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Jammu News: माउंट डेल्टा-41 पर पहली बार पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग कर जिम एंड डब्ल्यूएस ने रचा इतिहास
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कारगिल के माउंट डेल्टा-41 पर जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान की टीम।स्रोत – सोशल मी
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- लद्दाख के जंस्कार में 5921 मीटर की ऊंचाई पर पर पैराग्लाइडिंग के जरिए उतरने का किया कारनामा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (जिम एंड डब्ल्यूएस) पहलगाम ने लद्दाख के टंगोल (करगिल) क्षेत्र में स्थित माउंट डेल्टा-41 (5,921 मीटर) पर एक ऐतिहासिक पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। माउंट डेल्टा-41 को माउंट बरमल के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
जिम एंड डब्ल्यूएस के प्रिंसिपल कर्नल हेमचंद्र सिंह के नेतृत्व में 13 सदस्यीय टीम ने भारतीय एडवेंचर के इतिहास में रचा। दल को 11 अगस्त को जिम एंड डब्ल्यूएस के सब-ट्रेनिंग सेंटर सोनमर्ग से टीम लीडर कर्नल हेम चंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दल में टीम लीडर कर्नल हेम चंद्र सिंह, मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अनुपम सिंह, टीम मैनेजर महफूज इलाही हजाम, सदस्य ऑनरेरी कैप्टन सूबेदार मेजर रफीक अहमद मलिक (रिटायर्ड), मनीष मखोलिया और देश के विभिन्न हिस्सों से नौ अन्य सदस्य शामिल थे।
करगिल-लद्दाख क्षेत्र के टंगोल गांव में दो दिनों के सावधानीपूर्वक नियोजित एक्लिमेटाइजेशन (ऊंचाई के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया) के बाद, टीम ने 13 जुलाई को माउंट नून बेस कैंप (जो माउंट डेल्टा-41 का भी बेस कैंप है) में अपना बेस कैंप स्थापित किया। खराब मौसम के पूर्वानुमान और मौसम के लिए सीमित समय (विंडो) के बावजूद, टीम लीडर ने टीम को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया। एक टीम 14 अगस्त को माउंट नून के कैंप-1 (माउंट डेल्टा-41 का समिट कैंप) के लिए रवाना हुई। 15 अगस्त को दोपहर 2:41 बजे (1441 घंटे) चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। दूसरी टीम ने कर्नल हेम चंद्र सिंह के नेतृत्व में 16 अगस्त को सुबह 3 बजे समिट कैंप से चोटी की ओर बढ़ना शुरू किया और सुबह 6:10 बजे माउंट डेल्टा 41 (5930 मीटर) की चोटी पर पहुंच गई।
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भारतीय एडवेंचर स्पोर्ट्स के इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि के तौर पर, कर्नल हेम चंद्र सिंह और श्री मनीष मखोलिया ने माउंट डेल्टा-41 की चोटी से पहली बार पैराग्लाइडिंग करते हुए नीचे उतरने की ऐतिहासिक शुरुआत की और सुरक्षित रूप से टंगोल गांव के रोड हेड कैंप पर उतरे। इस तरह उन्होंने सीधे चोटी से बेस तक हवाई रास्ते से उतरने का कारनामा पूरा किया। तेज ठंडी हवाओं और जीरो से भी कम तापमान जैसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए, बाकी पर्वतारोही भी सफलतापूर्वक चोटी से सीधे रोड हेड कैंप तक पहुंचे।
यह दोहरी कामयाबी 5,921 मीटर ऊंची मुश्किल चोटी पर चढ़ना और उसकी चोटी से सीधे 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रोड हेड कैंप तक पैराग्लाइडिंग करते हुए उतरना, अपनी तरह का पहला अभियान है। यह जिम एंड डब्ल्यूएस में विकसित बेमिसाल प्रोफेशनलिज़्म, साहस और कौशल का सबूत है। यह सफल अभियान न केवल एडवेंचर और राष्ट्रीय गौरव की भावना को दर्शाता है, बल्कि जंस्कार लद्दाख की मुश्किल और ज़्यादातर अनछुई पर्वतमालाओं में भारत की रणनीतिक और खेल संबंधी मौजूदगी को भी मजबूत करता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (जिम एंड डब्ल्यूएस) पहलगाम ने लद्दाख के टंगोल (करगिल) क्षेत्र में स्थित माउंट डेल्टा-41 (5,921 मीटर) पर एक ऐतिहासिक पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। माउंट डेल्टा-41 को माउंट बरमल के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
जिम एंड डब्ल्यूएस के प्रिंसिपल कर्नल हेमचंद्र सिंह के नेतृत्व में 13 सदस्यीय टीम ने भारतीय एडवेंचर के इतिहास में रचा। दल को 11 अगस्त को जिम एंड डब्ल्यूएस के सब-ट्रेनिंग सेंटर सोनमर्ग से टीम लीडर कर्नल हेम चंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दल में टीम लीडर कर्नल हेम चंद्र सिंह, मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अनुपम सिंह, टीम मैनेजर महफूज इलाही हजाम, सदस्य ऑनरेरी कैप्टन सूबेदार मेजर रफीक अहमद मलिक (रिटायर्ड), मनीष मखोलिया और देश के विभिन्न हिस्सों से नौ अन्य सदस्य शामिल थे।
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करगिल-लद्दाख क्षेत्र के टंगोल गांव में दो दिनों के सावधानीपूर्वक नियोजित एक्लिमेटाइजेशन (ऊंचाई के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया) के बाद, टीम ने 13 जुलाई को माउंट नून बेस कैंप (जो माउंट डेल्टा-41 का भी बेस कैंप है) में अपना बेस कैंप स्थापित किया। खराब मौसम के पूर्वानुमान और मौसम के लिए सीमित समय (विंडो) के बावजूद, टीम लीडर ने टीम को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया। एक टीम 14 अगस्त को माउंट नून के कैंप-1 (माउंट डेल्टा-41 का समिट कैंप) के लिए रवाना हुई। 15 अगस्त को दोपहर 2:41 बजे (1441 घंटे) चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। दूसरी टीम ने कर्नल हेम चंद्र सिंह के नेतृत्व में 16 अगस्त को सुबह 3 बजे समिट कैंप से चोटी की ओर बढ़ना शुरू किया और सुबह 6:10 बजे माउंट डेल्टा 41 (5930 मीटर) की चोटी पर पहुंच गई।
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भारतीय एडवेंचर स्पोर्ट्स के इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि के तौर पर, कर्नल हेम चंद्र सिंह और श्री मनीष मखोलिया ने माउंट डेल्टा-41 की चोटी से पहली बार पैराग्लाइडिंग करते हुए नीचे उतरने की ऐतिहासिक शुरुआत की और सुरक्षित रूप से टंगोल गांव के रोड हेड कैंप पर उतरे। इस तरह उन्होंने सीधे चोटी से बेस तक हवाई रास्ते से उतरने का कारनामा पूरा किया। तेज ठंडी हवाओं और जीरो से भी कम तापमान जैसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए, बाकी पर्वतारोही भी सफलतापूर्वक चोटी से सीधे रोड हेड कैंप तक पहुंचे।
यह दोहरी कामयाबी 5,921 मीटर ऊंची मुश्किल चोटी पर चढ़ना और उसकी चोटी से सीधे 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रोड हेड कैंप तक पैराग्लाइडिंग करते हुए उतरना, अपनी तरह का पहला अभियान है। यह जिम एंड डब्ल्यूएस में विकसित बेमिसाल प्रोफेशनलिज़्म, साहस और कौशल का सबूत है। यह सफल अभियान न केवल एडवेंचर और राष्ट्रीय गौरव की भावना को दर्शाता है, बल्कि जंस्कार लद्दाख की मुश्किल और ज़्यादातर अनछुई पर्वतमालाओं में भारत की रणनीतिक और खेल संबंधी मौजूदगी को भी मजबूत करता है।