झारखंड: प्रदेश में कमजोर पड़ा नक्सलवाद का नेटवर्क, 103 गिरफ्तार व 46 नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक; डीजीपी का दावा
झारखंड पुलिस ने जनवरी से 5 अगस्त तक 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया, जबकि 46 ने आत्मसमर्पण किया और 22 नक्सली पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर यह जानकारी दी। पढ़ें पूरी खबर
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झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने शनिवार को कहा कि इस साल जनवरी से अब तक राज्य में 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 46 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और पुलिस मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे गए हैं।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि झारखंड पुलिस ने राज्य में नक्सलवाद की चुनौती को काफी हद तक कमजोर किया है।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में पुलिस ने 98 हथियार, 7,470 कारतूस, 11 किलोग्राम विस्फोटक, तीन आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) और 6 लाख रुपये की रंगदारी की रकम भी बरामद की है। डीजीपी ने कहा, "झारखंड पुलिस ने अदम्य साहस, वीरता, पेशेवर रणनीति और लगातार चलाए गए अभियानों के दम पर राज्य में नक्सलवाद की चुनौती को काफी कमजोर किया है।"
उन्होंने बताया कि जनवरी से पांच अगस्त तक कुल 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 46 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 22 नक्सली पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए।
एक करोड़ का इनामी नक्सली गिरफ्तार
डीजीपी ने बताया कि शीर्ष माओवादी नेताओं में सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया है। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वहीं, प्रतिबंधित संगठन के केंद्रीय समिति सदस्य पतीराम मांझी को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया।
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संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
डीजीपी ने कहा कि पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जनवरी से जुलाई के बीच आपराधिक गिरोहों से जुड़े 193 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से 63 हथियार बरामद किए गए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की रोकथाम और मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए भी पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।