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आतंकियों की बदली रणनीति: 33 महीने बाद फिर पुलिसकर्मी की टारगेट किलिंग, हमले में शामिल थे पाकिस्तानी आतंकी!
Thu, 23 Jul 2026 02:17 PM IST
Sharukh Khan
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:17 PM IST
सार
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद सुरक्षाबलों ने करीब दो हजार से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। हमले के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षा एजेंसियां खंगालने में जुटी हैं।
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Jammu Targeted killing
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की शहादत के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। लगभग 33 महीनों के लंबे अंतराल के बाद घाटी में जम्मू-कश्मीर पुलिस के किसी जवान को इस तरह टारगेट कर हमला किया गया है।
घटते जनाधार और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बीच आतंकी संगठनों की हमले की बदली रणनीति नई चुनौती पेश कर रही है। कायरतापूर्ण हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर घाटी में अब तक का सबसे बड़ा ऑलआउट ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
शुरुआती जांच में हमलावर के स्थानीय लश्कर-ए-ताइबा आतंकी होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है इसमें किसी पाकिस्तानी आतंकवादी के शामिल होने के संकेत भी मिल रहे हैं। पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि तफ्तीश तेजी से जारी है।
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घटते जनाधार और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बीच आतंकी संगठनों की हमले की बदली रणनीति नई चुनौती पेश कर रही है। कायरतापूर्ण हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर घाटी में अब तक का सबसे बड़ा ऑलआउट ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
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शुरुआती जांच में हमलावर के स्थानीय लश्कर-ए-ताइबा आतंकी होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है इसमें किसी पाकिस्तानी आतंकवादी के शामिल होने के संकेत भी मिल रहे हैं। पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि तफ्तीश तेजी से जारी है।
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सभी पहलुओं से हमलावर की पहचान की जा रही है। इस बीच प्रतिबंधित लश्कर-ए-ताइबा के मुखौटा संगठन टीआरएफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। वैसे सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हमले में पाकिस्तानी आतंकी के शामिल होने के संकेत
आतंकियों के मददगार नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से करीब दो हजार से अधिक आतंकी सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है। हमले के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षा एजेंसियां खंगालने में जुटी हैं। फुटेज में काले रंग के कपड़े और काली टोपी पहने एक संदिग्ध नजर आ रहा है, जो अपने पास मौजूद एक थैले में असॉल्ट राइफल छिपाकर हमले के तुरंत बाद भागता दिख रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक फुटेज में दिख रहे व्यक्ति की आधिकारिक पहचान या हमले से उसके सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है।
आतंकियों के मददगार नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से करीब दो हजार से अधिक आतंकी सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है। हमले के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षा एजेंसियां खंगालने में जुटी हैं। फुटेज में काले रंग के कपड़े और काली टोपी पहने एक संदिग्ध नजर आ रहा है, जो अपने पास मौजूद एक थैले में असॉल्ट राइफल छिपाकर हमले के तुरंत बाद भागता दिख रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक फुटेज में दिख रहे व्यक्ति की आधिकारिक पहचान या हमले से उसके सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है।
तो बौखलाहट में आतंकियों ने बदली हमले की रणनीति
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार आतंकियों की कार्यप्रणाली में आया यह बदलाव उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-ताइबा के एक प्रमुख आतंकवादी कमांडर जाकिर अहमद गनई उर्फ जाकिर गनई को ढेर कर दिया था, जिससे इस संगठन को बड़ा झटका लगा था।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार आतंकियों की कार्यप्रणाली में आया यह बदलाव उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-ताइबा के एक प्रमुख आतंकवादी कमांडर जाकिर अहमद गनई उर्फ जाकिर गनई को ढेर कर दिया था, जिससे इस संगठन को बड़ा झटका लगा था।
जाकिर गनई के बाद स्थानीय स्तर पर टूटी कमर
जाकिर गनई का एक लंबा आपराधिक बैकग्राउंड रहा है। कुलगाम जिले के मोतलहामा का रहने वाला 26 वर्षीय जाकिर केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ा था और बाद में शटरिंग का काम करने लगा था। 27 सितंबर 2023 को वह काम के सिलसिले में दयालगाम के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजन की शिकायत पर तीन अक्टूबर 2023 को कुलगाम थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
जाकिर गनई का एक लंबा आपराधिक बैकग्राउंड रहा है। कुलगाम जिले के मोतलहामा का रहने वाला 26 वर्षीय जाकिर केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ा था और बाद में शटरिंग का काम करने लगा था। 27 सितंबर 2023 को वह काम के सिलसिले में दयालगाम के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजन की शिकायत पर तीन अक्टूबर 2023 को कुलगाम थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इसके बाद वह टीआरएफ में शामिल हो गया। उसे आतंकी बासित डार और अरबाज अहमद मीर ने आतंक की राह पर चलने के लिए गुमराह किया था, जिसके बाद वह घाटी में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा।
कैडर में फैली इसी हताशा के कारण आतंकी फिर से 'शूट-एंड-स्कूट' यानी गोली मारकर भाग जाने जैसी पुरानी रणनीति पर लौट आए हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भले ही आतंकियों की मोडस ऑपरेंडी बदली हो, लेकिन सुरक्षाबलों की रणनीति भी समय और स्थिति के अनुसार लगातार बदलती रहती है। ऐसे किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
लंबे समय बाद हुई है ऐसी घटना
घाटी में सुरक्षाबलों और विशेषकर स्थानीय पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की घटना लंबे समय बाद हुई है। इससे पहले 31 अक्टूबर 2023 को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के क्रालपोरा में आतंकियों ने हेड कांस्टेबल गुलाम मोहम्मद डार को उनके घर के बाहर गोली मार दी थी। इससे पहले 29 अक्टूबर 2023 को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में क्रिकेट खेल रहे इंस्पेक्टर मसरूर अहमद वानी को एक आतंकवादी ने बेहद करीब से गोली मारी थी, जिनका बाद में दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। वहीं सात मई 2022 को श्रीनगर के जूनीमर क्षेत्र में ड्यूटी पर जा रहे कांस्टेबल गुलाम हसन डार पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी थी।
घाटी में सुरक्षाबलों और विशेषकर स्थानीय पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की घटना लंबे समय बाद हुई है। इससे पहले 31 अक्टूबर 2023 को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के क्रालपोरा में आतंकियों ने हेड कांस्टेबल गुलाम मोहम्मद डार को उनके घर के बाहर गोली मार दी थी। इससे पहले 29 अक्टूबर 2023 को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में क्रिकेट खेल रहे इंस्पेक्टर मसरूर अहमद वानी को एक आतंकवादी ने बेहद करीब से गोली मारी थी, जिनका बाद में दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। वहीं सात मई 2022 को श्रीनगर के जूनीमर क्षेत्र में ड्यूटी पर जा रहे कांस्टेबल गुलाम हसन डार पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी थी।
श्रीनगर से पकड़े गए 700 संदिग्ध
अनंतनाग हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने श्रीनगर, बडगाम, शोपियां, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल और सोपोर में एक साथ बड़े पैमाने पर छापामारा और सत्यापन अभियान भी चलाया। इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा 700 संदिग्धों को श्रीनगर जिले से हिरासत में लिया गया। इसके अलावा बडगाम और शोपियां जिलों से 200-200, बारामुला से 178, बांदीपोरा से 130 से अधिक, गांदरबल से 100 से अधिक और सोपोर पुलिस ने 70 से अधिक संदिग्धों को पूछताछ के लिए पकड़ा है। देर शाम तक 2000 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ चल रही थी। अधिकारियों के अनुसार त्वरित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को रसद, वित्तीय सहायता, संचार माध्यम और पनाह देने वाले पूरे इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करना है।
अनंतनाग हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने श्रीनगर, बडगाम, शोपियां, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल और सोपोर में एक साथ बड़े पैमाने पर छापामारा और सत्यापन अभियान भी चलाया। इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा 700 संदिग्धों को श्रीनगर जिले से हिरासत में लिया गया। इसके अलावा बडगाम और शोपियां जिलों से 200-200, बारामुला से 178, बांदीपोरा से 130 से अधिक, गांदरबल से 100 से अधिक और सोपोर पुलिस ने 70 से अधिक संदिग्धों को पूछताछ के लिए पकड़ा है। देर शाम तक 2000 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ चल रही थी। अधिकारियों के अनुसार त्वरित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को रसद, वित्तीय सहायता, संचार माध्यम और पनाह देने वाले पूरे इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करना है।
जनता का मनोबल नहीं गिरा सकते आतंकी : सीएम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवादियों के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य न तो जनता का मनोबल गिरा सकते हैं और न ही वे अपने नापाक इरादों में कभी सफल हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवादियों के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य न तो जनता का मनोबल गिरा सकते हैं और न ही वे अपने नापाक इरादों में कभी सफल हो सकते हैं।