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AI & Health: दिल की बीमारियों को पहले ही भांप लेगा एआई, 5 साल पहले दे देगा हार्ट फेलियर का अलर्ट

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 14 Apr 2026 12:59 PM IST
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सार

हृदय रोगों से हर साल लगभग 20.5 मिलियन (दो करोड़ से अधिक) लोगों की मौत हो जाती है।शोधकर्ताओं ने बताया कि एआई टूल की मदद से करीब पांच साल पहले ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी को हार्ट फेलियर होगा या नहीं?

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एआई से पता चलेगा हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार

दिल की बीमारियां दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाती जा रही हैं। ये मौत का प्रमुख कारण भी हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, हृदय रोगों से हर साल लगभग 20.5 मिलियन (दो करोड़ से अधिक) लोगों की मौत हो जाती है। यह दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जिनमें से 80% से ज्यादा मौतें हार्ट अटैक के कारण होती हैं।

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लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी के चलते अब कम उम्र में भी लोग दिल की बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं का खतरा 20 से कम आयु वालों में भी देखा जा रहा है। 
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विशेषज्ञ कहते हैं, कई बार हृदय रोग बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होते रहते हैं और मरीज को तब पता चलता है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। यही वजह है कि मेडिकल साइंस अब इलाज से ज्यादा अर्ली डिटेक्शन यानी समय रहते पहचान पर फोकस कर रही है।

हृदय की गंभीर समस्याओं का जल्दी पता लगाने की दिशा में वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि एआई टूल की मदद से करीब पांच साल पहले ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी को हार्ट फेलियर होगा या नहीं?

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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Amarujala.com

एआई बताएगा हार्ट को कितना खतरा

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि अब रूटीन हार्ट स्कैन टेस्ट और एआई मिलकर कई साल पहले ही आपमें हार्ट फेलियर के खतरे का पता लगा सकते हैं। इसका मतलब है कि डॉक्टर जल्द ही उन मरीजों की पहचान कर पाएंगे जिन्हें इस जानलेवा बीमारी का ज्यादा खतरा है। इससे समय रहते इलाज भी शुरू हो सकेगा, जिससे मरीज की जान बचाना भी आसान हो सकेगा।

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की क्लिनिकल डायरेक्टर, डॉ. सोन्या बाबू-नारायण कहती हैं, हार्ट फेलियर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। कभी-कभी तो ये तब सामने आता है जब मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।

गौरतलब है कि हार्ट फेलियर और इससे संबंधित मौत के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2040 तक इसके केस दोगुना तक हो सकते हैं।

(ये भी पढ़िए- अब AI बताएगा अगले 20 साल में कैंसर होगा या नहीं?)

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दिल की बीमारियों का पहले से चल सकेगा पता - फोटो : Adobe Stock

अध्ययन में क्या पता चला?

जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके कार्डियक सीटी स्कैन का विश्लेषण किया। 
 

  • इसमें दिल के आस-पास की चर्बी में होने वाले उन छोटे-छोटे बदलावों पर खास ध्यान दिया, जो हृदय को शुरुआती नुकसान पहुंचने का संकेत देते हैं।
  • डॉक्टर कहते हैं, ये चेतावनी भरे संकेत आम जांच में दिखाई नहीं देते, लेकिन अब एआई दिल की मांसपेशियों में होने वाली सूजन का पता लगा सकता है जो हार्ट फेलियर का एक मुख्य कारण है।


अध्ययन में क्या पता चला?

एआई टूल कितने अच्छे तरीक से हार्ट फेलियर के खतरे का अंदाजा लगा सकता है, इसे समझने के लिए सिस्टम को इंग्लैंड के 72,000 मरीजों के डेटा पर ट्रेन्ड किया गया था।
 

  • इन लोगों को साल 2007 से 2022 के बीच कार्डियक सीटी स्कैन हुआ था। 
  • इसमें पाया गया कि जिन लोगों को हाई रिस्क तौर पर मार्क किया गया था, उनमें हार्ट फेलियर होने का खतरा 20 गुना अधिक थी। 
  • हाई-रिस्क वाले मरीजों में पांच साल के भीतर हार्ट फेलियर होने की आशंका चार में से एक को थी।
  • ऐसे में पाया गया कि यह तरीका 86 प्रतिशत सटीकता के साथ नतीजों का अनुमान लगाता है।

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हार्ट फेलियर से मौत का कम होगा खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

समस्या का जल्दी पता चलने से टल सकेगा जानलेवा खतरा 

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने कहा कि पहले ऐसा कोई भरोसेमंद तरीका नहीं था जिससे यह पता चल सके कि किसे आगे चलकर हार्ट फेलियर होगा।

डॉ. बाबू-नारायण कहते हैं,  हार्ट फेलियर का जल्दी पता चलना बहुत जरूरी है। यह स्टडी बताती है कि दिल की बीमारियों की देखभाल में सुधार लाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना असरदार हो सकता है।

अब विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस तरीके को पूरे यूके नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस)  में लागू किया जा सकता है। हमारा तरीका हर मरीज के लिए रिस्क स्कोर तैयार कर सकता है। इससे न सिर्फ जल्दी इलाज होने की संभावना बढ़ेगी साथ ही मरीज खुद भी अपने खतरे को समझकर बचाव के लिए जरूरी उपाय कर पाएगा।
 
इससे पहले हार्ट अटैक के खतरे का पहले से पता लगाने में भी एआई की मदद ली गई थी, ये रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





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स्रोत:
New AI tool can predict heart failure at least five years before it develops



अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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