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Jammu News: 15 साल से नहीं मिली अपनी इमारत, एक कमरे में लगतीं हैं पांच कक्षाएं
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कक्षा एक से पांचवीं तक के 20 को पढ़ाने के लिए तैनात हैं दो शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। एक तरफ जहां सरकार स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। श्रीनगर के डग्गा कदल स्थित गवर्नमेंट मिक्स्ड प्राइमरी स्कूल बीते 15 साल से एक किराए के कमरे में चल रहा है। एक कमरे में कक्षा एक से पांचवीं तक के 20 छात्र-छात्राओं की कक्षाएं लगतीं हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तैनात हैं।
हैरानी की बात यह है कि यह स्कूल साल 2011 से इसी तंगहाली में चल रहा है। वहीं, जिस इमारत में यह कमरा स्थित है, उसके बाकी कमरों में अन्य परिवार और किराएदार रहते हैं। स्कूल में न तो बच्चों और शिक्षकों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था है और न ही खेलकूद के लिए मैदान। कमरे में फर्नीचर और सामान भरा होने के कारण पांचों कक्षाओं के छात्र एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं।
यह स्थिति शिक्षा के स्तर में सुधार के सरकारी दावों और बच्चों को मिल रही असलियत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। मामला सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा निदेशक (कश्मीर) ने कहा कि इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी श्रीनगर को स्कूल का तत्काल दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, बच्चों को जल्द से जल्द किसी ऐसे नजदीकी सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने के प्रयास किए जाएंगे, जहां पर्याप्त क्लासरूम, शौचालय और बेहतर शैक्षणिक माहौल मौजूद हो।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। एक तरफ जहां सरकार स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। श्रीनगर के डग्गा कदल स्थित गवर्नमेंट मिक्स्ड प्राइमरी स्कूल बीते 15 साल से एक किराए के कमरे में चल रहा है। एक कमरे में कक्षा एक से पांचवीं तक के 20 छात्र-छात्राओं की कक्षाएं लगतीं हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तैनात हैं।
हैरानी की बात यह है कि यह स्कूल साल 2011 से इसी तंगहाली में चल रहा है। वहीं, जिस इमारत में यह कमरा स्थित है, उसके बाकी कमरों में अन्य परिवार और किराएदार रहते हैं। स्कूल में न तो बच्चों और शिक्षकों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था है और न ही खेलकूद के लिए मैदान। कमरे में फर्नीचर और सामान भरा होने के कारण पांचों कक्षाओं के छात्र एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं।
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यह स्थिति शिक्षा के स्तर में सुधार के सरकारी दावों और बच्चों को मिल रही असलियत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। मामला सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा निदेशक (कश्मीर) ने कहा कि इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी श्रीनगर को स्कूल का तत्काल दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, बच्चों को जल्द से जल्द किसी ऐसे नजदीकी सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने के प्रयास किए जाएंगे, जहां पर्याप्त क्लासरूम, शौचालय और बेहतर शैक्षणिक माहौल मौजूद हो।
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