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एक साल पहलगाम: गम, गुस्सा और जज्बा, खौफ से उबरकर लौटती रौनक; पर्यटन बना भरोसे का आधार; सैलानियों ने कही ये बात
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:39 AM IST
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सार
पहलगाम ने दर्द भी देखा और हौसला भी। आतंकी हमले के बाद सन्नाटा जरूर छाया लेकिन डर स्थायी नहीं रहा। एक साल में तस्वीर बदली है। सुरक्षा मजबूत हुई है। व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुई हैं। सबसे बड़ा बदलाव है-लौटता भरोसा। पर्यटक फिर से पहलगाम आ रहे हैं। घाटी में फिर रौनक दिख रही है। स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान है। घोड़े वाले, गाइड, दुकानदार फिर सक्रिय हैं। पर्यटन से जुड़ा जीवन फिर पटरी पर है। संदेश साफ है-पहलगाम झुका नहीं है। यह और मजबूत होकर उभरा है। जो कभी खौफ की जगह थी, वही अब उम्मीद का प्रतीक बन रही है। पर्यटन ही इसका सबसे बड़ा जवाब है। पेश है रिपोर्ट...
पहलगाम में घुड़सवारी का आनंद लेते पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक साल पहले हुए आतंकी हमले के बाद जहां कश्मीर की फिजाओं में डर और अनिश्चितता का माहौल था, वहीं अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं। पर्यटकों की वापसी इसका सबसे बड़ा संकेत है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहलगाम पहुंच रहे सैलानी न सिर्फ यहां की वादियों का आनंद ले रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों के समर्थन में खुलकर अपनी बात भी रख रहे हैं।
पर्यटकों का कहना है कि कश्मीर की खूबसूरती जितनी प्रसिद्ध है, उससे कहीं ज्यादा दिल जीतने वाली यहां के लोगों की मेहमाननवाजी है। उनका मानना है कि ऐसे समय में कश्मीर आना केवल एक यात्रा नहीं बल्कि यहां के लोगों के प्रति समर्थन का संदेश भी है, क्योंकि घाटी के अधिकांश परिवारों की आजीविका पर्यटन पर ही निर्भर करती है।
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देश के अलग-अलग हिस्सों से पहलगाम पहुंच रहे सैलानी न सिर्फ यहां की वादियों का आनंद ले रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों के समर्थन में खुलकर अपनी बात भी रख रहे हैं।
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पर्यटकों का कहना है कि कश्मीर की खूबसूरती जितनी प्रसिद्ध है, उससे कहीं ज्यादा दिल जीतने वाली यहां के लोगों की मेहमाननवाजी है। उनका मानना है कि ऐसे समय में कश्मीर आना केवल एक यात्रा नहीं बल्कि यहां के लोगों के प्रति समर्थन का संदेश भी है, क्योंकि घाटी के अधिकांश परिवारों की आजीविका पर्यटन पर ही निर्भर करती है।
पर्यटक बढ़ने से ही आएगा बदलाव
गुजरात से आई नीलम भी कश्मीर की वादियों और यहां के लोगों की सराहना करते नहीं थकतीं। उनका कहना है कि पहलगाम हमले के बाद स्थानीय कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। यहां के ज्यादातर लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो उनका जीवन प्रभावित होगा।
गुजरात से आई नीलम भी कश्मीर की वादियों और यहां के लोगों की सराहना करते नहीं थकतीं। उनका कहना है कि पहलगाम हमले के बाद स्थानीय कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। यहां के ज्यादातर लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो उनका जीवन प्रभावित होगा।
ऐसे में देशभर के लोगों को आगे आकर कश्मीर का रुख करना चाहिए। नीलम का मानना है कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या ही घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है। जितने अधिक लोग यहां आएंगे, उतनी तेजी से यहां का पर्यटन उद्योग पटरी पर लौटेगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।
स्थानीय कारोबारियों के लिए भी पर्यटकों की यह वापसी उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। होटलों, घोड़ा संचालकों, टैक्सी चालकों और दुकानदारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर सैलानियों पर निर्भर है। पिछले साल की घटनाओं के बाद इनकी आय पर गहरा असर पड़ा था लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सुधरने लगी है।
पर्यटन बना भरोसे का आधार
हरियाणा से अपने परिवार के साथ पहलगाम पहुंचे दीपक कुमार कहते हैं कि हालात के डर से कश्मीर आना छोड़ देना यहां के लोगों के साथ अन्याय होगा। देश के किसी भी हिस्से में घटनाएं हो सकती हैं लेकिन इसके लिए पूरे क्षेत्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हरियाणा से अपने परिवार के साथ पहलगाम पहुंचे दीपक कुमार कहते हैं कि हालात के डर से कश्मीर आना छोड़ देना यहां के लोगों के साथ अन्याय होगा। देश के किसी भी हिस्से में घटनाएं हो सकती हैं लेकिन इसके लिए पूरे क्षेत्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
वे कहते हैं, कश्मीर के लोग बेहद सहयोगी और मिलनसार हैं। दीपक बताते हैं कि वह पिछले तीन वर्षों से लगातार कश्मीर आ रहे हैं और हर बार उनका अनुभव सकारात्मक रहा है। परिवार के कुछ सदस्यों के मन में डर जरूर था लेकिन मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि यहां हालात सामान्य हैं।
बायसरन समेत कई पर्यटन स्थलों पर फैसला जल्द
बंद चल रहे पर्यटन स्थल बायसरन, बांदीपोरा में गुरेज वैली और अथवातू के साथ ही कुपवाड़ा की बंगस घाटी के खुलने पर जल्द फैसला होने के आसार हैं।
बंद चल रहे पर्यटन स्थल बायसरन, बांदीपोरा में गुरेज वैली और अथवातू के साथ ही कुपवाड़ा की बंगस घाटी के खुलने पर जल्द फैसला होने के आसार हैं।

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