Jharkhand News: रांची में कुड़मी समाज की महारैली, ST दर्जा और भाषा मान्यता की मांग तेज
प्रभात तारा मैदान में बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले विशाल कुड़मी अधिकार महारैली आयोजित की गई। रैली में कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान देने की मांग उठी।
विस्तार
राजधानी रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में रविवार को बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले विशाल कुड़मी अधिकार महारैली आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने की। संचालन राजेंद्र महतो और सखीचंद महतो ने संयुक्त रूप से किया।
महारैली में कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
कई विधायक और सामाजिक हस्तियां हुईं शामिल
रैली में विधायक नागेंद्र महतो, शिक्षाविद डॉ. अमर कुमार चौधरी, पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो, पूर्व जैक अध्यक्ष डॉ. अनिल महतो, उड़ीसा कुड़मी सेना के अध्यक्ष जामुनी मोहंता और युवा समाजसेवी देवेंद्र नाथ महतो सहित कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं।
बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। छऊ, झुमर और पैका नृत्य के जरिए समाज की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत की गई। आयोजकों के अनुसार रैली में लाखों लोगों की भागीदारी रही।
1950 में सूची से बाहर करने का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए शीतल ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज को आजादी के बाद से ही संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1950 में साजिश के तहत समाज को जनजातीय सूची से बाहर कर पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि अब समाज अपने अधिकार लेकर रहेगा।
मांगें नहीं मानी गईं तो आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे झारखंड में आर्थिक नाकेबंदी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शिक्षाविद डॉ. अमर कुमार चौधरी ने संविधान के अनुच्छेद 342 का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक आधार पर कुड़मी समाज अनुसूचित जनजाति में शामिल होने की सभी अर्हताएं पूरी करता है। उन्होंने लोगों से आगामी जनगणना में जाति ‘कुड़मी’ और भाषा ‘कुड़माली’ दर्ज कराने का आह्वान किया।
शिक्षा और एकजुटता पर जोर
विधायक नागेंद्र महतो ने कहा कि समाज में शिक्षा और राजनीतिक एकजुटता की कमी पिछड़ेपन का कारण है। महिला अध्यक्ष सुषमा महतो ने पेसा कानून में पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को शामिल करने की मांग उठाई।
विकास से जुड़े कई प्रस्ताव पारित
महारैली के अंत में समाज के विकास को लेकर कई प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना, युवाओं को कृषि और स्वरोजगार की ओर बढ़ाना, नशा और दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना और जमीन की अनावश्यक बिक्री रोकने का संकल्प शामिल है।
कार्यक्रम में समाज के कई सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।