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Jharkhand: रांची का महावीर मंदिर, 250 साल पुराना आस्था का केंद्र, रामनवमी पर उमड़ता है भक्तों का सैलाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 08:28 PM IST
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सार
रांची के अपर बाजार स्थित महावीर मंदिर करीब 250 साल पुराना है और शहर की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। मान्यता है कि यहीं से रामनवमी की शोभायात्रा की शुरुआत हुई थी। हर साल रामनवमी पर यहां भव्य आयोजन होते हैं, जिसमें झांकियां, शोभायात्रा और हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिलती है।
महावीर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रांची के अपर बाजार स्थित महावीर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है। करीब 250 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इसी मंदिर से रामनवमी की शोभायात्रा की शुरुआत हुई थी। इसी कारण इस इलाके का नाम महावीर चौक पड़ा।
मनोकामना मंदिर के रूप में प्रसिद्ध
यह मंदिर “मनोकामना मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। इसी वजह से पूरे साल यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। रामनवमी के समय यहां का दृश्य और भी खास हो जाता है। झारखंड ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
अष्टमी पर निकलती हैं भव्य झांकियां
रामनवमी के मौके पर मंदिर में खास आयोजन किए जाते हैं। अष्टमी के दिन भव्य झांकियां निकाली जाती हैं और शहर के अलग-अलग अखाड़ों की शोभायात्राएं इसी मंदिर परिसर में आकर एकत्रित होती हैं। यहां झांकियों का निरीक्षण किया जाता है और समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ झांकी को पुरस्कृत किया जाता है। पहले स्थान पर आने वाली झांकी को 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाता है।
दोपहर से रात तक चलती है शोभायात्रा
रामनवमी के दिन शोभायात्रा दोपहर करीब 2 बजे शुरू होती है और देर रात लगभग 2 बजे तक चलती है। इस दौरान श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में और अस्त्र-शस्त्र के साथ भक्ति और उत्साह के साथ इसमें शामिल होते हैं। यह शोभायात्रा रांची की धार्मिक आस्था, परंपरा और एकता का जीवंत उदाहरण पेश करती है।
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मनोकामना मंदिर के रूप में प्रसिद्ध
यह मंदिर “मनोकामना मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। इसी वजह से पूरे साल यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। रामनवमी के समय यहां का दृश्य और भी खास हो जाता है। झारखंड ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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अष्टमी पर निकलती हैं भव्य झांकियां
रामनवमी के मौके पर मंदिर में खास आयोजन किए जाते हैं। अष्टमी के दिन भव्य झांकियां निकाली जाती हैं और शहर के अलग-अलग अखाड़ों की शोभायात्राएं इसी मंदिर परिसर में आकर एकत्रित होती हैं। यहां झांकियों का निरीक्षण किया जाता है और समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ झांकी को पुरस्कृत किया जाता है। पहले स्थान पर आने वाली झांकी को 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाता है।
दोपहर से रात तक चलती है शोभायात्रा
रामनवमी के दिन शोभायात्रा दोपहर करीब 2 बजे शुरू होती है और देर रात लगभग 2 बजे तक चलती है। इस दौरान श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में और अस्त्र-शस्त्र के साथ भक्ति और उत्साह के साथ इसमें शामिल होते हैं। यह शोभायात्रा रांची की धार्मिक आस्था, परंपरा और एकता का जीवंत उदाहरण पेश करती है।