कोरोना की वैक्सीन बनाने का काम लगातार जारी है। रूस का कहना है कि वह इसी महीने से वैक्सीन की खुराक देने की शुरुआत करेगा। वहां सबसे पहले वैक्सीन शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाएगी। उसके बाद अक्तूबर से सभी नागरिकों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। वैक्सीन बनाने की रेस में रूस के अलावा भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन भी हैं। हालांकि इनकी वैक्सीन बाजार में कब तक आएगी, इस बारे में अभी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि वह इस साल के अंत तक या अगले साल वैक्सीन लॉन्च कर सकते हैं। ऐसे में जब तक इस बीमारी के लिए कोई कारगर वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक लोगों को कई तरह की बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे कोरोना वायरस का खात्मा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे...
Coronavirus: जब तक नहीं आ जाती वैक्सीन, कोरोना वायरस को कैसे रोका जा सकता है?
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दुनिया के कई देशों में सरकारों ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया हुआ है। कई जगहों पर तो इसका सख्ती से पालन किया जा रहा है, जिससे वहां कोरोना की रफ्तार काफी हद तक थम गई है, लेकिन जिन जगहों पर लॉकडाउन में ढिलाई की गई है, वहां कोरोना के मामले लॉकडाउन के बावजूद बढ़ते जा रहे हैं। इससे सरकारों को भी परेशानी हो रही है और लोगों को तो हो ही रही है। इसलिए बेहतर है कि लॉकडाउन में आप कोशिश करें कि घर से बाहर ना निकलें। यह कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने यानी उसे खत्म करने में कारगर हो सकता है।
कौन-कौन सी सावधानियां बरतें?
- घर पर ही रहें और संभव हो तो लोगों से एक निश्चित दूरी बनाकर रहें।
- किसी भी सार्वजनिक स्थान पर जाने से बचें।
- बहुत अधिक जरूरत न हो तो यात्रा न करें
- घर पर भी रहें तो मास्क लगाकर रहें
- घर पर लोगों को आने से मना करें, कोई आता है तो उन्हें समझाएं, मिलने से बचें।
संक्रमित हैं तो क्या करें?
- खुद को दूसरों से अलग रखें
- कम से कम 14 दिन अलग रहें तो ज्यादा बेहतर है
- घर से बाहर कहीं भी न जाएं, इससे दूसरे व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना बढ़ सकती है
- मास्क का हमेशा इस्तेमाल करें
ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत
लगभग तीन महीने पहले पब्लिक हेल्थ ऑफ इंग्लैंड ने कहा था कि कुछ गंभीर और विशेष तरह के लोगों को कम से कम 12 हफ्ते के लिए खुद को दूसरों से अलग कर लेना चाहिए।
- गर्भवती महिला, किसी को हृदय रोग या कोई जन्मजात बीमारी है
- कैंसर रोगी, जिनकी कीमोथैरेपी या दवा चल रही है
- जिनका अंग प्रत्यारोण हुआ है और उम्र 75 साल है
- पिछले छह महीने में जिनका बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ है