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Jharkhand: धनबाद में अवैध कोयला कारोबार पर ईडी का शिकंजा, 160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज; नेटवर्क की जांच तेज
Sat, 01 Aug 2026 01:31 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:31 PM IST
सार
धनबाद में कथित अवैध कोयला कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई तेज हो गई है। एजेंसी ने 28 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर 1.02 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं और 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज किया है। मामले में वित्तीय लेनदेन, जीएसटी चोरी और फर्जी दस्तावेजों की जांच जारी है।
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ईडी छापेमारी की फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
झारखंड के कोयलांचल धनबाद में कथित अवैध कोयला कारोबार और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पिछले कई दिनों से कोयला कारोबारी एल.बी. सिंह और उनके सहयोगियों से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसी महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।
ईडी ने 28 से अधिक ठिकानों पर की थी छापेमारी
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने 28 जुलाई को धनबाद में एक साथ 28 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद भी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। जांच के दौरान करीब 1.02 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। ईडी ने एल.बी. सिंह से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को भी फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का मानना है कि इन निवेशों के स्रोतों की विस्तृत जांच आवश्यक है।
इन लोगों पर हुई कार्रवाई
जिन लोगों से जुड़े परिसरों पर ईडी की कार्रवाई हुई है, उनमें एल.बी. सिंह, अनिल गोयल, हरेंद्र चौहान, अनूप चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल और रोहित यादव के नाम सामने आए हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने अभी तक किसी भी व्यक्ति को इस मामले में दोषी घोषित नहीं किया है और जांच जारी है।
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जीएसटी चोरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोयले कारोबार की आशंका
जांच के दौरान जीएसटी चोरी और कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोयले के कारोबार की आशंका भी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि कुछ कारोबारी पश्चिम बंगाल से केवल कोयले से संबंधित दस्तावेज (पेपर) खरीदते थे, जबकि वास्तविक कोयला धनबाद और आसपास के क्षेत्रों से कथित रूप से अवैध तरीके से जुटाकर हार्ड कोक फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यदि पश्चिम बंगाल से वास्तविक कोयले की आपूर्ति नहीं हुई, तो उन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
कैसे रेलवे और ट्रक के माध्यम से पहुंचा कोयला?
अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच का विषय है कि कथित तौर पर अवैध कोयला रेलवे रैक या ट्रकों के माध्यम से कैसे पहुंचाया गया और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच का फोकस कोयला चोरी, फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित संबंधों पर है।
ये भी पढ़ें- 'मां, मैं घबरा रहा हूं' और टूट गया संपर्क! ननिहाल जाने निकला बेटा नहीं लौटा; ट्रेन से गिरकर हुई मौत
जानकारों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क की शिकायत पहले पुलिस मुख्यालय तक भी पहुंची थी। बताया जाता है कि तत्कालीन बोकारो डीआईजी को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और प्रारंभिक जांच भी हुई थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब ईडी की कार्रवाई के बाद पूरे मामले की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी ने आगे भी महत्वपूर्ण खुलासे होने के संकेत दिए हैं।
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ईडी ने 28 से अधिक ठिकानों पर की थी छापेमारी
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने 28 जुलाई को धनबाद में एक साथ 28 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद भी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। जांच के दौरान करीब 1.02 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। ईडी ने एल.बी. सिंह से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को भी फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का मानना है कि इन निवेशों के स्रोतों की विस्तृत जांच आवश्यक है।
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इन लोगों पर हुई कार्रवाई
जिन लोगों से जुड़े परिसरों पर ईडी की कार्रवाई हुई है, उनमें एल.बी. सिंह, अनिल गोयल, हरेंद्र चौहान, अनूप चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल और रोहित यादव के नाम सामने आए हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने अभी तक किसी भी व्यक्ति को इस मामले में दोषी घोषित नहीं किया है और जांच जारी है।
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जीएसटी चोरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोयले कारोबार की आशंका
जांच के दौरान जीएसटी चोरी और कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोयले के कारोबार की आशंका भी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि कुछ कारोबारी पश्चिम बंगाल से केवल कोयले से संबंधित दस्तावेज (पेपर) खरीदते थे, जबकि वास्तविक कोयला धनबाद और आसपास के क्षेत्रों से कथित रूप से अवैध तरीके से जुटाकर हार्ड कोक फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यदि पश्चिम बंगाल से वास्तविक कोयले की आपूर्ति नहीं हुई, तो उन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
कैसे रेलवे और ट्रक के माध्यम से पहुंचा कोयला?
अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच का विषय है कि कथित तौर पर अवैध कोयला रेलवे रैक या ट्रकों के माध्यम से कैसे पहुंचाया गया और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच का फोकस कोयला चोरी, फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित संबंधों पर है।
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जानकारों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क की शिकायत पहले पुलिस मुख्यालय तक भी पहुंची थी। बताया जाता है कि तत्कालीन बोकारो डीआईजी को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और प्रारंभिक जांच भी हुई थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब ईडी की कार्रवाई के बाद पूरे मामले की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी ने आगे भी महत्वपूर्ण खुलासे होने के संकेत दिए हैं।