UPSC CSE Analysis: जीएस और सी-सैट के सवालों ने उलझाया, छात्रों के चेहरे पर दिखे तनाव और राहत दोनों के भाव
UPSC CSE Prelims 2026: यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में सामान्य अध्ययन और सी-सैट के सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझा दिया। कई प्रश्न घुमावदार और विकल्प भ्रमित करने वाले रहे। परीक्षा के बाद छात्रों ने पेपर को मॉडरेट से कठिन बताया, जबकि सी-सैट में समय प्रबंधन बड़ी चुनौती बना।
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UPSC CSE Prelims Exam Analysis: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में इस बार सामान्य अध्ययन और सी-सैट के प्रश्नों ने अभ्यर्थियों को काफी उलझन में डाले रखा। परीक्षा देकर बाहर निकले अधिकांश उम्मीदवारों ने पेपर को लंबा, पेचीदा और घुमावदार बताया। कई छात्रों का कहना था कि प्रश्नों के विकल्प इतने भ्रमित करने वाले थे कि सही उत्तर चुनना चुनौती बन गया।
शाहजहां रोड स्थित यूपीएससी भवन समेत विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। सामान्य अध्ययन (जीएस पेपर-1) में कई ऐसे प्रश्न पूछे गए, जिनके दो या तीन विकल्प सही जैसे प्रतीत हो रहे थे। ऐसे में अभ्यर्थियों को उत्तर तय करने में काफी समय लगा।
निगेटिव मार्किंग के डर से अधिकांश परीक्षार्थियों ने केवल उन्हीं सवालों का जवाब दिया, जिन पर उन्हें पूरा भरोसा था। छात्रों के मुताबिक, इस बार इतिहास को छोड़कर अधिकतर प्रश्न मौजूदा घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से जोड़कर पूछे गए थे। ऐसे में करंट अफेयर्स से नियमित रूप से अपडेट नहीं रहने वाले उम्मीदवारों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि इस बार करंट अफेयर्स का वेटेज अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया, जबकि राजनीति विज्ञान, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था जैसे स्टैटिक विषयों से अधिक प्रश्न पूछे गए। दूसरी पाली में आयोजित सी-सैट पेपर भी उम्मीदवारों के लिए आसान नहीं रहा। परीक्षार्थियों के अनुसार, इसमें समझ आधारित और कथन-कारण वाले सवालों की संख्या ज्यादा थी, जिन्हें काफी घुमाकर पूछा गया था।
छात्रों के चेहरों पर दिखा तनाव
परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलने वाले अधिकांश छात्रों के चेहरे पर तनाव और राहत दोनों के भाव दिखाई दिए। कई उम्मीदवारों ने पेपर को पिछले वर्ष की तुलना में मॉडरेट से कठिन स्तर का बताया।
अभ्यर्थियों के अनुसार, साइंस और आर्ट एंड कल्चर के कुछ प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे, लेकिन उनके विकल्प इतने भ्रमित करने वाले थे कि सही उत्तर चुनना मुश्किल हो गया। छात्रा ममता ने कहा कि नियमित रूप से करंट अफेयर्स पढ़ने वाले छात्रों को पेपर संतुलित लगा, लेकिन केवल रटकर तैयारी करने वालों के लिए यह परीक्षा कठिन साबित हुई। अब अभ्यर्थियों की नजर संभावित कटऑफ और आगे की चयन प्रक्रिया पर टिकी है।
राजस्थान से परीक्षा देने आए दिव्यांग अभ्यर्थी नरेश ने बताया कि सी-सैट में समझ आधारित प्रश्नों की संख्या ज्यादा थी और कई सवालों के विकल्प इतने भ्रमित करने वाले थे कि सही जवाब तय करने में काफी समय लग रहा था। हालांकि उन्होंने प्रश्नों के स्तर को संतुलित बताया।
वहीं, अभ्यर्थी प्रीतम ने कहा कि सामान्य ज्ञान का पेपर औसत था, लेकिन सी-सैट कठिन आया। उन्होंने कहा कि रोजाना अखबार पढ़ने और टीवी चैनलों पर समाचार देखने वाले छात्रों को इसका फायदा मिला। दो साल से तैयारी कर रहे रंजीत सिंह ने बताया कि उनका सामान्य अध्ययन का पेपर अच्छा गया, लेकिन सी-सैट के कुछ सवालों ने काफी उलझन पैदा की।
छात्रों की प्रतिक्रियाएं
रिशु ने कहा, “सी-सैट में समझ और कथन आधारित सवाल ज्यादा थे। कई प्रश्नों को घुमाकर पूछा गया था, जिससे सही विकल्प चुनने में समय लग रहा था।”
पूर्वा के अनुसार, “सामान्य अध्ययन का पेपर अच्छा हुआ, लेकिन दूसरी पाली के कई सवाल काफी उलझाने वाले थे। समय प्रबंधन करना मुश्किल हो गया।”
अमृत कौर ने कहा, “सामान्य अध्ययन का पेपर औसत रहा, लेकिन सी-सैट और विज्ञान से जुड़े सवाल कठिन थे। नियमित करंट अफेयर्स पढ़ने वालों को फायदा मिला।”
पूनम ने कहा, “जो छात्र रोजाना करंट अफेयर्स पढ़ते हैं, उन्हें पेपर संतुलित लगा। लेकिन केवल रटकर तैयारी करने वालों के लिए यह परीक्षा कठिन रही।”
5.49 लाख उम्मीदवार हुए शामिल
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में इस बार करीब 5.49 लाख उम्मीदवार शामिल हुए। आयोग ने पहली बार परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का रीयल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) लागू किया। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना और परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना था।
आयोग के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से विकसित यह स्वदेशी प्रणाली सभी केंद्रों पर सफल रही। आयोग ने इसे परीक्षा प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस वर्ष सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा देश के 83 शहरों के 2,072 केंद्रों पर आयोजित की गई।