डिजाइन किया था। 1890 के दशक में राजा अमर सिंह के शाही निवास के रूप में इसका निर्माण किया गया। यह डोगरा राजाओं का अंतिम आधिकारिक निवास रहा। महारानी तारा देवी 1967 में निधन हो जाने तक यहीं रहीं। इसके बाद उनके पुत्र डॉ. करण सिंह और उनकी पत्नी ने यूरोपीय शैली के इस महल को क्षेत्र की दुर्लभ कला, साहित्य और डोगरा इतिहास को संरक्षित करने के लिए एक म्यूजियम और लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया।
13 अप्रैल, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया। इस वक्त हरि-तारा चैरिटेबल ट्रस्ट इसका प्रबंधन कर रहा है। 120 किलोग्राम शुद्ध सोने का सिंहासन इसका खास आकर्षण है। इसके अतिरिक्त पहाड़ी लघुचित्र, कांगड़ा लघुचित्र, 25 हजार से अधिक प्राचीन पुस्तकों और कई कलाकृतियों का संग्रह इस म्यूजियम में मौजूद है।
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चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने किया नवीकरण
तवी किनारे स्थित अमर महल म्यूजियम की दीवारों पर ब्लैक फंगस जम गया था। लाखों की लागत से इसका नवीकरण किया गया है। स्थानीय कारीगरों के साथ ही चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने नवीकरण को अंजाम दिया है।
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पिछले छह माह में बढ़ी स्थानीय दर्शकों की संख्या
जम्मू घूमने आने वाले दर्शकों की अच्छी-खासी संख्या अमर महल म्यूजियम देखने आती है लेकिन पिछले छह माह में स्थानीय दर्शकों की संख्या बढ़ी है। प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी बताते हैं कि इस म्यूजियम का स्ट्रक्चर अपने आप में दर्शनीय है।
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कोट...
अमर महल म्यूजियम को समृद्ध करने के लिए लगातार इसमें कुछ नई पेंटिंग, किताबें और अन्य धरोहरों को जोड़ने का सिलसिला जारी है। हम चाहते हैं कि सभी लोग समृद्ध डोगरा विरासत के बारे में जानें।
-राजकुमार मार्तंड सिंह, हरि-तारा ट्रस्ट।
-जम्मू-कश्मीर के महाराजाओं का निवास रहे इस म्यूजियम में अलग कक्ष जोड़ा
-1890 में राजा अमर सिंह के शाही निवास के रूप में किया गया था इसका निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमर महल म्यूजियम में अब डोगरा राजवंश की महारानियों की कहानियां भी देख-सुन सकेंगे। कभी जम्मू-कश्मीर के महाराजाओं का निवास रहे इस म्यूजियम में अब डोगरा राजपरिवार की महारानियों के लिए अलग से कक्ष जोड़ा गया है। इसमें उनकी जीवनशैली, कलाओं के साथ ही उनके कृतित्व के बारे में प्रदर्शनी लगाई गई है।
अमर महल का वास्तु फ्रांसीसी वास्तुकार करीब 164 साल पहले 1862 में डिजाइन किया था। 1890 के दशक में राजा अमर सिंह के शाही निवास के रूप में इसका निर्माण किया गया। यह डोगरा राजाओं का अंतिम आधिकारिक निवास रहा। महारानी तारा देवी 1967 में निधन हो जाने तक यहीं रहीं। इसके बाद उनके पुत्र डॉ. करण सिंह और उनकी पत्नी ने यूरोपीय शैली के इस महल को क्षेत्र की दुर्लभ कला, साहित्य और डोगरा इतिहास को संरक्षित करने के लिए एक म्यूजियम और लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया।
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13 अप्रैल, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया। इस वक्त हरि-तारा चैरिटेबल ट्रस्ट इसका प्रबंधन कर रहा है। 120 किलोग्राम शुद्ध सोने का सिंहासन इसका खास आकर्षण है। इसके अतिरिक्त पहाड़ी लघुचित्र, कांगड़ा लघुचित्र, 25 हजार से अधिक प्राचीन पुस्तकों और कई कलाकृतियों का संग्रह इस म्यूजियम में मौजूद है।
चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने किया नवीकरण
तवी किनारे स्थित अमर महल म्यूजियम की दीवारों पर ब्लैक फंगस जम गया था। लाखों की लागत से इसका नवीकरण किया गया है। स्थानीय कारीगरों के साथ ही चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने नवीकरण को अंजाम दिया है।
पिछले छह माह में बढ़ी स्थानीय दर्शकों की संख्या
जम्मू घूमने आने वाले दर्शकों की अच्छी-खासी संख्या अमर महल म्यूजियम देखने आती है लेकिन पिछले छह माह में स्थानीय दर्शकों की संख्या बढ़ी है। प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी बताते हैं कि इस म्यूजियम का स्ट्रक्चर अपने आप में दर्शनीय है।
कोट...
अमर महल म्यूजियम को समृद्ध करने के लिए लगातार इसमें कुछ नई पेंटिंग, किताबें और अन्य धरोहरों को जोड़ने का सिलसिला जारी है। हम चाहते हैं कि सभी लोग समृद्ध डोगरा विरासत के बारे में जानें।
-राजकुमार मार्तंड सिंह, हरि-तारा ट्रस्ट।