'टारगेट किलिंग' का पाकिस्तानी मास्टरमाइंड बेनकाब: कश्मीर में संभाली थी आतंकी कमान, लश्कर कमांडर पर वारंट जारी
लश्कर-ए-ताइबा के कमांडर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा पर कश्मीर में टारगेट किलिंग के निर्देश देने और आतंकियों को वित्तीय व लॉजिस्टिक मदद पहुंचाने का आरोप है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लश्कर-ए-ताइबा के कमांडर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा ने कश्मीर में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादियों को सुरक्षाकर्मियों और बेगुनाह नागरिकों की टारगेट किलिंग करने के निर्देश दिए थे। एनआईए कोर्ट ने अब उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। एनआईए के रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद याकूब ने अपने कई छद्म नाम रखे थे। उसे अबू सुमामा, सुमामा इलियास और वारिस अली के नाम से भी जाना जाता है। वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित चट्टा बख्तावर इलाके में लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर है। उस पर कश्मीर में सक्रिय लश्कर के आतंकवादियों को वित्तीय मदद देने और आतंकी गतिविधियां संचालित करने का आरोप है।
जम्मू के स्पेशल जज (एनआईए) प्रेम सागर ने एनआईए के मुख्य जांच अधिकारी, डिप्टी एसपी अमित शर्मा की उस अर्जी को मंजूर कर लिया है, जिसमें बीएनएसएस की धारा 75 के तहत इस फरार आतंकी कमांडर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। यह कार्रवाई एनआईए बनाम मोहम्मद नकीब भट और अन्य मामले में की गई है। यह मामला तब शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के पांडच स्थित गूजर टेंट के पास नाका चेकिंग के दौरान एक स्थानीय रजिस्ट्रेशन वाली मोटरसाइकिल को रोका। मोटरसाइकिल सवार की पहचान फजल हक कॉलोनी (बटपोरा, श्रीनगर) निवासी मोहम्मद नकीब भट के रूप में हुई।
तलाशी के दौरान उसके पास से एक चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूस बरामद किए गए। वह इन हथियारों और गोला-बारूद को अपने पास रखने की कोई वैध वजह नहीं बता पाया। इसके बाद पुलिस ने जकूरा पुलिस स्टेशन में यूएपीए की धारा 23, आर्म्स एक्ट की धारा 7/25 और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट की धारा 4 के तहत एफआईआर दर्ज की। एनआईए के आधिकारिक केस रिकॉर्ड में भी उसकी पहचान जकूरा पुलिस नाका इंटरसेप्शन से हुई। नकीब भट के साथ ही आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा पर आतंकवादियों को आश्रय और भोजन सहित लॉजिस्टिक मदद देने का आरोप है। इसके बाद जांच में पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा और उस्मान उर्फ खुबैब को गिरफ्तार किया गया जिन्हें अधिकारियों ने लंबे समय से सक्रिय विदेशी आतंकवादी बताया।
हथियारों की बरामदगी से आगे बढ़ी जांच
एनआईए ने कोर्ट को बताया कि जांच में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट्ट की ओर से हुए खुलासों से पाकिस्तान के हैंडलर अबू सुमामा की भूमिका जांच के दायरे में आई। जांच में सामने आया कि उसने गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी को कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों और आम लोगों की टारगेट किलिंग का निर्देश दिया था।
आतंकियों की लिस्ट में 74वें नंबर पर याकूब
अभियोजन पक्ष ने स्पेशल कोर्ट के सामने यूएपीए एक्ट की धारा 35 के तहत नामित अलग-अलग आतंकवादियों की सरकार की लिस्ट पेश की। बताया गया कि इसमें याकूब चौथे शेड्यूल में सीरियल नंबर 74 पर है। जुलाई में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा को आतंकी घोषित किया था। इस मामले की जड़ें इस साल शुरुआत में शुरू टेरर-मॉड्यूल जांच से जुड़ी हैं।
जम्मू-कश्मीर के साथ ही राजस्थान व हरियाणा में 19 जगहों पर तलाशी
जांचकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और हरियाणा में 19 जगहों पर भी तलाशी ली। अधिकारियों ने एके-सीरीज राइफल, पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद होने की सूचना दी। इसी पृष्ठभूमि में एनआईए ने अबू सुमामा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए जम्मू स्पेशल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।